हापुड़: बकाया नहीं मिलने पर किसानों का कंपनियों के खिलाफ धरना, कलक्ट्रेट में भूख हड़ताल की तैयारी
हापुड़ में किसानों ने फसल का बकाया भुगतान न मिलने पर कंपनियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि कंपनियों पर उनका काफी पैसा बकाया है, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे कलक्ट्रेट में भूख हड़ताल करेंगे।

कलक्ट्रेट में धरना देते हुए किसान। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, हापुड़। कांटेक्ट फार्मिंग के मामले में कंपनियों द्वारा ठगे गए किसान अब आरपार की लड़ाई पर आमादा है। डीएम के हस्तक्षेप के बाद भी कंपनियों ने बकाया का भुगतान नहीं किया है। पिछले दिनों किसानों ने कलक्ट्रेट पर एक सप्ताह तक धरना दिया था। तब डीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में कंपनी के कर्मचारियों ने एक सप्ताह में बकाया चार करोड़ का भुगतान करने का आश्वासन दिया था।
हालांकि जिलाधिकारी ने रोजाना बीस लाख रुपये डालने की बात कही थी। उसके बावजूद 20 दिन में मात्र 20 लाख रुपया डाला गया है। एक सप्ताह से किसानों के खाते में कोई भुगतान नहीं आया है। अब उत्कल के साथ ही सिद्धि विनायक कंपनी के खिलाफ भी बेमियादी धरना व भूख हड़ताल करने का एलान किया गया है।
जिले के आलू किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उत्कल ट्यूबर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने किसानों को आलू का बीज महंगे मूल्य पर उपलब्ध कराया था। उसके बदले में उत्पादन को भी महंगे मूल्य पर खरीदने का भरोसा दिया था। मई 2025 में हुए इस अनुबंध के तहत कंपनी ने हापुड़ के कनिया कल्याणपुर, बाबूगढ़ और आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों तथा मेरठ के किसानों को बीज उपलब्ध कराए।
अधिकारियों के खिलाफ लिखित समझौता
किसानों ने कंपनी के अधिकारियों संजय महंत, परवीर, अमित तोमर और तरूण के साथ लिखित समझौते किए। जून-जुलाई 2025 आलू की उपज कंपनी को सौंप दी गई, लेकिन भुगतान नहीं मिला। औसतन प्रति किसान के 2.5 तीन लाख रुपया बकाया हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डाक्टर हरित कुमार के अनुसार किसानों ने बीज के बदले फसल दी, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया। अब आर्थिक संकट के चलते कई किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। परेशान किसानों को अब कंपनी के प्रतिनिधि धमकी दे रहे हैं। इससे परेशान किसानों ने कलक्ट्रेट परिसर में बेमियादी धरना आरंभ कर दिया था।
डीएम के सामने खत्म किया था धरना
किसान समरपाल सिंह, समीर रहमान, मेघराज, कुलदीप सिंह, मुनेष,संजय, शोकेंद्र व दीपक आदि ने बताया कि डीएम की मौजूदगी में हु़ए समझौते के आधार पर धरना समाप्त कर दिया गया था। अब कंपनी के प्रतिनिधियों ने समझौते की बात भी नहीं रखी है।
यदि सोमवार तक भुगतान नहीं होता है तो मंलगवार से कलक्ट्रेट परिसर में बेमियादी धरना और भूख हड़ताल आरंभ की जाएगी। अब उत्कल के साथ ही सिद्धा विनायक कंपनी की धोखाधड़ी भी सामने आ गई है। किसानाें ने आरपार की लड़ाई की तैयारी कर ली है।
हम किसानों और कंपनी प्रतिनिधियों के बीच कई बार मध्यस्था कर चुके हैं। कंपनी के प्रतिनिधि अपनी ही शर्तों का पालन करने को तैयार नहीं हैं। हम किसानों को समझा रहे हैं। वहीं डीएम की मौजूदगी में एक बारऔर प्रयास किया जाएगा।
डा. हरित कुमार- जिला उद्यान अधिकारी।
डीएम किसानों का बकाया दिलवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन उद्यान अधिकारी की भूमिका संतोषजनक नहीं है। उनकी हमदर्दी कंपनियों के साथ है। जिससे उनको संरक्षण मिल रहा है और भुगतान नहीं कर रहे हैं।
समरपाल सिंह प्रधान- किसान नेता।

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