हरदोई, जागरण संवाददाता : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी क्रांतिकारी शिव वर्मा किशोरावस्था में ही देश प्रेम में ओतप्रोत होकर असहयोग आंदोलन में कूद पड़े और अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। यह उद्गार अखिल विश्व शांति समिति के संस्थाध्यक्ष आचार्य सत्यवीर प्रकाश आर्य ने क्रांतिकारी शिव वर्मा की 110वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्री वर्मा का जन्म नौ फरवरी 1904 में हरदोई जनपद के ग्राम खटेली में हुआ था। कानपुर डीएवी कालेज में गणेश शंकर विद्यार्थी, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के संपर्क में आकर असहयोग आंदोलन में कूद पड़े थे। 1922-23 में किसानों के एका आंदोलन जिसका नेतृत्व हरदोई के मदारी पासी ने किया था, में भी उन्होंने सक्रिय योगदान किया। 13 मई 1929 में सहारनपुर बम फैक्ट्री में जयदेव कपूर और डा. गया प्रसाद के साथ गिरफ्तार हुए। 1930 में लाहौर षड़यंत्र केस में श्री वर्मा को आजीवन कारावास हुआ। जेल में रह कर भूख हड़ताल करने पर 1933 में उन्हें काला पानी की सजा सुनाई। 21 फरवरी 1946 को वह जेल से रिहा हुए। वह एक महान लेखक भी थे। 10 जनवरी 1997 में उनका निधन हो गया। इसके पूर्व श्री वर्मा के पौत्र धर्मेद्र अस्थाना अध्यक्ष राष्ट्रीय चेतना मंच ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके अलावा इंद्रेश्वर नाथ गुप्ता एडवोकेट, जयदेवी गुप्ता, प्रमोद सिंह, अनिल कुमार और चंद्रमोहन श्रीवास्तव आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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