प्रदूषण से 2 से 3 गुना बढ़ा दिल की बीमारी का खतरा, अब AI बैंड देगा अलर्ट; जानें कैसे करेगा बचाव
हवा में घुलता प्रदूषण का जहर दिल की बीमारियों का खतरा 2-3 गुना बढ़ा रहा है, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में, ...और पढ़ें

गंगा बैराज मंधना मार्ग स्थित इटरनिटी होटल में कार्डियोप्रिवेंट के उद्घाटन में कार्डियोलाजिस्ट सोसाइटी आफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. डा. सत्येंद्र तिवारी, हृदय रोग संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा, डा. उमेश्वर पांडेय, डा. अवधेश शर्मा व रूपाली खन्ना। जागरण
HighLights
प्रदूषण से दिल की बीमारियों का खतरा 2-3 गुना बढ़ा
कोलेस्ट्रॉल जांच की उम्र 40 से घटाकर 20 साल की गई
AI बैंड दिल की धड़कन और प्रदूषण पर अलर्ट देगा
जागरण संवाददाता, कानपुर। हवा में घुलता प्रदूषण का जहर दिल पर कहर ढा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में अनदेखी और खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) का बढ़ता स्तर हार्ट अटैक, एंजाइना पेन, नसों में सूजन व स्ट्रोक का कारण बन रहा है।
इनके आसपास रहने वालों में सामान्य लोगों से दो से तीन गुणा तक दिल की बीमारी मिल रही है। इसीलिए दिल्ली व कानपुर क्षेत्र में हर साल 45 से कम उम्र के 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। इसके साथ बीमारी का कारण आनुवांशिक, खराब दिनचर्या भी है। यह जानकारी नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलाजिस्ट डा. पुनीत अग्रवाल ने शनिवार को कार्डियोप्रिवेंट 2026 में दी।
सम्मेलन में दिल की बीमारी से बचाव के लिए नई गाइडलाइन निर्धारित की गई हैं। इसमें कोलेस्ट्राल जांच के लिए पहले 40 साल की आयु निर्धारित थी, जो अब 20 वर्ष की गई है। लिपोप्रोटीन की जांच हर किसी के लिए अनिवार्य कर दी गई है, 18 साल में लिपिड प्रोफाइल जांच कराने को कहा गया है।
लिपोप्रोटीन 30 नैनोमोल्स प्रतिलीटर तक सामान्य है, जबकि उससे ऊपर खतरा व 50 से ज्यादा अधिक होने पर खतरनाक स्तर होगा। एक्सरसाइज को दवा की ही तरह अनिवार्य बताया गया, जिसमें साइकिलिंग, तैराकी व तेज दौड़ शामिल है।
जम्मू-कश्मीर के डा. नजीउल्ला सूफी ने कहा कि तकनीक की मदद से काफी हद तक दिल की बीमारियां बढ़ने से रोकी जा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) युक्त बैंड दिल की धड़कन का अध्ययन करने के साथ दूषित हवा के लिए भी अलर्ट कर रहा है।
हाथ पर घड़ी की तरह बांधे जाने वाले इस उपकरण से हर समय दिल की धड़कनों की निगरानी की जा सकेगी। धड़कनें अनियंत्रित होने पर यह सचेत करेगा। इसे बाजार में उतारने पर काम किया जा रहा है। इससे भविष्य में हृदय रोगियों के लिए खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्डियोलाजिस्ट सोसाइटी आफ इंडिया के अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि प्रो. सत्येंद्र तिवारी ने दो हृदय रोगियों पर कम उम्र में अपोलीपोप्रोटीन, लिपोप्रोटीन ए व आनुवांशिक कारणों का डाटा साझा किया। उन्होंने बताया कि 70 प्रतिशत लोग बीपी, शुगर व कोलेस्ट्राल की दवा खाने में लापरवाही करते हैं, जो हार्ट अटैक का रिस्क फैक्टर बन रहा है।
अब एक इंजेक्शन से ही छह माह के लिए कोलेस्ट्राल की मात्रा को नियंत्रित कर दवा से मुक्ति दिलाई जा रही है। इससे पहले इटरनिटी होटल में सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। सम्मेलन में जम्मू कश्मीर, दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत देशभर के 400 से ज्यादा कार्डियोलाजिस्ट शामिल हुए।
