र और ल के फेर में फंसा कोरी समाज: एक देश, राज्य व जिला भी एक; पर नियम कायदे अलग-अलग
23 प्रमाण पत्रों के निरस्त होने से सवाल यह खड़ा होता है कि क्या केवल इतने ही प्रमाण पत्र वर्ष 2012 से अब तक बने थे। या फिर दबाव में आकर यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई। यहीं नहीं निरस्तीकरण के मामले में पावर का खेल भी देखने को मिला।

पिलखुवा, संवाद सहयोगी, पिलखुवा। 'र' और 'ल' के फेर में फंस चुके कोरी समाज के लोग अब प्रशासनिक कार्रवाई से विचलित दिखाई पड़ रहे हैं। हाल ही में शिकायत के बाद हापुड़ सदर एसडीएम द्वारा कोरी समाज के वर्ष 2012 के बाद के जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की बात कही गई थी। जिसके बाद कोरी समाज के केवल 23 प्रमाण पत्रों को निरस्त किया गया।
23 प्रमाण पत्रों के निरस्त होने से सवाल यह खड़ा होता है कि क्या केवल इतने ही प्रमाण पत्र वर्ष 2012 से अब तक बने थे। या फिर दबाव में आकर यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई। यहीं नहीं निरस्तीकरण के मामले में पावर का खेल भी देखने को मिला।
नहीं की गई सभासद बनने वालों पर कार्रवाई
इस कार्रवाई में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में जीतकर सभासद बनने वालों के प्रमाण पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिस शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद यह मामला तूल पकड़ा और प्रशासन को चाहे दिखावे के तौर पर ही सही प्रमाण पत्र निरस्त किए गए, अब उसी शिकायतकर्ताओं ने इस कार्रवाई के खिलाफ न्यायालय जाने का मन बनाया है।
फर्जी प्रमाण पत्र चुनाव में दाखिल करने का लगा आरोप
शिकायतकर्ता मोहल्ला न्यू आर्यनगर की राखी व मोहल्लापुरा के अनिल ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि वार्ड नंबर पांच से चुनाव जीते वार्ड सभासद निर्मल व वार्ड नंबर आठ से सभासद रामश्री पर फर्जी जाति का प्रमाण पत्र दाखिल कर चुनाव लड़ा था। जिसके बाद डीएम ने जांच के आदेश दिए।
इसी के बाद एसडीएम सुनीता सिंह ने कार्रवाई करते हुए 23 प्रमाण पत्र निरस्त किए। दोनों शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन की इस कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हैं।
आरोपितों की साख के हिसाब से बन रहे नियम
एक ही देश , एक ही राज्य और एक ही जिला पर सारे नियम आरोपितों की साख के हिसाब से बना रहे हैं। उनके द्वारा शिकायत सभासदों की की गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर और लोगों के प्रमाण पत्र निरस्त किए गए। प्रशासन की यह कार्रवाई केवल दिखावा हैं।
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