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    'अम्मा मेरी आंखों में जब काजल लगाती है'

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 26 Mar 2018 12:50 AM (IST)

    संवाद सूत्र, हाथरस : सिकंदराराऊ तहसील परिसर स्थित बार कक्ष में ¨हदी प्रोत्साहन समिति की काव्य गोष्ठ

    'अम्मा मेरी आंखों में जब काजल लगाती है'

    संवाद सूत्र, हाथरस : सिकंदराराऊ तहसील परिसर स्थित बार कक्ष में ¨हदी प्रोत्साहन समिति की काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि चिड़ावा (राजस्थान) से पधारीं कवयित्री शशी शर्मा और विशिष्ट अतिथि काग्रेस नेता जगतवर्ती पाठक व समाजसेवी हरपाल सिंह यादव को स्मृति चिह्न व बुके भेंट करके सम्मानित किया गया। अध्यक्षता कुंवरपाल शर्मा कुंवर व संचालन हिप्रोस अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित शूल ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि सतेंद्र भारद्वाज की सरस्वती वंदना से हुआ।

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    कुंवरपाल शर्मा कुंवर ने रचना सुनाई, 'पानी है अनमोल ताकूं पायौ तैने बिन मोल, खरचे अतोल कुछ कीमत न जानी है।' युवा कवि अवशेष कुमार विमल ने सुनाया, 'अंधेरे में सितारों सी चमक उठती मेरी आंखें, मेरी अम्मा मेरी आंखों में जब काजल लगाती है।'

    विवेकशील राघव ने सुनाया, संगठन में शक्ति है, बिखराव में संहार है, जागने में जीत है, सोते रहें तो हार है।'

    कवयित्री शशि शर्मा ने सुनाया, 'तुम सोने का हिरन बने फिरते रहना, मैं भी राम नहीं भेजूंगी अब अपने।' इस दौरान प्रेम सिंह यादव, अरविंद शर्मा, बलवीर पौरुष ने भी रचनाएं सुनाईं।