छोटी माता को हल्के में न लें! चिकन पाक्स संक्रमित को करें आइसोलेट, झाड़-फूंक पड़ सकती है भारी
बदलते मौसम में कानपुर में चिकन पॉक्स (छोटी माता) के बढ़ते मामलों पर डॉ. डीपी शिवहरे ने सलाह दी है। ...और पढ़ें

दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डा. डीपी शिवहरे । जागरण
HighLights
बदलते मौसम में चिकन पॉक्स का खतरा बढ़ जाता है
संक्रमित व्यक्ति को तुरंत आइसोलेट करें, डॉक्टरी सलाह लें
झाड़-फूंक से बचें, रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर करें
जागरण संवाददाता, कानपुर। बदलते मौसम, खासकर उमस भरी गर्मी, बारिश और सर्दियों की शुरुआत में चिकन पाक्स (छोटी माता) का खतरा काफी बढ़ गया है। तापमान और नमी में उतार-चढ़ाव वैरिकाला-जोस्टर वायरस के मामले एलएलआर अस्पताल, उर्सुला और कांशीराम चिकित्सालय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बन स्वास्थ्य केंद्रों में बढ़ रहे हैं। इस संक्रामक बीमारी से बच्चे, बुजुर्ग को बचाने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करें।
संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेट कर डाक्टर की सलाह पर ही इलाज कराएं। घर और झाड़-फूंक के चक्कर में इलाज करने से बचें। यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह बातें शनिवार को दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डा. डीपी शिवहरे ने पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कही। पेश है बातचीत के मुख्य अंश...
- इस मौसम में चिकन पाक्स क्यों बढ़ने लगता है। इसका खतरा सबसे ज्यादा किसे हो सकता है?- रवि आनंद, कल्याणपुर। सीमा शुक्ला, लालबंगला।
- चिकन पाक्स का खतरा इस मौसम में वायरल की अधिकता के कारण हो सकता है। गर्मी से सर्दी की ओर जा रहे मौसम में चिकन पाक्स का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि यह मौसम वायरल के लिए अनुकूल होता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण बच्चों के साथ बुजुर्ग में इसका खतरा बना रहता है। यह संक्रामक बीमारी है। जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता के कारण ज्यादा होती है।
- चिकन पाक्स होने पर क्या करें। इससे बचाव के लिए क्या करें? - जय प्रकाश तिवारी, बर्रा। माया रावत, नानकारी। ओमकार यादव, प्रयागराज।
- चिकन पाक्स होने पर घर पर आइसोलेट हो जाए। भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें। इसका असर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर ज्यादा होता है। इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करें। खान-पान बेहतर करें। योग करें। पर्याप्त नींद लें। झाड़-फूंक से बचें। संक्रामक बीमारी के ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर इसके बिगड़ते मामले सामने आते हैं। बेहतर डाइट, खान-पान व आइसोलेशन तथा डाक्टरी सलाह पर इलाज से संक्रामक बीमारी को ठीक किया जा सकता है।
- चिकन पाक्स में कब डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए? - संजय कुशवाहा, दबौली।
- चिकन पाक्स की समस्या होते ही डाक्टर को दिखाएं। घर में बिना डाक्टर की सलाह के इलाज जानलेवा हो सकता है। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े। यह संक्रामक बीमारी है, इसमें समय पर विशेषज्ञ की सलाह पर इलाज जरूरी है।
- हेयर फाल की समस्या से परेशान हूं? - मनीष तिवारी, श्याम नगर।
- पांच से छह साल से हेयर फाल से परेशान हूं, कई जगह इलाज कराया पर हेयर फाल कम नहीं हो रहा है। बाल लगातार गिर रहे हैं। एक बार रक्त की जांच के साथ आप एलएलआर अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में दिखा लें। हेयर लास के लिए तनाव मुक्त रहें, डाक्टर की सलाह पर दवाएं लें।
