जागरण संवाददाता, उरई : झांसी-कानपुर रेलखंड पर भुआ से लेकर सरसौखी तक दोहरीकरण के कार्य को लेकर 17 मार्च को मुख्य संरक्षा आयुक्त का दौरा होना है। जिससे पहले रेलवे अधिकारी सभी खामियां दूर कर लेना चाहते हैं। इसी क्रम में गुरुवार को चीफ सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर (सीएसटीइ) नीरज यादव ने कार्य की गुणवत्ता की जांच की। नॉन इंटरलॉकिंग के कार्य में कई तरह की खामियां देख उन्होंने नाराजगी जताते हुए इन्हें दूर करने के निर्देश दिए।

सीएसटीई नीरज यादव ने बताया कि बताया कि 17 को सीआरएस दौरा में तेजी से कार्य किया जा सके इसके लिए दो शिफ्ट से बढ़ाकर तीन शिफ्ट में कार्य शुरू किया जा रहा है। साथ ही बरसात के समय अक्सर सिग्नल फेल होने की संभावना बनी रहती है। उसको लेकर फैलुअर एक्सेल काउंटर अलग से बनाया जा रहा है। जिससे ट्रैक पर पानी भी आ जाएगा तो सिग्नल फेल नहीं हो सकता है। यह बरसात के समय बहुत ज्यादा होता था। लेकिन अब इस समस्या से निजात मिल जाएगा। वहीं स्टेशन अधीक्षक कक्ष में अभी बहुत छोटी-छोटी कमियां है। इसके बाद स्टेशन अधीक्षकों की ट्रेनिग भी होना है। ऐसे में छह दिन सीआरएस का निरीक्षण बचा हुआ है। कार्य कि प्रगति बहुत ही धीमी है।

सीएसई ने कहा कि इआई (इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिग) में लेटेस्ट सिग्नल उरई में स्थापित कराया गया है। जिससे किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होगी। साथ ही उच्च तकनीकी का यह मशीन अन्य स्टेशन से बेहतर स्थापित कराया जा रहा है। इस दौरान सीनियर डीएसटी आशीष कुमार सैनी, आरबीएनएल के जीएम रामेश्वर मीना आदि उपस्थित रहे।

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