12 साल बाद EPFO की वेतन सीमा 15 से 25 हजार, कानपुर सहित 15 जिलों के 80 हजार कामगारों को फायदा
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने 12 साल बाद ईपीएफओ की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये की है। ...और पढ़ें
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यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
ईपीएफओ की वेतन सीमा 12 साल बाद 15 से 25 हजार हुई
कानपुर रीजन के 80 हजार कामगारों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन 1000 से 7500 करने की मांग
जागरण संवाददाता, कानपुर। केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ओर से 12 साल बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया है। इससे कानपुर रीजन के 15 जिलों में 80 हजार कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो जाएगा। यह निर्णय नियोक्ताओं के लिए भी अपने प्रतिष्ठानों में पात्र कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ने बेहतर अवसर है।
नियोक्ता नई वेतन सीमा के साथ-साथ वर्तमान इंप्लाइज इनरोलमेंट अभियान–2026 (ईईसी-2026) का लाभ उठाकर कार्यरत पात्र एवं पूर्व में छूटे कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ सकते हैं। पनकी, दादा नगर, जाजमऊ औद्योगिक क्षेत्र में 80 प्रतिशत कामगार 18 हजार से 24 हजार की श्रेणी में हैं। ये अब तक पीएफ की श्रेणी से बाहर थे।
अब नियोक्ताओं को इनका पूरा पीएफ देना होगा। इससे इन श्रमिकों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने श्रम मंत्रालय के फैसले को कामगारों के हित में बताया। साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन एक हजार रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये किए जाने की मांग की है।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने कामगारों के हित में वेतन सीमा बढ़ाने का सराहनीय फैसला लिया है। कर्मचारी संगठन पिछले कई वर्षों से कामगारों की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन एक हजार से बढ़ाकर 7500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। एक मांग पूरी हो गई है। उम्मीद है कि श्रम मंत्रालय पेंशनरों के हित में भी जल्द फैसला लेगा।
पीएस बाजपेई, राष्ट्रीय सचिव इंटक व ईपीएफओ क्षेत्रीय सलाहकार समिति सदस्य।
ईपीएफओ की वेतन सीमा में पिछली बार बदलाव सितंबर 2014 में हुआ था, जब इसे 6,500 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया था। पिछले 12 साल से ट्रेड यूनियनें इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग कर रही थीं। जो अब जाकर 25 हजार रुपये की गई है। देर से सही लेकिन सरकार से कामगारों के हित में सराहनीय फैसला लिया है। मांग है कि सेवानिवृत्त कामगारों की पेंशन एक हजार से बढ़ाकर 7500 रुपये किया जाए।
राजेश शुक्ला, अध्यक्ष, ईपीएफ स्टाफ पेंशनर्स एसोसिएशन।
कर्मचारी संगठन पिछले कई वर्षों से ईपीएफओ की सीमा 30 हजार रुपये किए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन 12 साल बाद वेतन सीमा 25 हजार रुपये की गई है जो कि नाकाफी है। सरकार को 30 हजार रुपये वेतन सीमा करने का फैसला लेना चाहिए। वहीं, कामगारों के हित में फैसला आने के बाद अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
उमेश शुक्ला, महामंत्री, ईएसआइ ठेका मजदूर यूनियन।
