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    14 साल से मनमानी करती रही मोनाड यूनिवर्सिटी, UGC की ओर से नहीं की गई निगरानी; संकट में छात्रों का भविष्य

    Updated: Thu, 05 Jun 2025 02:45 PM (IST)

    मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने का मामला सामने आया है। UGC की ओर से यूनिवर्सिटी की निगरानी नहीं की गई जिससे हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में है। UGC और यूनिवर्सिटी के बीच 10 साल से पत्राचार चल रहा है। STF ने UGC और यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगी है। छात्रों में डिग्री की वैधता को लेकर असमंजस है।

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    डॉ. एम. जावेद, कुलपति- मोनाड यूनिवर्सिटी। फोटो सौजन्य- जागरण

    ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। मोनाड यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री-मार्कशीट की बिक्री करने के मामले में अब लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने 2011 में अपनी स्थापना के बाद से यूजीसी से सत्यापन ही नहीं कराया। दरअसल फर्जीवाड़े का यह खेल यूजीसी और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की नूरा-कुश्ती के रूप में चलता रहा।

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    यूजीसी पर होती है यूनिवर्सिटी में मानक का पालन कराने की जिम्मेदारी?

    इस मामले में दोनों संस्थाओं की ओर से 10 साल से पत्राचार ही चल रहा है। ऐसे में मानकों का पालन किए बिना यूनिवर्सिटी का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसका खामियाजा हजारों ऐसे छात्रों को भुगतना पड़ सकता है, जिन्होंने गाढ़ी कमाई को खर्च करके विधिवत शिक्षा ग्रहण की है।

    एक्सपर्ट का मानना है कि इस मामले में यूनिवर्सिटी की साजिश और यूजीसी की मिलीभगत सामने आ रही है। इस मामले में एसटीएफ की ओर से यूजीसी और यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है।

    2011 में बनी यूनिवर्सिटी 

    मोनाड यूनिवर्सिटी का फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार निजी यूनिवर्सिटी का संचालन करने के लिए दो स्थानों से मान्यता लेनी होती है। प्रदेश में 60 एकड़ जमीन व अन्य औपचारिकता पूरी करने के बाद मान्यता के लिए आवेदन किया जाता है।

    विधानसभा में स्वीकृति के बाद राज्यपाल की ओर से संबंधित एजेंसी-व्यक्ति को यूनिवर्सिटी खोलने की अनुमति दे दी जाती है। यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए सरकार की ओर से पांच साल का समय दिया जाता है। पांच साल बाद इसका संचालन तकनीकि आधार पर दो पहलुओं में किया जाता है।

    मात्र कक्षा 10 पास था मोनाड का मालिक

    यह जरूरी नहीं है कि यूनिवर्सिटी की मान्यता लेने वाला या उसका मालिक शैक्षिक दृष्टि से योग्य ही हो। जैसे मोनाड का मालिक विजेंद्र हुड्डा ही मात्र कक्षा 10 पास था। ऐसे में शिक्षण व डिग्री-मार्कशीट की निगरानी के लिए दो स्तर पर निगरानी की जाती है।

    यूनिवर्सिटी संचालक को एक हाईपावर कमेटी गठित करनी होती है। इसमें एक वर्तमान व एक पूर्व वीसी स्तर के अधिकारी और डीएम सहित शिक्षा के क्षेड से जुडे पांच व्यक्तियों के नाम होते हैं। उनको समय-समय पर यूनिवर्सिटी की निगरानी करनी होती है, जिससे कार्य मानकों के अनुसार होता रहे।

    क्यों अधर में लटका रहा मान्यता देने का काम?

    वहीं शासन की ओर से यूनिवर्सिटी में मानकों का पालन कराने का जिम्मा यूजीसी का होता है। इसके लिए यूनिवर्सिटी बनने के पांच साल के अंदर यूजीसी से मान्यता लेनी होती है। इससे पहले यूजीसी की टीम संबंधित यूनिवर्सिटी का दौरान करती है। इस टीम मेंं दो प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उन विषयों के एक्सपर्ट भी शामिल होते हैं, जिनको यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाता है। इसके लिए मोनाड ने 2015 में आवेदन किया था।

    आवेदन के बाद यूनिवर्सिटी में एक्सपर्ट की टीम भेजी जानी थी। इसके लिए यूजीसी की ओर से कुछ कागजात और उपलब्ध कराने को कहा गया। तब से न तो यूनिवर्सिटी की ओर से कागजात उपलब्ध कराए गए और न ही यूजीसी की ओर से कोई आपत्ति दर्ज कराई गई। ऐसे में यूनिवर्सिटी को यूजीसी की ओर से मान्यता देने का कार्य अधर में लटका रहा। ऐसे में यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वालों में भी असमंजस बना हुआ है। उनकी डिग्री अवैध ठहराई जा सकती हैं।

    हम किसी भी जांच के लिए तैयार है। हमारे पास पूरा रिकार्ड है। यूनिवर्सिटी सही तरीके से चल रही है। हमने यूजीसी को टीम भेजने के लिए सूचना दे दी। उनकी टीम नहीं आए तो हम क्या कर सकते हैं। 2016 के बाद से यूजीसी की ओर से हर साल कुछ जानकारी मांगी जाती हैं। हम उनको भेज देते हें। यूजीसी का कार्य यूनिवर्सिटी संचालित कराना नहीं है। हम सरकार से कोई रुपया नहीं ले रहे, तो हम पर यूजीसी की शर्त कैसे लागू होंगी? हमारे द्वारा प्रदान की जा रही सभी डिग्री वैध हैं।

    - डॉ. एम. जावेद, कुलपति- मोनाड यूनिवर्सिटी

    यूनिवर्सिटी को यूजीसी की मान्यता के बिना संचालित नहीं किया जा सकता है। किस आधार पर आज तक मोनाड का निरीक्षण नहीं किया गया, समझ में नहीं आ रहा है। शासन से अगले सप्ताह टीम आएगी। वह इन सभी पहलुओं को गहनता से देखेगी।

    - मोनिका सिंह, मंडलीय प्रभारी - उच्च शिक्षा विभाग

    13 जून को ऑनलाइन होगी सुनवाई

    मोनाड विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री मामले में जेल में बंद सभी 11 आरोपितों की पेशी 13 जून को होगी। हालांकि मामला हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में आशंका है कि छात्र कचहरी पर एकत्रित हो सकते हैं।

    उनके किसी प्रकार के हंगामे को देखते हुए यह पेशी ऑनलाइन कराने की तैयारी है। इसके साथ ही एसटीएफ ने चार्जशीट दाखिल करने के लिए अपनी जांच तेज कर दी है। एसटीएफ ने इसके लिए असलम खान को अधिवक्ता नियुक्त किया है।