गोरखपुर, जेएनएन। रेलकर्मियों को अब कोरोना और टीकाकरण से संबंधित समस्याओं को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। डब्लूयूएसएस मोबाइल एप पर कोविड-19 संक्रमण, उपचार, बचाव और टीकाकरण जैसी समस्याओं का निदान तो होगा ही, उन्हें संबंधित आवश्यक जानकारियां भी मिलती रहेंगी। रेलकर्मी एप पर अपनी शिकायतें और सुझाव भी साझा कर सकेंगे।

एनएफआइआर का डब्लूयूएसएस एप लांच

नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे मेन (एनएफआइआर) ने इस मोबाइल एप को लांच किया है। भारत सरकार ने भी इस एप को अपनी मंजूरी दे दी है। पूर्वोत्तर रेलवे में पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) ने प्रत्येक रेलवे कर्मचारियों तक इस एप को पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है। संघ ने कोषाध्यक्ष मनोज द्विवेदी के नेतृत्व में एक टीम भी गठित कर दी है। जो रेलकर्मियों को इस एप के उपयोग और लाभ के बारे में बताएगी। महामंत्री विनोद कुमार राय ने बताया कि ऐप को जारी करने का उद्देश्य अधिक से अधिक रेलवे कर्मचारियों को टीकाकरण के प्रति जागरूक करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।

कोरोना से संबंधित समस्याओं का होगा निदान

एप  में पूर्वोत्तर रेलवे सहित भारतीय रेलवे के सभी केंद्रीय और मंडलीय अस्पतालों की कोरोना और टीकाकरण से संबंधित जानकारी मिलती रहेगी। कर्मचारियों की तरफ से जो भी समस्याएं आएंगी उसे सीधे बोर्ड या चिकित्सा विभाग तक पहुंचाया जाएगा। तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित होगी। कर्मचारियों से फीडबैक भी मांगे जाएंगे। संघ के प्रवक्ता  एके ङ्क्षसह के अनुसार एनएफआइआर के महामंत्री डा. एम राघवैया की यह अनूठी पहल है। कोई भी रेलकर्मी अपने मोबाइल पर इस एप को डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकता है।

कर्मचारी संगठनों ने की स्पेशल सीएल की मांग

पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ, पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ, आल इंडिया एससीएसटी इंपलाइज एसोसिएशन और एनई रेलवे मजदूर यूनियन ने रेलवे प्रशासन से कर्मचारियों को स्पेशल सीएल (विशेष आकस्मिक अवकाश) देने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर अन्य जोन के कर्मचारियों को स्पेशल सीएल मिल रहा है। लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन उदासीन बना हुआ है। जबकि, कोरोना संक्रमित और होम क्वारंटाइन कर्मचारी स्पेशल सीएल के लिए विभाग से लगातार आग्रह कर रहे हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। रेलवे बोर्ड ने कोरोना काल में कर्मचारियों के लिए 30 दिन के आकस्मिक अवकाश का प्रावधान किया है। संगठनों ने रेलवे प्रशासन से गर्भवती महिला और दिव्यांग रेलकर्मियों से वर्क फ्राम होम कराने की भी मांग की है।

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