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    सीपीआर अभियान: स्वस्थ दिल के लिए सतर्कता संदेश को समझना जरूरी

    Updated: Fri, 24 Jan 2025 08:45 PM (IST)

    हृदय रोग के बढ़ते मामलों के बीच यह जानना महत्वपूर्ण है कि हृदय रोग क्या है इसके लक्षण क्या हैं और इसके क्या कारण हैं। हृदय रोग वो स्थिति है जिसमें हृदय की संरचना या फिर उसके काम करने में परेशानी होती है। इसके लक्षणों में सीने में दर्द सांस लेने में कठिनाई चक्कर आना और बांहों या कंधों में दर्द शामिल हैं।

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    हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंग हृदय का ख्याल रखने में भागदौड़ भरी जीवनशैली बड़ी चुनौती बन रहा है।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंग हृदय का ख्याल रखने में भागदौड़ भरी जीवनशैली बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसे में लंबे समय तक दिल की अनदेखी करना जीवन पर भारी पड़ सकता है। लंबे समय तक दिल की अनदेखी करना जीवन पर भारी पड़ सकता है। 

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    सीने में दर्द, सांस फूलना और चक्कर आना जैसे लक्षण कमजोर दिल की स्थिति है। यह किसी भी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती है। कमजोर दिल के लक्षणों को पहचानना शीघ्र निदान और इलाज के लिए आवश्यक है। स्वस्थ दिल के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। कुछ आदतों को बदलने से ही दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। 

    मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीज विशेषज्ञ की सलाह पर जांच, इलाज और नियमित रूप से दवाएं लें। दवा के साथ संतुलित दिनचर्या और जीवन शैली के साथ योग और प्राणायाम की अच्छी आदत हृदय को गंभीरता से बचाती है। दैनिक जागरण के अभियान हृदय की बात के जरिये स्वस्थ दिल की बात जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    हृदय में किसी भी प्रकार की जटिलता दिखने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लेकर गंभीरता के हिसाब से जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञ की सलाह पर एंजियोग्राफी, रक्तचाप की निगरानी, रक्त परीक्षण, इकोकार्डियोग्राम (इको) परीक्षण, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ (ईसीजी) परीक्षण तथा होल्डर टेस्टिंग जांच बेहद जरूरी है। जो समय रहते रोग की गंभीरता को बता देती है और विशेषज्ञ की देखरेख में जांच और इलाज से जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।

    हृदय रोग के लक्षण

    • सांसों में परेशानी होना।
    • शारीरिक गतिविधि कम होना।
    • साइनोसिस- त्वचा, होंठ और नाखूनों का नीले रंग का दिखाई देना।
    • भूख का न लगना।
    • सांस का तेज होना।
    • बार-बार फेफड़ों के संक्रमण होना।
    • वजन में अप्राकृतिक वृद्धि।
    • पैर या पेट में सूजन।
    • चक्कर आना, सामान्य थकान।
    • त्वरित और अनियमित दिल की धड़कन।

    चेतावनी संकेत

    • बेहोश या चक्कर जैसा महसूस होना।
    • उल्टी या मतली।
    •  छाती या शरीर के ऊपरी हिस्से में बेचैनी, जो बांह या जबड़े तक फैल सकती है।
    •  ठंड लगना या फिर ठंड में भी पसीना आना।
    •  छाती में दबाव, जैसा दर्द या बेचैनी।

    लेखक : वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डा. कुणाल सहाय हैं।

    संजीवनी है सीपीआर...

    भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियंत्रित खानपान जैसी गलत आदतों ने कार्डियक अरेस्ट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। हाल के वर्षों में कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। 

    चिंता की बात ये है कि नौजवान भी इसका शिकार हो रहे हैं। इस डर और चिंता के बीच एक ऐसा तरीका भी है, जिसके जरिये कार्डियक अरेस्ट के मरीज को नवजीवन प्रदान किया जा सकता है। 

    डॉक्टरी भाषा में इसे सीपीआर यानि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन कहते हैं। स्वस्थ्य समाज के लिए सीपीआर का ज्ञान हर किसी के लिए जरूरी है। इसमें आप सिर्फ हाथों के इस्तेमाल से किसी व्यक्ति की मदद कर सकते हैं।

    इस स्थिति में सीपीआर उपयोगी

    • अचानक बेहोश हुए व्यक्ति को।
    • करंट लगने से बेहोशी आने पर।
    • पानी में गिर जाने से बेहोश होने पर।
    • दम घुट जाने से होने वाली बेहोशी पर।

    ऐसे दिया जाता है सीपीआर

    • अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है, तो अपने एक हाथ को दूसरे हाथ के ऊपर रखें और उसकी छाती के बीच (वक्ष भाग के ठीक नीचे) रखें।
    • अगर आप आठ साल तक के बच्चे की मदद कर रहे हैं, तो एक हाथ का इस्तेमाल करें और उसे उसकी छाती की हड्डी के ठीक नीचे रखें।
    • अपने शरीर के वजन का बल लगाते हुए, अपने हाथों को व्यक्ति की छाती के बीच में जोर से दबाएं। अपने हाथ की कलाई के ठीक पहले वाले हिस्से का इस्तेमाल करें।
    • व्यक्ति की छाती पर प्रति मिनट 100 से 120 बार दबाव डालें।
    • हर बार दो इंच नीचे की ओर दबाव डालें।
    • जिन लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण प्राप्त है, वे हर 30 दबावों (लगभग 20 सेकंड) के बाद व्यक्ति को दो बार मुंह से सांस देने के लिए दबावों को रोक सकते हैं।
    • जब तक व्यक्ति होश में न आ जाए या और सहायता न मिले, तब तक छाती को दबाते रहें और मुंह से सांस देते रहें।