विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पटाखे जलाते समय न पहनें सिंथेटिक कपड़े, जलने पर सबसे पहले करें ये काम; कानपुर के डॉक्टरों ने दी सलाह

Published: Sat, 07 Nov 2026 05:47 PM (IST)

दीपावली पर पटाखे जलाते समय सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें और सूती कपड़े पहनें। जलने पर प्रभावित हिस्से को तुरंत बहते पानी से धोएं तथा ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता दें।

दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते सर्जन डा. विकास कटियार (बाएं)। साथ में चिकित्सा अधीक्षक डा. विनय कटियार । जागरण

दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते सर्जन डा. विकास कटियार (बाएं)। साथ में चिकित्सा अधीक्षक डा. विनय कटियार । जागरण

HighLights

  1. सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें, सूती कपड़े ही पहनें

  2. जलने पर प्रभावित हिस्से को बहते पानी से धोएं

  3. ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता दें, बच्चों पर नजर रखें

जागरण संवाददाता, कानपुर। पटाखा जलाते समय सिंथेटिक कपड़े ( नायलान, रेयान या सिल्क) पहनने से पूरी तरह बचना चाहिए। इन कपड़ों में बहुत जल्दी आग लगने का खतरा रहता है। यह जलने पर त्वचा से चिपक जाते हैं, इससे शरीर को अधिक नुकसान होता है। इसकी जगह शरीर पर पूरी तरह फिट आने वाले सूती (काटन) के कपड़े ही पहनने चाहिए।

यदि पटाखा जलाते समय त्वचा झुलस या जल जाती है, तो सबसे पहला प्राथमिक उपचार प्रभावित हिस्से को सादे और बहते पानी से धोना सबसे अच्छा रहता है। यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में एलएलआर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. विनय कटियार और जीएसवीएम मेडिकल कालेज के वरिष्ठ सर्जन व पूर्व सीएमएस डा. विकास कटियार ने पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कही। पेश है पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश...

 

  • पटाखों से किस प्रकार का नुकसान हो सकता है। अगर कोई घटना हो तो क्या करें? - एसके पांडेय नौबस्ता।
  • पटाखों से बच्चों व बुजुर्ग को दूरी बनाकर रखें। अधिक रोशनी व धमाके वाले पटाखे खरीदने से बचें। घटना होने पर तुरंत नजदीक के अस्पताल में पहुंचे। घर पर ही इलाज करने से बचें। आंख में बारूद के कण जाने पर देरी न करें। एलएलआर की इमरजेंसी में नेत्र इमरजेंसी 24 घंटे सुचारू रहेगी। ताकि हर गंभीरता के मरीजों का इलाज किया जा सके।

 

  • ऐसे कौन से पटाखे जलाएं, जिससे हमें और वातावरण को नुकसान न हो? - ख्याति पांडेय, बिधनू। राजवीर, बर्रा।
  • ग्रीन पटाखे बाजार में उपलब्ध है। इन पटाखों का नुकसान शरीर व वातावरण को नहीं होता है। इस प्रकार के पटाखों से बीमारियों का खतरा भी नहीं रहता है। इसलिए ग्रीन पटाखों को ही प्राथमिकता है। संभव हो तो कम से कम पटाखे जलाएं और दीप अधिक जलाएं। इस प्रकार के पटाखों से खतरा भी कम रहता है। दीपावली पर बच्चों को पटाखें किसी बड़े की देखरेख में छुड़वाएं। हवा में जाने वाले व जमीन पर जलने वाले पटाखों से सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए सतर्कता बरतें और बच्चों के पटाखे जलाने के समय सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें। काटन का शरीर से कसे हुए कपड़े पहनाएं।



  • पटाखों से होने हादसे पर क्या करें। बचाव के लिए क्या सावधानी बरतें? - सुरेश अवस्थी, पांडुनगर। आकाश शर्मा, बिल्हौर।
  • पटाखों से होने वाले हादसे क लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी सरकारी अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बेड आरक्षित किए गए हैं। जीवन रक्षक दवाएं और डाक्टरों की टीम को लगाया गया है। जो इमरजेंसी में पहुंचने वाले घायलों का इलाज प्राथमिकता पर किया जाएगा। पटाखों से बचाव के लिए सतर्क रहें और दूरी बनाकर ही दीपोत्सव का त्योहार मनाएं। दीप जलाने में भी सावधानी बरतें।

 

  • पटाखों से आग लगने पर क्या करें। बचाव के लिए प्राथमिक रूप से क्या करना चाहिए? - पुनीत शर्मा, बिल्हौर। धीरेंद्र सिंह, ग्राम रामपुर।
  • खुले स्थान पर ही पटाखों को जलाएं। बच्चों को पटाखे सीधे न जलाने दें। अगर कोई जल जाता है, तो सबसे पहले बर्फ के पानी में हाथ डाल दें। रनिंग वाटर में जले हुए भाग को करीब 10 से 15 मिनट तक उस भाग को रखें। ऐसा करने से बारूद से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अक्सर लोग जलने के बाद टूथपेस्ट लगा देते हैं। इससे बचना चाहिए।

