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Navratri 2026: चूल्हे से सीखा हुनर बना कमाई का जरिया, जालौन की संतोषी ने गांव में खड़ा किया बेकरी का कारोबार

Published: Sat, 10 Oct 2026 11:12 PM (IST)

संतोषी राय ने सात साल पहले पिरौना गांव में 5,000 रुपये से बेकरी का काम शुरू किया, जो अब 50,000 ...और पढ़ें

पिरौना में अपने घर पर पेटीज बनाती संतोषी। जागरण

पिरौना में अपने घर पर पेटीज बनाती संतोषी। जागरण

HighLights

  1. सात साल पहले गांव पिरौना में पांच हजार से प्रारंभ की बेकरी, आज छह लाख का टर्नओवर

  2. अब पति और दोनों बेटे भी दे रहे कारोबार में साथ, गांव की 10 महिलाओं को दिया रोजगार

अजय दीक्षित, उरई। घर की आर्थिक तंगी से चिंतित संतोषी राय ने गृहस्थी के बढ़ते खर्चों में अपने पति का हाथ बंटाने की ठानी, पर क्या करे, कुछ समझ नहीं आ रहा था। रसोई में तरह-तरह के व्यंजन बनाने में निपुण संतोषी को उसकी पड़ोसी रानी ने सुझाव दिया कि क्यों न इन्हीं खाने-पीने की चीजों का व्यवसाय करे।

बस फिर क्या, 2019 में प्रधानमंत्री से मेक इन इंडिया से प्रेरित होकर संतोषी गांव के ही रानी लक्ष्मी प्रेरणा समूह से जुड़ गईं और कोंच तहसील के पिरौना गांव स्थित घर पर पांच हजार रुपए से स्वयं का बेकरी उद्योग प्रारंभ किया। आज वह जिले में पेटीज तैयार करने वालों में पहले स्थान पर हैं।

झांसी, मोठ, पूंछ, हमीरपुर, औरैया आदि शहरों की 150 से अधिक दुकानों पर बिक्री होती है। काम में पति राजकुमार और दोनों बेटे संजय व छोटू भी हाथ बंटा रहे हैं। वह एक उद्यमी बन कर गांव की 10 युवतियों को रोजगार दे रही हैं, जिनकी प्रति माह पांच से सात हजार रुपये कमाई हो जाती है।

38 वर्ष की हो चुकी संतोषी 15 साल पहले समूह से जुड़ीं तो लेकिन कुछ खास नहीं कर सकीं। दोबारा सात साल पहले फिर दूसरे समूह से जुड़ीं और खाद्य प्रसंस्करण के तहत प्रशिक्षण लिया। पांच साल पहले सरकार से लोन लेकर पेटीज तैयार करने की मशीन खरीदी। वर्तमान में कारोबार का करीब छह लाख रुपये टर्नओवर है।

हिम्मत न करती तो चूल्हे तक सीमित रह जाती

संतोषी ने बताया कि हिम्मत न करती तो आज घर के चूल्हे और खेत तक सीमित रहती। वर्तमान में घर पर ही पेटीज आलू पेटीज, पनीर पेटीज और क्रीम रोल बनाए जाते हैं। उसे गत्तों में पैक करके लोडर से आर्डर के अनुसार बाहर भेजा जाता है। थोक एवं फुटकर दोनों स्तरों पर कारोबार होता है।


समूहों से जोड़ कर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। पिरौना की संतोषी राय की ओर से काफी मेहनत की गई। आज उनका व्यवसाय काफी ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है।
-अखिलेश तिवारी, उपायुक्त स्वत: रोजगार

 

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