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GST नियमों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों को गिरफ्तारी और छोटे मामलों में नोटिस से मिलेगी राहत

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:02 PM (IST)

केंद्र सरकार ने व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी नियमों में अहम बदलाव किए हैं।

अब जीएसटी सचल दल की जांच प्रक्रिया नियंत्रित होगी, जो 1 नवंबर से लागू होंगे।

अब जीएसटी सचल दल की जांच प्रक्रिया नियंत्रित होगी, जो 1 नवंबर से लागू होंगे।

HighLights

  1. जीएसटी मामलों में अब गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं होगी।

  2. छोटे कर विवादों में 10 हजार से कम पर नोटिस नहीं।

  3. सचल दल की जांच अब ठोस खुफिया सूचना पर आधारित।

जागरण संवाददाता, कानपुर। जीएसटी व्यवस्था में व्यापारियों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम बदलाव लागू किए हैं। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने नए निर्देश जारी किए हैं।

इनके तहत जीएसटी मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं करने, छोटे कर विवादों में नोटिस जारी करने पर रोक लगाने और सचल दल की जांच प्रक्रिया को नियंत्रित करने की बात शामिल है। यह सभी बदलाव एक नवंबर से लागू हो रहे हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने इन फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे व्यापारियों को अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि कानून में संशोधन की प्रक्रिया में समय लग सकता था। ऐसे में अंतरिम व्यवस्था के तहत जारी निर्देशों से व्यापारियों के बीच कार्रवाई का भय कम होगा और वे निर्भीक होकर कारोबार कर सकेंगे।

सीए हिमांशु सिंह ने बताया कि ये महत्वपूर्ण बदलाव आठ अक्टूबर को आयोजित 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में की गई सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं। हालांकि, इन सुधारों को कानूनी संशोधन के माध्यम से एक अप्रैल 2027 से लागू करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने व्यापारियों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से संशोधन होने तक विभागीय अधिकारियों को इनका पालन करने के निर्देश दिए हैं।

एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता व एडवोकेट एस मनु ने बताया कि नए निर्देशों के अनुसार सीजीएसटी, एसजीएसटी, आइजीएसटी और उपकर मिलाकर 10 हजार रुपये से कम के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य छोटी-छोटी कर विसंगतियों को लेकर मुकदमेबाजी और विभागीय कार्रवाई का बोझ कम करना है।

सचल दल की जांच प्रक्रिया को भी सख्त नियमों के दायरे में लाया गया है। अब किसी वाहन को रास्ते में मनमाने ढंग से रोकने के बजाय ठोस खुफिया सूचना के आधार पर ही जांच की जा सकेगी। इसके लिए संयुक्त आयुक्त स्तर या उससे ऊपर के अधिकारी की लिखित अनुमति और जांच के कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा।

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सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यदि वाहन में जा रहे माल का सप्लायर या प्राप्तकर्ता संबंधित राज्य में पंजीकृत नहीं है तो केवल इसी आधार पर सचल दल वाहन को रोककर जब्त नहीं कर सकेगा। ऐसी स्थिति में संबंधित क्षेत्राधिकार के अधिकारी को सूचना भेजनी होगी और वाहन को आगे जाने देना होगा।

फिलहाल ये निर्देश केंद्र सरकार ने सीबीआइसी के माध्यम से जारी किए हैं। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य कर विभाग के लिए इसी तरह के निर्देश जारी करेगी, जिससे प्रदेश के व्यापारियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

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