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    जन उपयोगी साबित हो रहे HBTU के शोध, University की यह पांच उपलब्धियां आपको भी कर देंगी हैरान

    By Abhishek AgnihotriEdited By:
    Updated: Tue, 23 Nov 2021 03:02 PM (IST)

    University के ऐसे शिक्षक व छात्र हैं जिन्होंने अपनी मेधा से कई ऐसे शोध किए हैं जो जन व समाज उपयोगी रहे। अब 25 नवंबर को विवि का शताब्दी वर्ष समारोह है जिसमें राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के सामने विवि की इन सभी उपलब्धियों को उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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    HBTU University के शिक्षकों व छात्रों ने कई शोध किए हैं।

    कानपुर, जागरण संवाददाता। हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विवि (HBTU) के प्रो. ओंकार सिंह ने वर्ष 2010 में जो मोटराइज्ड व्हील चेयर तैयार की थी, उसका उपयोग आज भी दिव्यांग करते हैं। विवि के प्रोफेसर एसके गुप्ता ने पानी शुद्ध रखने के लिए सुराही व कुल्हड़ बनाया। विवि के तमाम ऐसे शिक्षक व छात्र हैं, जिन्होंने अपनी मेधा से कई ऐसे शोध किए हैं जो जन व समाज उपयोगी रहे। अब 25 नवंबर को विवि का शताब्दी वर्ष समारोह है, जिसमें राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के सामने विवि की इन सभी उपलब्धियों को उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। विवि द्वारा कई संस्थाओं से करार की भी तैयारी है। ऐसे में विवि के शिक्षकों द्वारा किए गए प्रमुख शोध व करार को लेकर प्रस्तुत है यह रिपोर्ट।

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    दिव्यांग चला रहे मोटराइज्ड व्हीलचेयर

    एचबीटीयू में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. ओंकार सिंह ने वर्ष 2010 में एलिम्को के साथ मिलकर मोटराइज्ड व्हील चेयर को तैयार किया। इसके बाद इसे 11 मई 2010 को पेटेंट कराया। फिर, केंद्र सरकार ने दिव्यांगों को यह मोटराइज्ड व्हील चेयर सौंप दी। प्रो. ओंकार सिंह ने एलिम्को के साथ ही मिलकर वर्ष 2015 में सोलर पावर ट्राइसाइकिल तैयार की, जिसे 18 फरवरी 2015 को पेटेंट कराया गया। इस ट्राइसाइकिल का भी उपयोग दिव्यांग कर रहे हैं।

    पानी को एक माह तक शुद्ध रखेगी सुराही व कुल्हड़

    एचबीटीयू में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एसके गुप्ता ने वर्ष 2020 में पीपल, आम, बबूल की छाल व सूखी पत्तियों से एक्टिवेटेड कार्बनयुक्त मिट्टी से ऐसी सुराही तैयार की, जो एक माह तक पानी को शुद्ध रख सकती थी। प्रो. गुप्ता ने उसी मिट्टी से कुल्हड़ भी तैयार किया। उन्होंने बताया कि उनका यह शोध बेहद कारगर रहा, हालांकि कोरोना महामारी के चलते वह इसे पेटेंट अभी नहीं करा पाए हैं। बताया कि एक्टिवेटेड कार्बन पानी में घुले क्रोमियम, फ्लोराइड व आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्वों को साफ कर सकता है। जल्द ही इस शोध को पेटेंट कराया जाएगा।

    ट्रैफिक लोड के मुताबिक काम करेगा सिग्नल सिस्टम

    शहर के कई चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल सिस्टम संचालित हैं, अब उन्हें और आधुनिक किया जाएगा। एचबीटीयू के प्रोफेसर व कमिश्नरेट पुलिस के अफसर मिलकर यह काम कर रहे हैं। एचबीटीयू के कुलसचिव डा. नीरज सिंह ने बताया कि किसी एक चौराहा पर अब सिग्नल सिस्टम को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निंग तकनीक से संचालित करने की तैयारी है। ऐसे में सिग्नल ट्रैफिक लोड के मुताबिक काम करेगा। सिग्नल सिस्टम पर जो टाइमर लगा होगा, वह वाहनों की संख्या के मुताबिक ही अपने रंग बदल सकेगा। विवि के इस शोध से लाखों लोगों को राहत मिलेगी।

    स्वास्थ्य व कृषि के क्षेत्र में बेहतर करने को तैयार छात्र

    एचबीटीयू की ओर से हाल ही में किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी व जीबी पंत एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पंत नगर के साथ करार किया गया है। एचबीटीयू कुलपति प्रो. समशेर ने बताया कि दिसंबर तक अंत तक विवि द्वारा 10 अलग-अलग संस्थाओं से करार की तैयारी है। वहीं, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर जितेंद्र भास्कर ने बताया कि किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के साथ अब विवि के छात्र जहां स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम करेंगे, वहीं जीबी पंत एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर ऐसे उपकरण तैयार करेंगे तो सस्ते, सुलभ व आसानी से उपयोग किए जा सकें।

    नैनो टेक्नोलाजी व बायो टेक्नोलाजी से जुड़े प्रयोगों की लेंगे जानकारी

    एचबीटीयू में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अब नैनो टेक्नोलाजी व बायोटेक्नोलाजी से जुड़े प्रयोगों की जानकारी ले सकेंगे। विवि में पूर्व छात्र डा. अरुप कुमार दत्ता की ओर से एक लैब तैयार की जा रही है, जिसमें छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान मिल सकेगा। अगले सेमेस्टर से 10 छात्रों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए भी करार हो चुका है।