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    मवेशी ट्रेन से कटे तो पशु मालिक ही होंगे जिम्मेदार

    By JagranEdited By:
    Updated: Sat, 13 Feb 2021 03:40 AM (IST)

    पशुओं की टैगिग की गई है रेल अधिनियम में प्रकरण दर्ज होगा रेल अधिनियम के तहत होगी पशु मालिकों के खिलाफ कार्रवाई।

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    मवेशी ट्रेन से कटे तो पशु मालिक ही होंगे जिम्मेदार

    जासं, हाथरस : अब मवेशी ट्रेन से कटे तो इसके लिए पशु मालिक ही जिम्मेदार होंगे। पैसेंजर व ट्रेनों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने पशु मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की है। पशु मालिकों पर रेल अधिनियम में प्रकरण दर्ज होगा।

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    दोनों ट्रैक पर बड़ी समस्या

    हाथरस जनपद से होकर दो डिवीजन के ट्रैक गुजरते हैं। इनमें एक पूर्वाेत्तर मंडल का हाथरस सिटी से होकर गुजरने वाला कासगंज-मथुरा रेल मार्ग है। दूसरी लाइन हाथरस जंक्शन से होकर गुजरने वाली दिल्ली-हावड़ा लाइन है। दोनों लाइनों के दोनों ओर पक्की दीवारें कुछ ही किलोमीटर तक हैं। हाथरस से मुरसान की ओर जाने वाली लाइन पर कई जगह बाउंड्री टूटी है, वहीं से होकर मवेशियों का झुंड प्रवेश कर जाता है।

    मवेशी की मौत, रेलवे को भी नुकसान

    रेलवे लाइन पर घूमते मवेशी ट्रेनों की चपेट में आने से कट जाते हैं। ऐसे में बड़े जानवरों के इंजन के सामने आने से उनकी जान तो जाती ही है, इससे रेल इंजन को भी नुकसान होता है। इंजन में टूट-फूट या नुकसान होने पर ड्राइवर को मजबूरन ट्रेन को रोकना पड़ता है। ऐसे में जब तक मैकेनिकल डिपार्टमेंट की ओर से इंजन की जांच कर फिट नहीं घोषित किया जाता, तब तक ट्रेन खड़ी रहती है या इंजन बदला जाता है। अचानक ब्रेक लगाने से कोच पटरी से उतरने का भी खतरा रहता है। रेलवे ट्रैक पर आए दिन होने वाली इन घटनाओं को लेकर अब रेलवे ने पशु मालिकों पर ही कार्रवाई की तैयारी की है। प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार ने बताया नीलगाय के लाइन पर आने से उसकी पहचान होना मुश्किल है, मगर पशु टैगिग होने से पशु पालकों की पहचान करना आसान हो गया है। अब पशु पालक की जवाबदेही होगी। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। रेलवे की वैन करेगी जागरूक

    जल्द ही पशु पालकों को सचेत करने के लिए लाइन किनारे बसे लोगों को जागरूक करने के लिए वैन को घुमाया जाएगा, जिससे कि लोगों को जानकारी दी जा सके कि अब पशुपालकों को तलाशना आसान हो गया है। इसलिए लाइन पर अपने पशुओं को कतई न लाएं। इससे वह मुश्किल में पड़ सकते हैं।

    ऐसे होती है पशुओं की टैगिग

    पशुपालन विभाग ने जिले में लगभग 5.42 लाख गोवंश की इयर टैगिंग का लक्ष्य रखा था। कोरोना की वजह से टैगिग अभियान टल गया था मगर अब तक तक 2.80 लाख मवेशियों की ईयर टैंगिग हो चुकी है। इसके जरिये प्रदेश सरकार पालतू पशुओं का पूरा रिकार्ड रखेगी। मालिकों को भी अपने पालतू पशुओं की जानकारी दर्ज करानी होगी। पूर्व में भी टैगिग होता था, लेकिन उसमें चिप नहीं होती थी। अब पशु से टैग हटाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान करने की योजना है।

    वर्जन --

    लोगों को जागरूक करने के लिए वैन को घुमाया जाएगा, जिससे कि लोगों को जानकारी दी जा सके कि अब पशुपालकों को तलाशना आसान हो गया है। इसलिए लाइन पर अपने पशुओं को कतई न लाएं। इससे मुश्किल में पड़ सकते हैं।

    -अमित कुमार, पीआरओ प्रयागराज डिवीजन