गाय के गोबर से बने उपलों से जलेगी होलिका
संवाद सूत्र रामपुरा ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत टीहर में कान्हा गोशाला से गायों के गोबर से

संवाद सूत्र, रामपुरा: ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत टीहर में कान्हा गोशाला से गायों के गोबर से बने उपलों से इस बार होलिका जलाई जाएगी। जिससे कि किसी भी तरह का प्रदूषण न फैल सके।
होली पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह होलिका दहन किया जाता है। घरों में तो लोग परंपरा के मुताबिक गोबर से बने कंडे (गुलरियों) से होलिका दहन करते हैं, लेकिन सड़क, गली, चौराहे पर सामूहिक रूप से दहन होने वाली होलिका में बड़ी मात्रा में लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए हरे पेड़ों की बलि दी जाती है। पर्यावरण के लिहाज से ये कतई उचित नहीं है। शस्त्रों के अनुसार होलिका दहन में कंडों का प्रयोग करना चाहिए। यदि कंडे गाय के गोबर से बने हैं तो और भी अच्छा रहेगा। पर्यावरण के शुद्ध रखने के लिए ग्राम प्रधान टीहर प्रदीप गौरव ने इस बार रामपुरा में बनी कान्हा गोशाला से गायों के गोबर से बने उपलों से होलिका जलाने की योजना बनाई है। जिसके लिए करीब दो हजार उपले खरीदे और इसी से होलिका दहन किया जाएगा। चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने कहा कि गोशाला में बंद गोवंश के गोबर से बने उपले बेचने पर जो आय होगी उसे पशुओं के संरक्षण पर खर्च किया जा सकेगा। उन्होंने कान्हा गोशाला में गोबर से कंडे बनवाए हैं, ताकि इनकी बिक्री से अर्जित धन को गो संरक्षण के लिए खर्च किया जा सके।
क्या है धार्मिक मान्यता: ज्योतिषाचार्य मनोज थापक ने बताया कि धार्मिक मान्यता के हिसाब से गाय के उपलों से अगर होलिका दहन किया जाए तो वातावरण में प्रदूषण नहीं फैलता बल्कि वातावरण शुद्ध होता है। इसीलिए हर मंगल कार्य को करने के लिए उपलों को जलाया जाता है। गाय के गोबर से बने उपले जलाने से होलिका का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
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