 

  • पटाखों का धुआं किस प्रकार नुकसानदायक है। इससे बचाव के लिए क्या करें? - श्रेयस, बौद्ध नगर, नौबस्ता। वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही। सुनील कल्याणपुर,
  • पटाखों से निकलने वाला धुआं अस्थमा व सांस के रोगियों के लिए नुकसानदायक होता है। इसके साथ ही बारूद का धुआं सांस, आंख व गले को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों व बुजुर्ग में इसका खतरा अधिक रहता है। खासतौर पर अस्थमा, क्षय रोग के मरीजों के साथ हृदय रोगी बचाव करें। दीपावली में पटाखों के धुएं से होने वाले प्रदूषण के बचाव के लिए मास्क लगाएं। रात में सोते समय भाप लें। अधिक आवाज वाले पटाखों से बचें। यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। उचित रहेगा कि आप पटाखों को खुले स्थान पर ही जलाएं।

 

  • अगर पटाखे जलाते समय आंख में बारूद जाने पर क्या करें? - सीमा जैन, कल्याणपुर।
  • पटाखे जलाते समय अगर आंख में बारूद या उसका कण चला जाता है तो आंख को रगड़े नहीं, ठंडे पानी से आंख को साफ करें और बिना देरी किए नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। बारूद का कण आंख में जाने से कार्निया को खतरा हो सकता है। इस अंधेपन का कारण बनता है। 

 

  • पटाखों से बर्न के खतरे व उससे बचाव के लिए क्या करें? - जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक।
  • पटाखे जलाते समय कपड़े अधिक ढीले न पहनें, जूते पहनकर ही पटाखे जलाएं। खुले मैदान व छत पर ही पटाखे जलाएं। गलियों व गाड़ियों के पास पटाखे जलाने से खतरा हो सकता है। अगर पटाखों से शरीर का कोई भाग जल गया है तो उसे सादे पानी से धोकर नजदीकी डाक्टर को दिखाएं। एलएलआर अस्पताल पूरी तैयार है। बर्न यूनिट व वैकल्पिक वार्ड की व्यवस्था कर बर्न के घायलों का इलाज प्राथमिकता पर किया जाएगा।

 

  • पटाखा हाथ में फटने पर क्या करना चाहिए और क्या करना चाहिए? - जय प्रकाश साहू, आजाद नगर।
  • अगर हादसा हो जाए तो सबसे पहले रनिंग वाटर के नीचे हाथ को कुछ देर रखें। घरेलू इलाज करने से बचें। बर्फ का प्रयोग कतई नहीं करें। दर्द होने पर पैरासिटामाल का प्रयोग कर करते हैं। घटना के बाद घबराएं नहीं, खतरे को कम करने के लिए डाक्टर की सलाह पर इलाज कराएं। जले हुए भाग में कलावा, कड़ा, अंगूठी को हटा दें। लालिमा व जलन होना भी गंभीर है। इसमें अस्पताल में इलाज कराएं। फफोड़े को कतई नहीं फोड़ें।

 

पटाखे जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • काटन कपड़े पहनकर ही पटाखे जलाएं।
  • सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें।
  • पटाखे जलाने वाले स्थान पर पानी से भरी बाल्टी रखें।
  • जले हुए भाग को रनिंग वाटर में 10 से 15 मिनट तक रखें।
  • आंख में बारूद जाने पर रगड़े नहीं।
  • जले हुए भाग पर टूथपेस्ट लगाने से बचें।
  • अधिक शोर व रोशनी वाले पटाखों से बचें।
  • बर्न के मामलों पर देरी न करें। तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचे।


एलएलआर अस्पताल में यह तैयारी

  • 20 बेड की वैकल्पिक बर्न यूनिट बनाई गई है।
  • डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ की अतिरिक्त टीम तैयार की गई है।
  • रेड जोन को दीपावली पर होने वाले ट्रामा के लिए रिजर्व किया गया।
  • नेत्र व ईएनटी की इमरजेंसी को 24 घंटे संचालित किया जाएगा।
  • ट्रामा टीम में हड्डी, न्यूरो, बर्न, सर्जन, ईएनटी, नेत्र रोग के विशेषज्ञ 24 घंटे दीपावली में रहेंगे।

 


इन्होंने किए प्रश्न

अर्जुन सिंह, ग्वालटाेली। राकेश कुमार, जरौली। पुष्पेंद्र जादौन श्याम नगर। कांति देवी जालौन। राधेश्याम अग्रवाल पांडुनगर। दीनदयाल शर्मा जीटी रोड। डा. एसके पाहूजा काकादेव। शालिनी कुमारी, स्वरूप नगर। पूजा अग्रवाल लालबंगला।

 

  • हेल्पलाइन नंबर
    888731139

 

यह भी पढ़ें- Dhanteras: सोने-चांदी से लेकर कार और इलेक्ट्रानिक्स तक... कानपुर में धनतेरस पर 1800 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।