हापुड़: गंगा किनारे अधूरा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, कब होगा समाधान?
गढ़मुक्तेश्वर में गंगा को स्वच्छ करने के लिए 15 साल पहले शुरू हुआ सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधूरा है। 50 करोड़ की लागत से बने प्लांट निष्क्रिय हैं, जिससे गंदा पानी नालों से गंगा में जा रहा है। खुले मैनहोल दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, और स्थानीय लोग बदबू से परेशान हैं। अधिकारियों को शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

गढ़मुक्तेश्वर में गंगा को स्वच्छ करने के लिए 15 साल पहले शुरू हुआ सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधूरा है। फाइल फोटो
ओम प्रकाश गौतम, गढ़मुक्तेश्वर। पंद्रह साल पहले गंगा को साफ और शुद्ध करने के लिए सीवर लाइन ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम शुरू हुआ था। गढ़ के वार्ड गड़ावली और बृजघाट में ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए थे, लेकिन वे अब काम नहीं कर रहे हैं। शहर की पूरी आबादी में अधूरी सीवर लाइनें और खुले मैनहोल हादसों को न्योता दे रहे हैं। बदबू से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
पांच साल पहले, 2020 में मेरठ डिविजनल कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने डेवलपमेंट रिव्यू मीटिंग में हिस्सा लिया था। नगर पार्षदों ने मिलकर सीवर लाइन का मुद्दा उठाया था, और कमिश्नर ने मौके का मुआयना किया था। जल निगम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने ट्रीटमेंट प्लांट बंद मिलने पर उसकी खराबी मानी थी, जिसके बाद उस समय के आरोपियों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया गया था।
गढ़ बृजघाट में ₹50 करोड़ की लागत से सीवर लाइन ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था। पंद्रह साल से काम रुका हुआ है। ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहा है। सीवर लाइन से गंदा पानी नाले में बहाकर गंगा में जा रहा है। नाले गंगा को गंदा कर रहे हैं। सीवर लाइन का मामला 15 साल में भी हल नहीं हुआ। - मूलचंद सिंघल, प्रेसिडेंट, व्यापार मंडल गढ़
शहर में सीवर लाइन बिछाने का काम अधूरा है। मौजूदा सीवर का गंदा पानी नालों में डाला जा रहा है। नाले गंगा में बहाकर गंगा को गंदा कर रहे हैं। - संदीप त्यागी नीतू
गंगा को साफ करने के लिए सीवर लाइन बनाई गई थी। सीवर लाइन बीच में ही बंद है। सीवर के मेन होल खुले हैं, जिनसे बदबू आ रही है और कई लोग घायल हो चुके हैं। बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्या बनी हुई है। - नीरज राणा
सीवर लाइन के बारे में अक्सर शिकायतें मिल रही हैं। ट्रीटमेंट प्लांट बंद है। बड़े अधिकारियों को लिखकर समस्या को हल करने की कोशिश की गई है। श्रीराम यादव, SDM

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