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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एयरोसोल पर रिसर्च कर रहे डॉ. त्रिपाठी

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Published: Sun, 28 Sep 2014 01:05 AM (IST)

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शरद त्रिपाठी, कानपुर: कौंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के फांउडेशन डे पर शुक्रवार को हुआ समारोह आईआईटी कानपुर के लिए एक बार फिर खास रहा। समारोह में आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. सच्चिदानंद त्रिपाठी को शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार देने की घोषणा की गई। नई दिल्ली में हुए समारोह में शामिल एक वैज्ञानिक ने इसकी सूचना डॉ. त्रिपाठी को फोन पर दी। कुछ देर बाद सीएसआईआर की वेबसाइट पर उनका नाम भी दर्ज हो गया।

मूलरूप से आजमगढ़ के रहने वाले डॉ. सच्चिदानंद त्रिपाठी के पिता डॉ. ओमदत्त त्रिपाठी बनारस में उदय प्रताप इंटर कालेज में शिक्षक रहे। डॉ. सच्चिदानंद की शिक्षा दीक्षा इसी कालेज से हुई। इंटर के बाद आईटी बीएचयू से वर्ष 1992 में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। एमटेक की पढ़ाई के लिए एमएनआईटी इलाहाबाद का रुख किया। वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद पीएचडी करने वह रीडिंग इंस्टीट्यूट इंग्लैंड गए। डा. त्रिपाठी वर्तमान में एयरोसोल पर रिसर्च वर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एयरोसोल कैसे वातावरण की एनर्जी बैलेंस व क्लाउड को बदलकर भारतीय मानसून में बदलाव लाते हैं।

यहां पर कर चुके हैं काम

वर्ष 2000-2001- भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर में काम किया

वर्ष 2001-2002-आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में काम किया।

2003-आईआईटी कानपुर आए

2009-10-नासा में सीनियर फेलोशिप

2012 से आईआईटी में प्रोफेसर सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट।

क्या मिलेगा पुरस्कार में

भारत के प्रधानमंत्री के हाथों शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के साथ एक स्मृति चिह्न, पांच लाख रुपये नकद एवं 15 हजार रुपये प्रतिमाह आजीवन मिलेंगे। इसका आयोजन जल्द ही नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगा।

ये मिले पुरस्कार

2003 : एआईसीटीई द्वारा यंग टीचर एवार्ड

2009 : एनएएसआई-एससीएपीयूएस अर्थसाइंसेज में हाईएस्ट सिटेशन एवार्ड

सिविल इंजीनियरिंग में पहली बार

आईआईटी को पहले भी शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कारों का तोहफा मिल चुका है, लेकिन अब तक आईआईटी कानपुर में सिविल इंजीनियरिंग में यह पुरस्कार किसी को नहीं मिला। सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. सच्चिदानंद त्रिपाठी को यह पुरस्कार मिलने से विभाग का खाता खुल गया है।

अब तक यह पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक

सीएनआर राव (1968: रसायन विज्ञान), पीटी नरसिम्हन (1970: रसायन विज्ञान), एमवी जार्ज (1973: रसायन विज्ञान), ए. पई (1974: इलेक्ट्रिकल), ओ. चक्रवर्ती (1975), वी. राजारमन (1976: कंप्यूटर साइंस), वी. देव प्रभाकर (1976), एस,. रंगनाथन (1977: रसायन विज्ञान), जी. मेहता (1978: रसायन विज्ञान), जेबी शुक्ला (1982), यूपी तिवारी (1986: गणित), एन सत्यमूर्ति (1990: रसायन विज्ञान), टीके चंद्रशेखर (2001: रसायन विज्ञान), आशुतोष शर्मा (2002: केमिकल इंजीनियरिंग), वी. चंद्र शेखर (2003: रसायन विज्ञान) व मनींद्र अग्रवाल (2003: गणित), वीके सिंह (2004: रसायन विज्ञान), कल्याणमय देव (2005: गणित), संजय मित्तल (2006: एरोस्पेस), अमलेंद्र चंद्रा (2007: रसायन विज्ञान), डॉ. जेएन मूर्ति (2008: रसायन विज्ञान), डॉ. संदीप वर्मा (2010: रसायन विज्ञान) को पुरस्कार मिल चुका है।