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भाजपा में उपचुनाव को लेकर कवायद तेज, सीसामऊ विधानसभा सीट पर इन दिग्गज नेताओं ने ठोका दावा

Assembly By Election भाजपा में उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सीसामऊ विधानसभा सीट पर कई दिग्गज नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है। प्रतिदिन नए-नए दावेदारों ने नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि इस सीट पर उपचुनाव अभी काफी दूर हैं लेकिन नेताजी पहले से ही अपना जुगाड़ बैठाने में लगे हुए हैं। अब पूर्व विधायक उपेन्द्र पासवान ने भी दावेदारी की है।

By Jagran News Edited By: Abhishek Pandey Thu, 11 Jul 2024 09:20 AM (IST)
भाजपा में उपचुनाव को लेकर कवायद तेज, सीसामऊ विधानसभा सीट पर इन दिग्गज नेताओं ने ठोका दावा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

जागरण संवाददाता, कानपुर। सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र का उप चुनाव अभी दूर है लेकिन भाजपा के अंदर दिन प्रतिदिन नए-नए दावेदार सामने आते जा रहे हैं। अब क्षेत्र से जुड़े रहे एक बड़े नेता ने पूर्व विधायक उपेन्द्र पासवान का नाम आगे बढ़ाया है। इससे पहले वह घाटमपुर के उपचुनाव में जीते थे। उनके नाम के साथ ही दलित को टिकट देने की बात आगे बढ़ाई गई है।

दूसरी ओर पूर्व सांसद और महिला कल्याण राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति अनिल शुक्ला वारसी ने भी आवेदन कर दिया है। सीसामऊ से टिकट के लिए भाजपा में जबरदस्त जातीय खींचतान जारी है। वैश्य प्रत्याशी के रूप में पिछले चुनाव में सलिल विश्नोई यहां से चुनाव मैदान में उतरे थे।

उपेन्द्र पासवान ने भी की दावेदारी

बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में गुरुवार को होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिये वह फिर बाकी दावेदारों से आगे निकलने का प्रयास करेंगे। हालांकि ब्राह्मण दावेदारों की लाइन भी लगी हुई है। उपेन्द्र पासवान का नाम आगे बढ़ाने के पीछे यह दावा भी किया जा रहा है कि इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशियों में आज तक सिर्फ राकेश सोनकर ही जीते हैं, इसलिए उन्हें ही टिकट दिया जाए।

यह नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जिन्होंने इस नाम को आगे बढ़ाया है वह सुरेश खन्ना के साथ पिछली बैठक में भी मौजूद थे। इस नाम के आगे आने से क्षेत्रीय स्तर पर चल रही खींचतान भी साफ दिखने लगी है। हालांकि दलित प्रत्याशी बनाए जाने का अभी से विरोध हो गया है।

पार्टी के अंदर शुरू हुई खींचतान

पार्टी के अंदर यह बात तेजी से रखी जानी शुरू हो गई है कि जिस समय राकेश सोनकर यहां से लड़े थे, तब यह सीट सुरक्षित थी लेकिन अब यह सामान्य है और सामान्य वर्ग के ही किसी व्यक्ति को टिकट दिया जाए। इसके बीच क्षत्रिय और सिंधी समाज के लोगों ने भी अपने आवेदन करने के साथ संघ कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।

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