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    Cardiac Arrest: किन लोगों को पड़ती है सीपीआर की जरूरत, आप इस तरह बचा सकते हैं दूसरों की जान

    Updated: Sat, 25 Jan 2025 06:55 PM (IST)

    कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक महत्वपूर्ण कौशल है। सीपीआर सीखकर आप किसी की जान बचा सकते हैं। सीपीआर देने के लिए सीएबी प्रक्रिया का पालन करें कंप्रेशन (छाती पर दबाव) एयरवे (वायुमार्ग को खोलना) ब्रीदिंग (मुंह से सांसें देना)। सीपीआर के बारे में अधिक जानने के लिए दैनिक जागरण के सीपीआर अभियान में शामिल हों।

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    डा. सुनीत गुप्ता, सीपीआर विशेषज्ञ और प्राणोदय संस्था के उपाध्यक्ष - फाइल फोटो

    डा. सुनीत गुप्ता, कानपुर। अनियंत्रित खानपान, गलत दिनचर्या, तनाव और भागदौड़ भरे जीवन ने कार्डियक अरेस्ट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। कोरोना काल के बाद से कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। चिंता की बात ये है कि नौजवान, बच्चे भी अब इसका शिकार हो रहे हैं।

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    इससे बचाव में तत्परता के साथ सतर्कता और सीपीआर के ज्ञान से कार्डियक अरेस्ट के मरीज को नवजीवन प्रदान किया जा सकता है। सीपीआर यानि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन जब भी किसी को दें तो सीएबी प्रक्रिया का पालन करें।

    इसमें सी का अर्थ है कंप्रेशन। इसमें छाती पर दबाव डालना होता है। ए का अर्थ है एयरवे यानि वायुमार्ग को खोलना। बी का अर्थ है ब्रीदिंग। इसमें मरीज को मुंह से सांसें दी जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सीपीआर के 25 प्रतिशत मामलों में बेहोश हुए मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    समाज को इसके लिए प्रशिक्षित करने की मंशा से दैनिक जागरण की ओर से सीपीआर अभियान चलाकर स्वस्थ हृदय की बात की जा रही है। इसके लिए अभियान चलाकर समाज में ज्यादा से ज्यादा लोगों को हाथ के हुनर से दूसरों के जीवन बचाने के लिए विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षित किया जाएगा।

    सीपीआर क्यों जरूरी? 

    जब हृदय धड़कना बंद कर देता है तो शरीर में खून की सप्लाई भी रुक जाती है। इससे सबसे पहले दिमाग काम करना बंद कर देता है। मरीज कोमा में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सीपीआर के जरिये हृदय की धड़कन दोबारा चालू की जा सकती है। इसमें हृदय के पास सीने पर दबाव देकर खून की सप्लाई पूरे शरीर में शुरू की जाती है।

    इस प्रक्रिया को लगातार तब तक करना होता है, जब तक कि हृदय काम न करने लगे। इसके लिए सीपीआर का ज्ञान बेहद जरूरी है। अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है, तो अपने एक हाथ को दूसरे हाथ के ऊपर रखें और उसकी छाती के बीच (वक्ष भाग के ठीक नीचे) रखें।

    इसके बाद अपने शरीर के वजन का बल लगाते हुए, अपने हाथों को व्यक्ति की छाती के बीच में जोर से दबाएं। अपने हाथ की कलाई के ठीक पहले वाले हिस्से का इस्तेमाल करें। व्यक्ति की छाती पर प्रति मिनट 100 से 120 बार दबाव डालें।

    हर बार दो इंच नीचे की ओर दबाव डालने का प्रयास करें। जिन लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण प्राप्त है, वे हर 30 दबावों (लगभग 20 सेकंड) के बाद व्यक्ति को दो बार मुंह से सांस देने के लिए दबावों को रोक सकते हैं। जब तक व्यक्ति होश में न आ जाए या और सहायता न मिले, तब तक छाती को दबाते रहें और मुंह से सांस देते रहें।  

    किन लोगों को पड़ती है सीपीआर की जरूरत

    • अचानक बेहोश हुए व्यक्ति को।
    • करंट लगने से बेहोशी आने पर।
    • पानी में गिर जाने से बेहोश होने पर।
    • दम घुट जाने से होने वाली बेहोशी पर।