दो बार हाथरस आए राहुल मगर नहीं गए बूलगढ़ी, फिर अचानक क्यों पहुंचे? मृतका के पिता-भाई ने बता दी इनसाइड स्टोरी
चार साल बाद राहुल गांधी अचानक बूलगढ़ी पहुंचे जिससे सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। मृतका के परिवार से मिलकर उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधा और उनके आर्थिक-सामाजिक हालात पर चिंता जताई। मृतका के पिता द्वारा लिखे पत्र का संज्ञान लेते हुए राहुल ने यह दौरा किया। जार्ज सोरोस विवाद से ध्यान भटकाने की चर्चा भी है। 45 मिनट की मुलाकात के बाद राहुल दिल्ली लौट गए।

हिमांशु गुप्ता, हाथरस। चार साल बाद एकाएक हाथरस पहुंचे राहुल गांधी के दौरे के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कोर्ट के फैसले के बाद शांत पड़े बूलगढ़ी मुद्दे को राहुल गांधी ने गुरुवार को फिर से हवा देने की कोशिश की है। मृतका के परिवार के हाल पर उन्होंने जहां योगी सरकार को घेरा है।
वहीं कयास यह भी लगाए जा रहे हैं जार्ज सोरोस के मुद्दे को डायवर्ट करने के लिए कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष ने बूलगढ़ी का रुख किया है। राहुल के दौरे के बाद बूलगढ़ी कांड फिर से चर्चाओं में आ गया है। राहुल गांधी का हाथरस आने का कार्यक्रम अचानक बना है।
बुधवार की रात्रि साढ़े 10 बजे इसकी सूचना हाथरस प्रशासन को दी गई। रातभर अधिकारी इसकी तैयारियों में लगे रहे। डीएम-एसपी ने अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपीं। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की गई।

सुबह-सुबह गांव में बैरीकेडिंग और पुलिस की आवाजाही देख गांव बूलगढ़ी के लोग भी सकते में आ गए। दिन निकलते-निकलते राहुल गांधी के आगमन की जानकारी लोगों तक पहुंची। उनके मन में सवाल उठा कि अब अचानक राहुल गांधी बूलगढ़ी क्यों आ रहे हैं?

पहले तो लगा कि एक दिन पूर्व बुधवार को मृतका के घर की पैमाइश करने पहुंची टीम को स्वजन का विरोध झेलना पड़ा। स्वजन का आरोप था कि सरकार उनका मकान छीनना चाहती है। इसी को लेकर परिवार की राहुल गांधी से बात हुई है और वह बूलगढ़ी आए हैं। लेकिन बाद में परिवार ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी राहुल गांधी से कोई बात नहीं हुई। सुबह जागने पर उनके आने की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों से मिली है।
राहुल गांधी को लिखा था पत्र
मृतका के पिता और भाई ने बताया कि दो जुलाई को उन्होंने राहुल गांधी और अन्य नेताओं को पत्र लिखा था। इसमें परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति, रोजगार, आमदनी की समस्या के बारे में बताया था। सीआरपीएफ की सुरक्षा का घेरा है। हम लोग नौकरी के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं। सरकार ने नौकरी और घर देने का वादा पूरा नहीं किया है।
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सुरक्षा घेर में घुट-घुट कर जीना पड़ रहा है। परिवार में तीन बेटियां हैं जो पढ़ाई-लिखाई के लिए बाहर नहीं जा पा रही हैं। इसी के संज्ञान लेकर वह हाथरस आए हैं। करीब साढ़े पांच महीने बाद राहुल गांधी अचानक हाथरस पहुंचे हैं जबकि शीतकालीन सत्र चल रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष एक दूसरे की जमकर घेराबंदी कर रहे हैं।
इंडिया गठबंधन जहां अडानी के मुद्दे पर सरकार को घर रहा है वहीं भाजपा के कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिका में रह रहे अरबपति जार्ज सोरोस और नेहरू-गांधी परिवार के बीच संबंध बताते हुए कांग्रेस को घेरा है। चर्चा है कि राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को भटकाने के लिए हाथरस का रुख किया है।
दो बार हाथरस आए राहुल, नहीं गए बूलगढ़ी
वर्ष 2020 के बाद राहुल गांधी दो बार हाथरस आ चुके हैं। लोकसभा चुनाव के प्रसार दौरान उन्होंने हाथरस में रोड-शो किया था। बूलगढ़ी के सामने से उनका रोड शो गुजरा था लेकिन वह गांव नहीं गए थे। इसके बाद पांच जुलाई काे वह हाथरस आए थे। हाथरस में सत्संग हादसे के मृतकों के स्वजन से उन्होंने मुलाकात की थी। इससे पहले बूलगढ़ी की मृतका का परिवार राहुल गांधी को पत्र भेज चुका था। तब भी वह बूलगढ़ी नहीं गए थे। अब साढ़े पांच माह बाद उन्होंने हाथरस का रुख किया है।
पहले से बदले नजर आए राहुल के तेवर
चार साल में दूसरी बार बूलगढ़ी पहुंचे राहुल गांधी के तेवर बदले हुए नजर आए। बूलगढ़ी की आबो हवा भी अब अलग थी। चार साल पहले हत्या और दुष्कर्म का शोर था, प्रदर्शन, धक्का-मुक्की, चीत्कार, राजनीति थी, लेकिन गुरुवार को बूलगढ़ी शांति थी। न भीड़ थी न हल्ला। शांति से राहुल गांधी पीड़िति परिवार से मिले और 45 मिनट के बाद वापस लौट गए।
29 सितंबर 2020 को दिल्ली में बूलगढ़ी की युवती की मौत के बाद हाथरस सुर्खियों में आ गया था। रात में जबरन अंतिम संस्कार का मुद्दा गर्माया। 2022 में विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर राजनीति चरम पर थी। देशभर के नेता हाथरस पहुंचे थे। मीडिया का जमावड़ा था। तब राहुल और प्रियंका को एक बार तो एक्सप्रेस वे से वापस लौटना पड़ा था। तीन अक्टूबर 2020 को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा हाथरस आए थे।
50 मिनट तक वह परिवार के बीच रहे। उन्हें 10 लाख रुपये का चेक भी सौंपा था। मीडिया के बीच आकर बिटिया को न्याय की लड़ाई लड़ने की बात कही थी। राहुल के काफिले का संभालने में पुलिस-प्रशासन के पसीने छूट गए थे। गुरुवार को राहुल के दौरे में सबकुछ बदला हुआ था। गांव में लोग खेतीबाड़ी और दैनिक कार्याें में व्यस्त रहे।
ग्रामीणों से ज्यादा मीडिया का जमावड़ा था। राहुल गांधी का काफिला 11:26 बजे मृतका के घर को जाने वाले मुख्य द्वार पर रुका। कार से उतरकर सीधे वह घर में पहुंचे। 45 मिनट तक वार्ता की। इसके बाद वहां से निकलकर सीधे कार में सवार हो गए। मीडिया कर्मियों ने बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने दूरी बना ली। वह कार में सवार होकर सीधे दिल्ली के लिए निकल गए।

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