अगरबत्ती उद्योग का चीन को बाय-बाय, कानपुर में है एक हजार करोड़ का टर्न ओवर
अगरबत्ती की तीली अबतक चीन व वियतनाम से आयात होती थी लेकिन अब त्रिपुरा व असम में तीली बनाने का काम शुरू हो गया है।
कानपुर, जेएनएन। अगरबत्ती उद्योग ने चीन और वियतनाम को बॉय-बॉय कर दिया, अब अगरबत्ती बनाने में स्वदेशी तीली का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अगरबत्ती में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की तीली अब भारत में तैयार होने लगी है। लाॅक डाउन के पहले तक यह चीन व वियतनाम से आया करती थी। असम व त्रिपुरा के उद्यमियों ने इस प्रकार की तीली बनानी शुरू कर दी हैं। सुरस एवं सुगंध संस्थान अब चीन से आने वाली लकड़ी की तीलियां बनाने व उससे अगरबत्ती का निर्माण करने का प्रशिक्षण देगा।
आॅल इंडिया अगरबत्ती एसोसिएशन के साथ जुड़े उद्यमी इस प्रकार की लकड़ी की तीलियों के उत्पादन के लिए तैयार हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के साथ हुई एसोसिएशन की वेबिनार में यह बात निकलकर सामने आई कि लकड़ी की इन तीलियों को कानपुर में बनाया जाएगा। शहर में अगरबत्ती की औद्योगिक इकाइयां संचालित करने वाले कई उद्यमी काफी अनुभवी हैं। तीली की मैन्यूफैक्चरिंग करने में उनका अनुभव काम आएगा।
एमएसएमई मंत्रालय करेगा मदद
आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत एमएसएमई मंत्रालय इन उद्यमियों की मदद करेगा। शहर में अगरबत्ती बनाने वाली दो सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें अभी तक 80 फीसद तीलियां चीन व वियतनाम से आयात होती थीं। शहर में अगरबत्ती उद्योग इतना व्यापक है कि इकाइयों का सालाना एक हजार करोड़ का टर्न ओवर है। यहां पर बनने वाली अगरबत्ती का बाजार कानपुर के अलावा बांदा, महोबा, औरैया, इटावा, फतेहपुर, फर्रूखाबाद व कन्नौज समेत अन्य जिलों मेें है।
शहर में स्थापित होगी रिसर्च एंड डेवलमेंट यूनिट
सुगंध एवं सुरस उद्यम संस्थान के सहायक निदेशक डाॅ. भक्ति विजय शुक्ला ने बताया कि अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाली 80 फीसद मशीनरी व टेक्नोलाॅजी भी चीन से आती थी, जो अब भारत में बननी शुरू हो गई है। अगरबत्ती का प्रतिवर्ष 60 हजार करोड़ का बिजनेस है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 15 हजार टन अगरबत्ती की जरूरत होती है। इसके लिए खादी ग्रामोद्योग आयोग ने शहर में रिसर्च एंड डेवलमेंट यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे अगरबत्ती उद्योग के लिए तीलियों का निर्माण करने के साथ जरूरतमंदों को रोजगार से भी जोड़ा जा सकेगा।
गुणवत्ता अच्छी होगी तभी उत्पाद की होगी मांग
अगरबत्ती उद्यमी मयंक गहोई ने बताया कि तीली की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए तभी उत्पाद की मांग होगी। चीन व वियतनाम से आने वाली तीलियों की गुणवत्ता अच्छी थी। हमें उसके टक्कर का उत्पाद तैयार करना होगा। शहर में स्थापित विभिन्न उद्योगों में अभी क्षमता से कम उत्पादन होेने के कारण कच्चा माल यानि चारकोल की समस्या भी आ रही है, जिसका निदान भी जरूरी है।
कानपुर के उद्यमियों तक पहुंचेगी असम व त्रिपुरा की तीलियां
अगरबत्ती उद्यमी आलोक अवस्थी ने बताया कि चीन व वियतनाम से आने वाली तीलियों की फिनिशिंग अच्छी होती थी जिससे उनकी यहां खूब मांग थी। लाॅक डाउन के बाद हमने भी ऐसी तीली बना ली है। एमएसएमई मंत्रालय व आॅल इंडिया अगरबत्ती एसोसिएशन की वेबिनार में असम व त्रिपुरा के उद्यमियों ने ऐसी तीली तैयार कर लेने की बात कहते हुए उसे दिखाया भी था। अब कानपुर के उद्यमियों तक यह तीलियां पहुंचेंगी।
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