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संडीला की सदियों पुरानी रामलीला: मुगलकाल से चली आ रही परंपरा, 11 अक्टूबर से सजेगा मंच

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:38 PM (IST)

संडीला की ऐतिहासिक रामलीला, जो मुगलकाल से चली आ रही है, आज भी आस्था और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल ...और पढ़ें

संडीला में श्रीरामलीला का मंचन करते कलाकार। प्रतीकात्मक फोटो

संडीला में श्रीरामलीला का मंचन करते कलाकार। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. मुगलकाल से शुरू हुई संडीला की ऐतिहासिक रामलीला।

  2. 11 अक्टूबर से गणेश पूजन के साथ मंचन होगा शुरू।

  3. राजा दुर्गा प्रसाद ने रियासत काल में दिया था संरक्षण।

लालचंद्र चौरसिया, हरदोई। आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल संडीला की ऐतिहासिक श्री रामलीला सदियों का सफर तय कर आज भी पूरी जीवंतता के साथ जारी है। मुगलकाल से शुरू हुई यह परंपरा ब्रिटिश हुकूमत के दौर से गुजरते हुए आधुनिक युग में भी नगर की विशिष्ट पहचान बनी हुई है।

बदलते वक्त के साथ इसके मंचन के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आए, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्रति नगरवासियों की श्रद्धा और उत्साह आज भी अटूट है। आगामी 11 अक्टूबर से एक बार फिर गणेश पूजन के साथ रामलीला का मंचन शुरू होने जा रहा है।

राजा दुर्गा प्रसाद के समकालीन रहे मौलवी मजहर अली की ऐतिहासिक डायरी के अनुसार, वर्ष 1899 में नगर में शिव मंदिर (रानी शिवाला) के निर्माण के बाद रामलीला को राजा दुर्गा प्रसाद का विशेष संरक्षण प्राप्त हुआ। उस दौर में लीला मंचन के लिए मथुरा और वृंदावन से ब्राह्मण बालकों की विशेष मंडली बुलाई जाती थी। यह मंडली करीब एक माह तक नगर में प्रवास कर रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन करती थी।

शाही ठाट-बाट के साथ निकलता था जुलूस

रामलीला कमेटी के प्रबंधक प्रेम बाबा ने बताया कि रियासत काल में श्रीराम बरात की शोभायात्रा बेहद भव्य और दर्शनीय होती थी। हाथी, घोड़ों और शाही ठाट-बाट के साथ निकलने वाले इस जुलूस को देखने दूर-दराज से लोग पहुंचते थे। लीला समापन पर राजा दुर्गा प्रसाद कलाकारों को वस्त्र, स्वर्ण मुद्राएं और अन्य कीमती वस्तुएं भेंट कर सम्मानित करते थे।

वर्ष 1920 में राजा दुर्गा प्रसाद के निधन के बाद कुछ समय के लिए आयोजन सीमित जरूर हुआ, लेकिन मंचन कभी थमा नहीं। इसके बाद वर्ष 1940 में नगर के प्रबुद्ध व्यापारियों ने एकजुट होकर श्री रामलीला कमेटी का गठन किया।

आज तक बिना रुके जारी मंचन

वर्ष 1945 से रामलीला मैदान में विधिवत मंचन शुरू हुआ, जो आज तक बिना रुके जारी है। यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल नगर की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि आपसी सौहार्द और एकता का सशक्त संदेश भी दे रहा है। नगर में एक बार फिर भगवान श्रीराम की लीलाओं का भव्य मंचन श्रद्धा और उल्लास के साथ श्रीरामलीला मैदान में किया जाएगा।

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