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नाचते-खेलते युवाओं को क्यों आ रहा हार्ट अटैक? स्लिम बॉडी वाले 25 साल के युवा भी रहे सतर्क, बैड कोलेस्ट्रॉल बन रहा वजह

Published: Wed, 21 Oct 2026 10:23 PM (IST)

भारतीय युवाओं में दिल की बीमारी पश्चिमी देशों की तुलना में 5-10 साल पहले हो रही है, जिसका मुख्य कारण ...और पढ़ें

यह प्रतीकात्मक तस्वीर है।

यह प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. युवाओं में हार्ट अटैक का मुख्य कारण विसरल फैट।

  2. लिपोप्रोटीन-ए धमनियों में प्लाक जमा कर बढ़ाता है खतरा।

  3. 20-45 आयु वर्ग के 600 से अधिक मरीज हर माह।

अंकुश शुक्ल, कानपुर। भारतीय में दिल की बीमारी पश्चिमी देशों की तुलना में पांच से 10 साल पहले दस्तक दे रही है। पेट की अंदरूनी चर्बी यानी छिपा हुआ मोटापा और आनुवंशिक रूप से तय लिपोप्रोटीन के कारण ही नाचते, खेलते और आफिस में काम करते हुए भी युवावस्था में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। 60 से 80 साल के बीच में होने वाले दिल की बीमारी 25 साल के युवा में मिल रही है।

हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलाजी) में हर माह 20 से 45 आयुवर्ग के 600 से ज्यादा हृदय रोगी संस्थान में पहुंच रहे हैं। जिनकी जांच में विसरल फैट (छिपा हुआ मोटापा), लिपोप्रोटीन हार्ट अटैक की मुख्य वजह बन रहा है। यह वो युवा हैं, जो देखने में स्लिम बाडी वाले थे और उनकी कमर की माप 90 व महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से अधिक मिली।

लिपोप्रोटीन-ए जेनेटिक बैड कोलेस्ट्राल है, जो धमनियों की दीवारों पर बहुत तेजी से चिपकता और वहां प्लाक जमा कर देता है। इसकी बनावट ऐसी होती है जो शरीर की थक्का घोलने वाली प्राकृतिक प्रणाली को रोक देती है। नतीजतन, दिल के एओर्टिक वाल्व में कैल्शियम जमा होने से नसों के अंदर अचानक खून का थक्का बन जाता है, जो ब्लाकेज के कारण हार्ट अटैक करता है।

कार्डियोलाजी के विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश्वर पांडेय ने बताया कि नाचने, दौड़ने व जिम में ज्यादा मेहनत करने के दौरान जब शरीर को अचानक अधिक खून और आक्सीजन की जरूरत होती है, तो यह चिपचिपा लिपोप्रोटीन धमनियों की पहले से बनी ब्लाकेज तथा खून के थक्के को सक्रिय कर देता है, इससे ही शडन कार्डियक अरेस्ट का खतरा होता है। इसके साथ ही छिपा हुआ मोटापा और लिपोप्रोटीन ए हार्ट को अंदर से खोखला बना रहा है।

यह फैट अंगों के अंदर और पेट की गहराई में जमा होने वाली चर्बी है, जो हमारे दिल को अंदर ही अंदर कमजोर कर रही है। यह फैट सक्रिय अंग की तरह काम करता है, जो लगातार जहरीले और सूजन बढ़ाने वाले केमिकल्स (साइटोकिन्स) छोड़ता रहता है। यह सूजन सीधे आपकी दिल की धमनियों को प्रभावित करती है।

ऐसे करें लिपोप्रोटीन रिपोर्ट का अध्ययन

  • 30 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर स्तर में कम खतरा रहता है।
  • 30 से 50 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में हार्ट अटैक का जोखिम।
  • 50 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा स्तर पर बढ़ा हुआ खतरा।

ये भी जानें

  • 700 से ज्यादा मामले हर दिन हार्ट के कार्डियोलाजी में पहुंच रहे।
  • 100 से ज्यादा मामले 20 से 45 आयुवर्ग के आ रहे।
  • 50 से ज्यादा हार्ट रोगी हर दिन हो रही भर्ती।

 

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