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    CRPF के साए में कैसी होती है जिंदगी? राहुल गांधी के जाने के बाद छलका पीड़ित परिवार का दर्द; कहा- अब तो बस...

    Updated: Thu, 12 Dec 2024 08:51 PM (IST)

    बूलगढ़ी की घटना के चार साल बाद भी पीड़ित परिवार सुरक्षा के साए में कैद जीवन जीने को मजबूर है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीआरपीएफ की सख्त सुरक्षा के बीच न परिवार खेतीबाड़ी कर पा रहा है न ही रोजगार के लिए बाहर जा रहा है। पीड़ित परिवार की बहू ने मीडिया से कहा पूरी जिंदगी सुरक्षा में कैद हो गई है। अब तो आजादी चाहिए।

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    हाथरस के गांव बूलगढ़ी में मृतका के स्वजन से वार्ता कर वापस जाते नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी।जागरण

    जागरण संवाददाता, हाथरस। बूलगढ़ी की पीड़िता के परिवार से मिलकर प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के दिल्ली रवाना होने के बाद मीडिया ने पीड़िता से बातचीत की तो स्वजन का दर्द मीडिया के सामने आ गया। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ तैनात कर दी गई। चार साल बीत गए मगर अब सुरक्षा के साए में जिंदगी कैद हो गई है। परिवार के लाेग न तो खेतीबाड़ी करने जा पा रहे हैं और न ही बेटे रोजगार को बाहर निकल पा रहे हैं। पीड़ित परिवार की बहू ने मीडिया से कहा कि पूरी जिंदगी सुरक्षा में कैद है अब तो आजादी चाहिए।

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    उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा देने वाले हाथरस के बूलगढ़ी गांव में घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीड़ित परिवार की सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई थी। पूरे चार साल बीत गए मगर अभी तक भी सीआरपीएफ का सुरक्षा का डेरा है। सीआरपीएफ जवान पीड़िता घर के अंदर के अलावा छत, गली और आसपास के कड़ी निगहबानी रोजाना करते हैं।

    आने जाने वाले पर पैनी नजर

    आने जाने वाले पर पैनी नजर रखी जा रही है। सीआरपीएफ एंट्री रजिस्टर में नाम-पता लिखने के बाद परिवार से अनुमति मांगने के बाद आगंतुक की मुलाकात कराती है। दरअसल, घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीआरपीएफ ने मृतका के स्वजन की सुरक्षा के कमान अपने हाथों में ले ली थी। तब से आज तक सुरक्षा का घेरा बरकरार है।

    हर शिफ्ट में 25 से 30 जवानों की ड्यूटी 

    एक कंपनी में 134 जवान हैं। हर शिफ्ट में 25 से 30 जवानों की ड्यूटी रहती है। बाकी जवान व्यवस्थाओं में रहते हैं। जैसे भोजन तैयार कराना या वर्दी प्रेस करवाना आदि है। पीड़िता के पिता के का कहना है कि सीआरपीएफ के सुरक्षा में आने जिंदगी कैद हो गई है। न तो कहीं जा पा रहे हैं और न खेतीबाड़ी या नौकरी को जा पा रहे। बच्चों को ट्यूशन के लिए सोचना पड़ता है।

    चंदपा के गांव बूलगढी में पीडित  के स्वजनों से जानकारी करते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी।जागरण

    करणी सेना का राहुल गांधी के आने पर विरोध

    करणी सेना ने हाथरस के गांव बूलगढ़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अचानक से बूलगढ़ी पहुंच कर बहुचर्चित प्रकरण की पीड़िता के परिजन से मुलाकात करने का विरोध किया है। पीड़िता के हत्यारोपियों के समर्थन में आंदोलन करने वाले श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश महासचिव निशांत चौहान ने कहा कि पूरा देश जानता है कि बूलगढ़ी कांड की सच्चाई क्या है।

    सीबीआई भी अपनी जांच पूर्ण कर आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है और न्यायालय ने भी अपना निर्णय देते हुए तीन आरोपियों को बरी भी किया जा चुका है किंतु आज अचानक से कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बूलगढ़ी आना और बंद कमरे मैं काफी देर गुफ्तगू करना दर्शाता है कि राहुल गांधी हाथरस की शांति व्यवस्था को खराब करना चाहते हैं। राहुल गांधी सीबीआई ओर न्यायालय द्वारा निर्णय देने के बाद भी राहुल गांधी पीड़ित परिवार को भड़का कर माहौल खराब करना चाहते हैं किंतु क्षत्रिय समाज ये कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

    श्री चौहान ने कहा कि राहुल गांधी दलित के नाम की राजनीति रोटी सेकना बंद करें। बूलगढ़ी प्रकरण को लेकर पूर्व में भी क्षत्रिय समाज को राजनीतिक दलों द्वारा कलंकित करने का कार्य किया गया है| राष्ट्रीय पटल पर राहुल गांधी और कांग्रेस सपा, बसपा द्वारा क्षत्रिय समाज को बूलगढ़ी प्रकरण में अपमानित किया गया।