जागरण संवाददाता, जौनपुर : पानी की कीमत घर से बाहर जाने के बाद ही पता चलती है। जहां प्यास बुझाने की कीमत अदा करने पर नाप में ही पानी मिलता है। हालांकि भू-जल के अपव्यय को रोकने के लिए सरकार ने गंभीरता दिखाई और योजनाएं भी लागू की, ¨कतु जिम्मेदार इसे लेकर बेपरवाह हो गए। इसके चलते स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है। ऐसी स्थिति में जागरूक लोगों को ध्यान देना होगा अन्यथा भविष्य में कीमत अदा करने पर भी स्वच्छ जल नसीब नहीं होगा।

सरकार ¨सचाई समृद्धि, जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, जल संचयन व जल संवर्धन के बाबत विशेष कार्य कराए जाने का निर्देश देती है। तमाम मंचों से जल संरक्षण की बात कही जाती हैं और संकल्प लिए जाते हैं। बावजूद इसके जल संरक्षण के हालात दयनीय हैं। इसी का परिणाम है कि जिले के 14 ब्लाक भू-जल संकट से ग्रस्त हो गए हैं। नगरीय इलाकों के अधिकांश मोहल्लों में अभी से ही पानी के लिए हो-हल्ला मचना शुरू हो गया है, क्योंकि रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम को लेकर जिले में न तो इस ओर ध्यान दिया जा रहा है और न ही कोई कोशिश की जा रही है। सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम नहीं लगाया गया है। जहां लगे भी हैं वहां वह निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। उदाहरण के तौर पर विकास भवन और जंगीपुर में जल निगम के पानी टंकी के पास रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम को लिया जा सकता है, जो नाममात्र के ही हैं। ऐसी स्थिति में जल संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को संकल्प लेना होगा, क्योंकि तेजी से कट रहे वृक्ष, पट रहे जलाशय, सिकुड़ रहे तालों एवं बढ़ रही आबादी की वजह से प्राकृतिक जल का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। इसके चलते पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव एवं प्रदूषण ने औसत तापमान में वृद्धि कर दिया है। यही नहीं इन कारणों के चलते भू-जल स्तर भी प्रति वर्ष तेजी से नीचे खिसकता जा रहा है। खामियों की भेंट चढ़ी जल संरक्षण योजनाएं

खामियों के चलते बीते साल जल संरक्षण की योजनाओं के क्रियान्वयन में गतिरोध आ गया था। विधानसभा चुनाव और सत्ता परिवर्तन के चलते कई परियोजनाओं को स्वीकृति ही नहीं मिली तो बजट न आने के कारण कई स्वीकृत परियोजनाएं अधर में लटक गईं। अधिकारियों के मुताबिक जिले में दो भूमि संरक्षण इकाइयों द्वारा वाटर शेड के आधार पर परियोजनाओं का चयन पंडित दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत 600 हेक्टेयर चयनित क्षेत्र में सम्मोच्च रेखीय बांध, टर्मिलन, पेरीफेरल बांध, अवरोध बांध एवं समतलीकरण कराया जाना था, लेकिन बजट के अभाव में इन योजनाओं पर ब्रेक लग गया। इसी तरह लघु ¨सचाई विभाग द्वारा 39 चेक डैम बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। बजट आने में विलंब होने और निर्माण सामग्रियों के दामों में बेहताशा वृद्धि के चलते निर्माण नहीं हुआ। वहीं दो चेकडैम का निर्माण टेंडर प्रक्रिया में खामी के कारण नहीं शुरू किया गया। जिले में स्वीकृत कई तालाबों, बंधों, पक्की नाली, कच्चे बंधों का निर्माण अधूरा है। आदेश-निर्देश के बाद भी सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम नहीं लगाया गया। जागरुकता के कमी के चलते स्प्रिंकलर व ड्रिप सिस्टम का उपयोग किसान नहीं कर रहे हैं। जल संचय की प्रमुख योजनाएं

-बड़े नालों व छोटी नदियों में चेकडैम बनाकर बारिश के पानी को रोकना।

-पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत समोच्य रेखीय, मार्जिनल, पेरीफेरल, अवरोध बांध बनाना एवं समतलीकरण करना।

-खेत तालाब योजना के तहत जिले के 11 अति दोहित ब्लाकों के खेत में पानी रोकना।

-स्प्रिंकलर व ड्रिप सिस्टम से फसलों की ¨सचाई करना।

-सरकारी व गैर सरकारी भवनों पर रुफ टाप रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम लगाना। अनमोल जल संपदा के संरक्षण को मिलकर लें संकल्प तो बने बात

-बागवानी की ¨सचाई के लिए ड्रिप विधि तथा फसलों की ¨सचाई के लिए स्प्रिंकलर विधि अपनाएं।

-हैंडपंप, कुओं के पास गड्ढा बनाकर उसे रेत से भर दें, ताकि बेकार पानी गड्ढे में जाकर अवशोषित हो सके।

-हर घर में स्टोरेज टैंक बनाएं।

-उसमें छत से बेकार बह जाने वाले स्वच्छ वर्षा जल को इकट्ठा कर उसका उपयोग दैनिक कार्याें में करें।

-नल की धार हमेशा पतली रखें, टपकते नलों को तुरंत ठीक कराएं।

-मुंह धोने, दांत साफ करने, शेव करने, नहाने, कपड़ा व बर्तन धोने के समय नल को केवल आवश्यकतानुसार ही खोलें।

-घरेलू काम बाल्टी में पानी लेकर ही करें।

-घर के फर्श व वाहनों को धोने की बजाए गीले कपड़ों से पोंछकर साफ करें।

-स्नानगृह एवं किचन से निकलने वाले पानी का उपयोग शौचालय की सफाई फ्ल¨शग व अन्य कार्याें में करें।

-फ्रिज, आरओ प्लांट के निकले पानी का उपयोग घरेलू कार्याें में करें।

-पेड़-पौधों एवं फसलों की ¨सचाई आदि में आवश्यकता से अधिक पानी न दें।

-नहाने के लिए अधिक पानी का उपयोग न करें।

-सार्वजनिक स्थलों में लगे नल व सार्वजनिक शौचालयों में पानी बहता हुआ न छोड़ें।

Posted By: Jagran