किडनी कांड : दिल्ली के पीएसआरआइ अस्पताल के सीईओ डॉ दीपक शुक्ल को जेल
कानपुर में किडनी रैकेट मामले में एसआइटी ने डॉ. दीपक शुक्ल को गिरफ्तार किया था वो किडनी बदलने के लिए बनी कोर कमेटी के अध्यक्ष थे।
कानपुर, जेएनएन। शहर के चर्चित किडनी रैकेट मामले में एसआइटी ने दिल्ली स्थित पीएसआरआइ अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया है। डॉ. दीपक के खिलाफ किडनी बदलने की कानूनी प्रक्रिया में धांधली के साक्ष्य मिले हैं। वह किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल में बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष थे। रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
एसपी क्राइम राजेश यादव ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने किडनी रैकेट के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का 17 फरवरी को पर्दाफाश किया था। किदवईनगर निवासी इलेक्ट्रीशियन की पत्नी द्वारा बर्रा थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे के आधार पर सरगना टी राजकुमार राव व गौरव मिश्रा समेत छह आरोपित गिरफ्तार किए गए थे। इनसे मिले दस्तावेजों के आधार पर विवेचना शुरू हुई तो दिल्ली के कई नामी अस्पतालों की संलिप्तता उजागर हुई।
पिछले सप्ताह जांच टीम ने दिल्ली में जाकर कई अस्पतालों के दस्तावेज खंगाले। इसमें सामने आया कि पीएसआरआइ ( पुष्पावती सिंहानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट) में फर्जी दस्तावेज से लीवर व किडनी बदले गए हैं। पिछले दो साल में हुए चार केसों की पड़ताल के बाद इसकी पुष्टि हो गई। शुक्रवार को अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
यह था मामला
शिकायतकर्ता महिला ने तहरीर में लिखा था कि श्याम, जुनैद व मोहित उसे नौकरी दिलवाने का झांसा देकर गाजियाबाद और वहां से जांच के बहाने दिल्ली के अस्पताल ले गए थे। वहां तीन लाख रुपये में उसकी किडनी बेचने की कोशिश की। इसकी भनक लगने पर वह दिल्ली से लौट आई और एक फरवरी को बर्रा थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
इनके फर्जी कागजात तैयार करने में की थी मदद
पुलिस की जांच में सामने आया कि अस्पताल में मानव अंग प्रत्यारोपण के लिए बनी कमेटी की मिलीभगत से सुयैब उर्फ सीबू, राजेश गुप्ता, वरदान चंद्र, रईस आलम के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। इसके अलावा लैब में मरीज और डोनर के डीएनए मिलान के लिए ब्लड सैंपल बदले गए। डोनर व मध्यस्थ (वर्तमान में जेल में बंद) से पैसों का लेनदेन हुआ। डॉ. दीपक शुक्ल इस कमेटी के अध्यक्ष था।
इनकी भी सुनिये
-डोनर व मरीज के बीच क्या हुआ मुझे नहीं पता। किडनी प्रत्यारोपण के कागजात पूरे होने पर ही ऑपरेशन किया गया था। कमेटी के पास कागजों के वेरीफिकेशन का कोई तरीका नहीं है। ऑपरेशन से पहले आइडी के वह सभी कागजात लिए गए थे, जिन्हें सरकारी दस्तावेज माना जाता है। -डॉ. दीपक शुक्ल, सीईओ, पीएसआरआइ दिल्ली (आरोपित)
-किडनी रैकेट में संलिप्तता पाए जाने पर पीएसआरआइ के सीईओ डॉ. दीपक को गिरफ्तार किया गया है। विवेचना के आधार पर सामने आने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -अनंत देव तिवारी, एसएसपी कानपुर
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