अलीगढ़ में 100 साल पुरानी रामलीला की धूम: अक्टूबर से सजेगा आस्था का मंच, गूंजेगा जय श्रीराम का जयघोष
Ramleela Mahotsav 2026: अलीगढ़ में अक्टूबर के पहले सप्ताह से करीब दो दर्जन स्थानों पर रामलीला महोत्सव शुरू होंगे, जिसमें ...और पढ़ें

तस्वीर AI द्वारा जेनरेट है।
HighLights
अक्टूबर के पहले सप्ताह से जिलेभर में रामलीला महोत्सव शुरू
अचल ताल पर 100 साल पुरानी रामलीला 3 अक्टूबर से
नुमाइश मैदान में 75 फीट ऊंचा रावण का पुतला
केसी दरगड़, अलीगढ़। Ramleela Mahotsav 2026: अब रामलीला मैदान सजेंगे। राम आएंगे। मंच पर अयोध्या उतरेगी और शहर की गलियों से लेकर गांवों तक भक्ति का रंग घुलेगा। जिलेभर में करीब दो दर्जन स्थानों पर रामलीला महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अक्टूबर में पहले सप्ताह से आयोजन शुरू हो जाएंगे। श्रीरामजी की बरात निकलेगी। झाकियां सजेंगी। मां काली दर्शन देंगी। रावण के पुतले
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जलेंगे। कहीं मेला जैसा माहौल होगा तो कहीं राम-रावण युद्ध के साथ जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण गूंज उठेगा।
शहर में चार स्थानों पर रामलीला मंचन होगा। अचल ताल स्थित रामलीला मैदान पर तीन अक्टूबर से शुरूआत होगी। यहां 22 अक्टूबर तक चलने वाले महोत्सव में श्रीराम जन्म से लेकर सरयू पार लीला, श्री हनुमान जी की सवारी, श्रीराम-रावण युद्ध और श्रीराम-भरत मिलाप तक के प्रसंग मंच पर जीवंत होंगे।
रामलीला के रंग में रंगेगा शहर, सजेगा आस्था का मंच
इसके लिए रामलीला मैदान में मंच सजाया जा रहा है। यहां की रामलीला की अपनी ही आभा है। इस बार मंच लोहे के एंगल पर पांडाल तैयार किया जा रहा है। मंचन के दौरान करीब पांच सौ फीट की एलईडी लाइटिंग होगी। लीला के प्रसंग बदलेंगे तो पृष्ठभूमि भी बदलती जाएगी। नया टिन शेड बन रहा है। रोशनी की सजावट भी खास होगी। अशोक वाटिका और रावण की लंका को भी आकर्षक रूप दिया जा रहा है। इस बार मंचन के लिए मंडली भी बदली गई है।

अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होंगे आयोजन
सर्वोदय गणेश रामलीला मंडल, मथुरा के कलाकार लीला का मंचन करेंगे। श्रीराम जन्म की लीला का मंचन पांच अक्टूबर को होगा। श्रीराम बरात आठ अक्टूबर को शहर में निकाली जाएगी। नौ अक्टूबर को श्रीराम सीता विवाह लीला का मंचन होगा। सबसे अधिक खास सरयूपार लीला होती है। इसका मंचन 10 अक्टूबर को अचल सरोवर में होगा। इसके चलते सरोवर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाएगा। जल की लहरों के बीच प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण नाव पर सवार होंगे। प्रतीकात्मक रूप से सरयू पार करेंगे।
शहर में यहां भी होगा मंचन
शहर के चारों कोनों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है। इसमें नगला तिकोना, बरौला, भमौला में भी रामलीला होती है। भमौला की रामलीला सात अक्टूबर से शुरू हो रही है। बरौला की रामलीला की खास बात यह है कि यहां पर बाहर की मंडली नहीं बुलाई जाती है। स्थानीय लोग ही पात्र बनकर रामलीला का प्रभावी मंचन करते हैं। आयोजन की तारीख जल्द तय हो जाएगी।
रामलीला मैदान पर कब कौन सी प्रमुख लीला का मंचन
- 03 अक्टूबर को रामलीला मंचन की शुरूआत होगी
- 05 अक्टूबर को श्रीराम जन्म की लीला का मंचन
- 08 अक्टूबर को श्रीरामजी की बरात निकाली जाएगी
- 09 अक्टूबर को श्रीराम व सीताजी का विवाह
- 10 सरयूपार लीला का मंचन
- 15अक्टूबर को हनुमान जी की सवारी
- 20 अक्टूबर को श्रीराम जी व रावण का युद्ध
- 21 अक्टूबर को श्रीराम -भरत मिलाप लीला का मंचन
100 वर्ष पुरानी परंपरा
