आकाश राज सिंह, हाथरस : परंपरागत खेती का मिथक टूटने लगा है। हाथरस में भी फूलों की खेती कमाई की सुगंध बिखेरने लगी है। फूलों की खेती से कम लागत में चार गुना तक मुनाफा मिल रहा है। यहां खेतों में उगाए गेंदे के फूल दिल्ली व मथुरा के मंदिरों में महक रहे हैं। यही वजह है किसान आलू व गेहूं की फसलों से हटकर अब फूलों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। एक एकड़ में फूलों की खेती

मुरसान क्षेत्र के गांव सुसावली के किसान उदयवीर सिंह आलू की फसल सबसे अधिक करते थे। उसमें होते आ रहे घाटे ने उन्हें परेशान कर दिया। उन्होंने जिलास्तरीय किसान गोष्ठी में फूलों की खेती के बारे सुना तो उनका झुकाव इस खेती की ओर गया। उन्होंने मेरठ में इसका प्रशिक्षण प्रगतिशील किसान से लेकर इसे एक एकड़ में शुरू कर दिया। 25 दिन में होती नर्सरी तैयार

किसान उदयवीर बताते हैं इसके लिए उत्तम गुणवत्ता वाला गेंदे का बीज 2500 रुपये प्रति किलोग्राम में मेरठ से मंगाया जाता है। एक एकड़ में करीब पांच किलोग्राम बीज लगता है। पहले नर्सरी तैयार की जाती है। नर्सरी में बीज डालने के बाद उसमें हल्ला-हल्का पानी दिया जाता है। इसमें 25 दिन में तैयार ढाई से तीन इंच के पौधों को खेतों में एक फीट की दूरी पर क्यारी बनाकर रोप दिया जाता है। रोगमुक्त होने से बनी

रहती फूलों की चमक

गेंदे की पौध रोपने के दस दिन बाद दवाओं का छिड़काव करते हैं। इससे गिडार व मकरी का खतरा नहीं रहता। इसके लिए फसल की नियमित निगरानी बहुत जरूरी होती है। रोगमुक्त होने से फूल पर चमक भी बनी रहती है। फूल शुरू होने से पहले इसमें छह से सात बार सिचाई करनी पड़ती है। हर सप्ताह होती फूलों की तुड़ाई

पौधे रोपने के 30 दिन बाद फूल शुरू हो जाता है। इसकी तुड़ाई हर सप्ताह होती है। एक बार में दो से तीन क्विटल फूल निकलता है। महीने में कम से कम चार से पांच बार फूल खेत से उठा लिए जाते हैं। दिल्ली व मथुरा के मंदिरों में है हाथरस के फूलों की मांग

उदयवीर बताते हैं कि हाथरस के फूलों की मांग दिल्ली व मथुरा के मंदिरों में अधिक है। इसके अलावा कोलकाता, जयपुर भी गेंदे का फूल ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली व मथुरा के व्यापारियों द्वारा भेजा जाता है। खेतों से फूल दिन ढलने के बाद तोड़ने के बाद शाम को या रात में ही ट्रकों के माध्यम से दिल्ली की मंडी में भेज दिया जाता है। 15 रुपये की लागत पर 30

रुपये में बिकता है फूल

किसान बताते हैं गेंदा के फूल पर प्रति किलोग्राम 10 से 15 रुपये की लागत आती हैं। मंडी में यह फूल 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है। शादी-समारोह होने पर इन फूलों मांग और बढ़ जाती है। गर्मी में यह फूल मांग बढ़ने पर 50 रुपये किलोग्राम तक बिक जाता है। ऐसे में किसानों की बल्ले-बल्ले हो जाती है। कभी-कभी तो गेंदे के फूल को मथुरा व दिल्ली के व्यापारी खेतों से ही खरीदकर ले जाते हैं। 200 हेक्टेयर में हो

रही गेंदे की फसल

किसान उदयवीर बताते हैं एक बार पौधा रोपित करने के बाद यह फसल छह माह तक चलती है। गेंदे के फूल की खेती महामोनी, ककरोली, रतनगढ़ी, कोटा, रंगपुरा के अलावा सासनी व सहपऊ के क्षेत्रों में भी हो रही है। जिले में इस फसल का रकबा करीब दो सौ हेक्टेयर है। गर्मियों में पूसा बसंत व पूसा नारंगी और सर्दियों में पूसा जाफरी की वेरायटी की फसल होती है। वर्जन-

गेंदे के फूलों की खेती पिछले पांच वर्षों से कर रहे हैं। फूलों की तुड़ाई के साथ ही आमदनी शुरू हो जाती है। इसे एक तरह से नकदी फसल भी कहते हैं। 20 हजार रुपये की लागत पर एक लाख तक की आय इस खेती से होती है।

-उदयवीर सिंह, किसान फूलों की खेती करने से किसानों का घर ही नहीं आसपास का वातावरण भी महकता है। इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को कृषि गोष्ठी व अन्य कार्यक्रमों के माध्यमों से प्रेरित भी किया जा रहा है।

-हंसराज सिंह, उपनिदेशक कृषि

Edited By: Jagran