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    मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी ने बढ़ाई किसानों की ¨चता

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 15 Jun 2017 08:29 PM (IST)

    श्वेतांक त्यागी, हापुड़: कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है।

    मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी ने बढ़ाई किसानों की ¨चता

    श्वेतांक त्यागी, हापुड़:

    कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है। हालांकि कृषि विभाग हर वर्ष पोषक तत्वों की कमी की समस्या के समाधान के लिए लगातार किसानों को खेतों पर खरपतवार नहीं जलाने और रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग के लिए जागरूक कर रहा है। हाल ही में जिले में हुए 15285 मृदा परीक्षण से पता चला है कि खेतों में आवश्यक पोषक तत्व नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा का न्यूनतम स्तर है। मृदा परीक्षण की इस रिपोर्ट ने किसानों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। इसके बाद किसानों को भविष्य की ¨चता सताने लगी है।

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    कृषि विभाग ने मृदा कार्ड बनाने के लिए खेतों की मिट्टी के नमूने लिए थे। मिट्टी परीक्षण के परिणामों से चौंकाने वाली जानकारी मिली है। मिट्टी के इन नमूनों में 80 प्रतिशत से अधिक में नाइट्रोजन की कमी पाई गई है। इन नमूनों में नाइट्रोजन एक प्रतिशत की बजाय 0.2 प्रतिशत मिला है, जो मिट्टी में अति न्यूनतम स्तर है। वहीं अधिकतर नमूनों में फास्फोरस, सल्फर व जैविक कार्बन की कमी पाई गई है।

    किसानों की नासमझी बढ़ा रही आर्थिक बोझ :

    कृषि रक्षा अधिकारी सतीश मलिक बताते है कि किसानों को धान की पराली और खरपतवारों को खेत में जलाने से होने वाली हानि के बारे में जागरूक किया जाता है। इसके बावजूद किसान खेतों में आग लगाकर एक ओर तो वायु प्रदूषण करते हैं, दूसरी ओर अपना नुकसान भी करते हैं। खेत में पराली जलाने से मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व विशेषकर मैगनीज की हर साल ¨चताजनक स्तर तक कमी होती जा रही है। इसके अलावा खेतों में गोबर की खाद अथवा जैविक खाद डालने का भी किसानों में रुझान नहीं हैं। वे अब भी खेतों में रासायनिक खादों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। कई किसान उचित जानकारी के अभाव में रासायनिक खादों का आवश्यकता से ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं। यह प्रयोग भी उनके लिए हानिकारक साबित हो रहा है।

    पोषक तत्वों की कमी से फसलों में नुकसान :

    नाइट्रोजन की कमी होने से पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। लचक कम होने के साथ कड़ी व छोटी हो जाती हैं। इस कारण हल्के से भी तनाव के कारण वह आसानी से टूटकर गिर जाती हैं। वहीं फास्फोरस की कमी से पौधे की पत्ती गहरे हरे रंग की संकरी होने के साथ कड़ी हो जाती है। फसल के सिरे का रंग भी बैंगनी हो जाता है। साथ ही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी पड़ने लगती है और पौधों का विकास रूक जाता है।

    फसलों में उर्वरकों का प्रयोग किए बिना कोई भी फसल पैदा ही नहीं होती है। सब्जियों में भी कीटनाशकों का प्रयोग किए बिना कीटों का प्रकोप हो जाता है। इससे कृषि में लागत अधिक आ रही है। यदि लगातार मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती रही तो उसकी उपजाऊ क्षमता घटने से किसानों को काफी आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। हालांकि अब कृषि विभाग द्वारा मिट्टी की जांच कराई जा रही है। इसके बाद इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकेगी। ---- राधेलाल त्यागी

    यह बात सही हैं कि जिले में रासायनिक खाद के प्रयोग से उर्वरा क्षमता कम हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए। जैविक खाद में 16 तरह के तत्व होते हैं, जो उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हैं और जमीन की भैतिक दशा में भी सुधार करते है।

    - रजित राम, भू सरंक्षण अधिकारी

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    प्रमुख पोषक तत्व की उर्वरता श्रेणियां

    प्रमुख पोषक तत्व सामन्य स्तर जिले में स्थिति

    नाइट्रोजन 1 प्रतिशत 0.2 से - 0.5 प्रतिशत

    फास्फेट 20 से 40 10 से 18

    पोटाश 101 से 250 100 से 250

    ( फास्फेट, पोटाश की मात्रा किग्रा प्रति हैक्टेयर है )