अचल ताल की रामलीला केवल एक आयोजन नहीं है। यह सौ वर्ष पुरानी परंपरा है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में शुरू हुई यह रामलीला आज अलीगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। शुरुआती दौर अलग था। न लाउडस्पीकर थे, न आधुनिक संवाद। स्थानीय कलाकार मौन अभिनय से रामकथा कहते थे। चेहरे के भाव बोलते थे। आंखें संवाद करती थीं। हाथों के इशारे कथा आगे बढ़ाते थे। अचल ताल के मैदान में बैठे दर्शक इन हाव-भाव से ही पूरी लीला समझ लेते थे।
समय के बदला अभिनय
समय बदला। मूक अभिनय ने 'राम नाटक' का रूप लिया। फिर संवाद आए। संगीत आया। मंच सजा। रोशनी बढ़ी। रामलीला भव्य होती गई। लेकिन आस्था वही रही। अचल ताल का अपना पौराणिक महत्व भी माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव पुत्र नकुल और सहदेव ने यहां विश्राम किया था। इसी पवित्र सरोवर के तट पर होने वाली रामलीला में जब सरयू पार लीला होती है तो इतिहास, परंपरा और आस्था जैसे एक ही दृश्य में समा जाते हैं।
कस्बों और गांवों में भी आयोजन
खैर में रामलीला तीन से 23 अक्टूबर तक चलेगी। जट्टारी में तीन अक्टूबर से होगी। 19 अक्टूबर को कुश्ती दंगल होगा। टप्पल में छह अक्टूबर से रामलीला होगी। 22 अक्टूबर को कुश्ती दंगल होगा। इगलास में छह से 21 अक्टूबर तक चलेगी। पहले से दिन भगवान शिव की सवारी झांकियों के साथ निकलेगी और 10 अक्टूबर को राम बरात निकलेगी। गौंडा में छह अक्टूबर से रामलीला शुरू होगी। 22 अक्टूबर को कबड्डी टूर्नामेंट और रसिया दंगल के साथ समापन होगा।
गोरई में रामलीला दीपावली के बाद होती है। अतरौली में छह से 21 अक्टूबर तक रामलीला होगी। कस्बा छर्रा में छह अक्टूबर से होगी। दादों में रामलीला महोत्सव का शुभारंभ 9 अक्टूबर से होगा। रामलीला विजयगढ़ में सात से 21 अक्टूबर तक रामलीला होगी। मडराक में रामलीला नवरात्र के पहले दिन से शुरू होती है।
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गभाना में दीपावली से पहले, गोरई में दीपावली के बाद आयोजन
गभाना और आसपास के क्षेत्र में रामलीला का आयोजन नवरात्र के दौरान नहीं होता। यहां दीपावली से करीब 12 दिन पहले रामलीला शुरू होती है और धनतेरस के दिन रावण दहन किया जाता है। आयोजकों के अनुसार, इस समय कलाकार अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध हो जाते हैं। साथ ही धान की खेती समेत कृषि कार्यों से किसान भी काफी हद तक निवृत्त हो जाते हैं, जिससे आयोजन में उनकी भागीदारी बढ़ जाती है। गोरई में भी दीपावली के बाद रामलीला आयोजित करने की परंपरा है।
75 फीट का होगा रावण, गर्दन घुमाकर करेगा अट्टाहस
नुमाइश मैदान में इस बार 75 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है। मेघनाद और कुंभकरण के पुतले 70-70 फीट के होंगे। रावण के सिर पर चरखीनुमा छतरी होगी। उसकी गर्दन के साथ हाथ में ढाल भी घूमेगी और अट्टाहस के साथ आतिशबाजी होगी। पुतले तैयार कर रहे जाहिद के अनुसार, महंगाई से लागत काफी बढ़ गई है। बांस 800-900 रुपये प्रति कोरी से बढ़कर 1200-1300 रुपये हो गया है। सुतली के दाम 110 से बढ़कर 240 रुपये किलो और रंगीन कागज का बंडल 50 से 110 रुपये हो गया है।
एक महीने में पुतले होंगे तैयार
करीब एक माह में पुतले तैयार हो जाएंगे। रामलीला के पुतले तैयार करने की जिम्मेदारी हर साल मुस्लिम कारीगरों के परिवार संभालते हैं। पहले बुलंदशहर के कारीगर आते थे, इस बार जवां के बरौली के कारीगर पुतले बना रहे हैं। परिवार के सदस्य और बच्चे भी काम में हाथ बंटा रहे हैं। अलीगढ़ के साथ गाजियाबाद, दिल्ली समेत कई शहरों में इनके बनाए पुतलों की मांग रहती है।
