कोरोनकाल में परंपरागत खेती छोड़ उगाई केले की फसल, एक साल में हुई दस लाख की आमदनी
प्रकृति की मार व बेसहारा पशुओं से बर्बाद किसानों के लिए केराकत क्षेत्र के शिवरामपुर निवासी शिवशंकर सिंह प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने परंपरागत खेती करने की बजाय व्यावसायिक खेती शुरू की। जिससे सालाना उनको दस लाख की कमाई हो रही है।

संवाद सहयोगी, जौनपुर: प्रकृति की मार व बेसहारा पशुओं से बर्बाद किसानों के लिए केराकत क्षेत्र के शिवरामपुर निवासी शिवशंकर सिंह प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने परंपरागत खेती करने की बजाय व्यावसायिक खेती शुरू की। उन्होंने गतवर्ष पांच एकड़ में चार लाख रुपये की लागत से केले की खेती की। किसान शिवशंकर सिंह ने बताया कि इस वर्ष केले की फसल से उनको दस लाख रुपये की कमाई हुई।
व्यापारी पहुंचने लगे खेत तक
उन्होंने बताया कि केले की फसल बेचने में भी उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है। केले के व्यापारी लोग अब उनके फार्म पर आकर यहीं से माल लेकर जाने लगे हैं। इससे हमें मंडियों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिला है। इसके साथ ही हमारी आय भी दोगुनी हो गई है। किसान इस वर्ष भी छह सौ नए पौधे लगवाए हैं और आगे भी केले की खेती करने का योजना जारी है।
फसल उगाने के लिए विशेषज्ञों की ली सलाह
गांव के 59 वर्षीय शिवशंकर सिंह ने बताया कि कोरोना काल में शिमला मिर्च व टमाटर खेती से हुए भारी नुकसान के बाद विशेषज्ञों से सलाह लेकर केले की खेती के तरफ रुख किया। आगे वो बताते हैं कि केले की खेती उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुई है और प्रति एकड़ दो लाख रुपये तक लाभ मिल रहा है। पांच एकड़ जमीन पर जी नाइन प्लस प्रजाति के केले के पांच हजार पौधे मध्य प्रदेश से मंगवाया था। चार लाख की लागत से उस केले के पौधे से तैयार केले की फसल से दस लाख रुपये की कमाई हुई।
कोरोना काल में आया ये विचार
बताया कि बेटे ने कोरोना काल से पहले पांच एकड़ खेत की बाड़ लगाकर टमाटर व शिमला मिर्च की खेती किया था लेकिन फसल तैयार होते ही कोरोना महामारी आ गई। इससे भारी नुकसान हो गया। फलों की मांग देखकर केले की खेती करने का विचार आया था। आज केले की फसल से लाखों में कमाई हो रही है।
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