हरदोई, जागरण संवाददाता। जिस विद्यालय का परिसर कंडों से पथा रहता हो और नामांकन के बावजूद पढ़ने वाले बच्चों की संख्या न के बराबर रहती हो। ऐसा विद्यालय यदि राज्य स्तर पर माडल विद्यालय के रूप में चयनित हो और 80 फीसद से अधिक बच्चे रोजाना स्कूल आते हो, तो जाहिर है कि शिक्षक ने विद्यालय की सूरत व सीरत दोनों बदल दी है। ऐसे ही शिक्षक लाल बहादुर को इस बार राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

शिक्षक लाल बहादुर मूलतः माधौगंज ब्लाक गांव लखाही मजरा सेउड़ही के रहने वाले हैं। इनके पिता स्वर्गीय सुंदर लाल भी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक थे। कैंसर की बीमारी के कारण तीन जुलाई 1993 को मृत्यु हो गई, इसके बाद उनके स्थान पर मृतक आश्रित के रूप में इन्हें नियुक्ति मिली। प्रथम नियुक्ति 14 मई 1998 को सहायक अध्यापक पद पर प्राथमिक विद्यालय ढफरापुर, अहिरोरी में हुई। 26 नवंबर 2009 को पदोन्नति के पश्चात प्राथमिक विद्यालय म्योनी, सुरसा में बतौर प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी मिली।

लाल बहादुर ने बताया कि जिस विद्यालय की जिम्मेदारी मिली वो विद्यालय उस समय बाउंड्रीवाल विहीन एक खंडहर नुमा था। विद्यालय के अंदर से लेकर चारों तरफ गोबर, कंडे औऱ गांव के अराजकतत्वों का कब्ज़ा था। पर उन्होंने हार नहीं मानी, पहले ही दिन ठान लिया, कि इसी विद्यालय को उत्कृष्ट बनाकर दिखाएंगे। उन्होंने गांव के अभिभावकों से मिलकर बच्चों के भविष्य के लिए उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया।

उन्‍होंने बताया क‍ि लगातार इस दिशा में अभियान चलाया घर-घर बच्चों की जानकारी जुटाकर उन्हें स्वयं स्कूल तक लाते थे। धीरे-धीरे नामांकन बढ़ता गया। शैक्षणिक स्तर भी सुधरने लगा। विद्यालय का भौतिक एवं शैक्षणिक वातावरण लगातार बेहतर करते चले गए। अधिकारियों को निरीक्षण में स्कूल का शैक्षणिक स्तर व भौतिक परिवेश उच्च स्तर का पाया गया।

उन्होंने बताया कि बच्चों ने खेल कूद व अन्य प्रतियोगिता में विद्यालय का नाम जनपद से लेकर मंडल स्तर पर रोशन किया। 20 जून 2019 को जनपद से राज्यस्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय में विद्यालय चयनित हुआ। एक फरवरी 2020 को बेसिक शिक्षा निदेशक द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। बच्चों व समाज के हित में इन्होंने निरंतर प्रयास जारी रखा वर्तमान समय में विद्यालय में बच्चों के शैक्षणिक संस्थानों में सभी चीजें उपलब्ध हैं।

सभी कक्षा कक्ष में स्मार्ट टेलीविजन, प्रोजेक्टर, फर्नीचर, इंवर्टर, पंखे, स्वच्छ पेयजल व स्वच्छ शौचालय सभी सुविधाओं से परिपूर्ण है। बच्चों की मेहनत व ग्रामीणों के सहयोग का नतीजा है कि वह इस बार राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किए गए। बीएसए वीपी सिंह सहित समस्त अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है।

Edited By: Anurag Gupta

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