- चिकन पाक्स संक्रमित से दूसरों में न फैले इसके लिए क्या करना चाहिए? - साधना सिंह, ग्वालियर। सरवन सिंह, चौबेपुर।
- चिकन पाक्स का संक्रमण अगर किसी को हो गया है तो उसे तुरंत आइसोलेट हो जाना चाहिए। डाक्टर की सलाह पर घर या अस्पताल में इलाज कराना चाहिए। अगर संक्रमित व्यक्ति घर या आफिस में किसी के संपर्क में सीधे आएगा तो दूसरों में फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दूरी बनाएं और कम से कम सात दिनों तक उचित दूरी बनाकर अन्य सदस्यों से अलग रहें।
- चेहरे पर झाइयां हैं, इससे कैसे बचाव करें? - सेजल, जहानाबाद।
- धूप में सीधे निकलने से बचें। धूप का एक्सपोजर झाइयों को बढ़ाता है। खान-पान बेहतर करें, पर्याप्त नींद लें। स्वस्थ आहार से बीमारियों से बचा जा सकता है। अक्सर झाइयों के सही हो जाने के बाद लोग फिर से धूप में निकलते हैं, इस कारण मेलेनिन नामक पिगमेंट का उत्पादन बढ़ जाता है, इससे ही चेहरे और अन्य खुले अंगों पर झाइयां होने लगती है।
- जांघों में लाल चकत्ते व पपड़ी जैसी त्वचा से निकल रही है? - चंद्रभान दुबे, बाबूपुरवा।
- यह फंगल संक्रमण लग रहा है। एक बार आप एलएलआर अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में दिखा लें। जांच में फंगल संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उसकी स्थिति उसका इलाज शुरू किया जाएगा। इसमें अनदेखी फंगल संक्रमण को बढ़ा देगी। इसलिए जल्दी आप त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखा लें।
- चिकन पाक्स से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई जा सकती है क्या? - शिवगोपाल बाजपेई, रावतपुर गांव, सत्यम, जहानाबाद। प्रियंका, गाजियाबाद।
- यह वायरल संक्रमण है। इसमें शरीर में छोटे पानी वाले छाले होते हैं। इसमें सिर में दर्द व कमजोरी भी हो सकती है। चिकन पाक्स बदलते मौसम, खासकर उमस भरी गर्मी, बारिश और सर्दियों की शुरुआत में चिकन पाक्स (छोटी माता) का खतरा काफी बढ़ जाता है। तापमान और नमी में उतार-चढ़ाव वैरिकाला-जोस्टर वायरस के कारण होता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन बच्चों में कराया जा सकता है। अब युवा व बुजुर्ग के लिए भी वैक्सीनेशन हो रहा है।
- रूसी और एक्ने की समस्या हो गई है, क्या जंक और फास्ट फूड के अधिक सेवन से त्वचा रोग का खतरा बढ़ सकता है? - संतोष वर्मा, बिल्हौर। कोमल चतुर्वेदी, किदवई नगर।
- जी हां, त्वचा से जुड़ी बीमारी का मुख्य कारण खराब होता खान-पान है। रूसी व एक्ने की समस्या लंबे समय तक बाहर के खाने व खराब होती डाइट के कारण होती है। इससे बचाव के लिए शरीर में पानी की कमी न होने दें, पर्याप्त नींद लें और जंक व फास्ट फूड लेने से बचें। रूसी की अधिक समस्या होने पर एंटी डैंड्रफ शैंपू का सेवन करें।
इन्होंने किए प्रश्न
वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही। पुष्कर यादव, उत्तरीपुरा। बिट्टन देवी, नवाबगंज। आशीष, काकादेव। अंकुर, कल्याणपुर। रिषभ, काकादेव। आशीष, किदवई नगर। मोहिनी गुप्ता, इटावा बाजार। साक्षी त्रिपाठी, औरैया। विक्रम, जहानाबाद। मनीष, काकादेव। अजय, भैरमपुर, हर्ष किदवई नगर।
ऐसे करें बचाव
- संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है।
- संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
- स्वच्छता व हाइजीन का ख्याल रखें।
- संक्रमित व्यक्ति के तौलिए, कपड़े, बिस्तर और बर्तन दूसरों के साथ साझा न करें।
- रोगी को अलग हवादार कमरे में रखें ताकि परिवार के अन्य सदस्यों गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों व कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों में संक्रमण न फैले।
- संक्रमित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी, जूस और हल्का सादा संतुलित आहार लें।
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