26 साल बाद भी तहसील में नहीं बना कोषागार
संवाद सहयोगी माधौगढ़ तहसील का दर्जा मिले धीरे-धीरे करीब 26 साल गुजर गए लेकिन अभी तक यह

संवाद सहयोगी, माधौगढ़ : तहसील का दर्जा मिले धीरे-धीरे करीब 26 साल गुजर गए लेकिन अभी तक यहां कोषागार स्थापित न होने से इलाके के लोगों एवं सरकारी कार्यों में भी दिक्कत महसूस होती है। जबकि वर्ष 1995 से लगातार कोषागार व ट्रेजरी की मांग की जाती रही है।
जनपद में पहले 4 उरई, जालौन, कोंच व कालपी ही तहसीलें थीं। माधौगढ़ क्षेत्रवासियों की मांग के बाद सरकार ने वर्ष 1995 में तहसील का दर्जा जरूर दे दिया था। तब से बराबर दो मांगें क्षेत्रवासियों के माध्यम से की जाती रही हैं। जिसमें ग्राम न्यायालय की स्थापना जरूर कर दी गई मगर वह भी अभी अधूरा ही है। इसके अलावा कोषागार व ट्रेजरी की मांग आज भी अधिवक्तागण एवं आम जनता द्वारा की जा रही है ताकि इस बीहड़ क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। अधिवक्ता महाराज सिंह कुशवाहा, धर्मेंद्र सिंह कहते हैं कि यदि जब तक कोषागार नहीं खुलता है तब तक वैकलिपक व्यवस्था के तौर पर इसका कोड स्टेट बैंक को दे दिया जाए तो सभी लोगों के चालान व रजिस्ट्री दफ्तर की फीस के लिए 25 किमी दूर जालौन या उरई नहीं जाना पड़ेगा।
---------------
कोषागार न होने से होती है परेशानी
वर्ष 1995 में तहसील के दायरे में आए माधौगढ़ को आज भी कोषागार का इंतजार है। इस तहसील क्षेत्र में 256 गांव समाहित हैं।ब्लॉक माधौगढ़, रामपुरा, आंशिक नदीगांव व कुठौंद शामिल हैं। तभी से यहां पर लोगों द्वारा जमीनों, प्लॉटों एवं अन्य की खरीद फरोख्त होती आ रही है। क्षेत्र के समस्त बंदूक लाइसेंस धारकों को रेन्यूवल करवाना पड़ता है जिसके लिए फीस जमा करने जालौन या उरई भागना पड़ता है। भारी भरकम रकम लेकर कोषागार में जमा करने जाना पड़ता है।
----------------
कोषागार व ट्रेजरी तहसील में होनी चाहिए लेकिन ट्रेजरी का काम स्टेट बैंक जालौन में पैसा जमा किया जाता है। अगर माधौगढ़ स्टेट बैंक में ग्रामीणों का काम होने लगे तो लोगों की भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। शासन स्तर तक प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रेमनारायण प्रजापति, तहसीलदार
----------------------
एक नजर में तहसील माधौगढ़ :
तहसील का दर्जा मिला -1995
प्रस्तावित फायर ब्रिगेड -नहीं बना
प्रस्तावित ज्यूडिशियल -नहीं बना
कोषागार भवन - नहीं बना
राजस्व गांव - 256
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।