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    विश्व का पहला जटायु संरक्षण केंद्र तैयार, जुलाई में सीएम योगी कर सकते हैं लोकार्पण

    Updated: Fri, 21 Jun 2024 03:06 PM (IST)

    world first Jatayu Conservation Center उत्‍तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सीएम योगी को मुख्‍यमंत्री बनाया गया। इसके बाद यहां विकास की लहर चल पड़ी। गोरखपुर चिड़‍ियाघर खुल गया है। इसी बीच यहां कैम्‍पियरगंज में विश्‍व का पहला जटायु प्रजनन केंद्र बनाया गया है। इसका काम लगभग पूरा हो गया है। जुलाई तक सीएम योगी इसका लोकापर्ण कर सकते हैं।

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    जटायु प्रजनन व संरक्षण केंद्र में गिद्ध। जागरण

     जितेन्द्र पाण्डेय, जागरण गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के कैंपियरगंज भारी वैसी में दुनिया का पहला राज गिद्ध प्रजनन व संरक्षण केंद्र बनकर तैयार है। यहां बने बाड़ों में लाल गर्दन वाले गिद्ध को संरक्षित करते हुए उनका प्रजनन कराया जाएगा। लक्ष्य के अनुसार अगले 15 वर्ष में गिद्धों का 40 जोड़ा तैयार कर उन्हें छोड़ने की तैयारी है।

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    इस समय केंद्र के चार बाड़े में चार मादा व एक में नर व मादा गिद्ध का जोड़ा संरक्षित किया जा रहा है। इसमें जोड़ा वाले गिद्ध की उम्र डेढ़ वर्ष है और अन्य की तीन से चार वर्ष है। जुलाई में मुख्यमंत्री द्वारा इस केंद्र के लोकार्पण किया जा सकता है। वर्ष 2007 से लाल गर्दन वाले राज गिद्ध को लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

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    देश में इस प्रजाती के गिद्धों की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद राज गिद्धों के संरक्षण व प्रजनन केंद्र बनाने की योजना तैयार हुई थी। कैंपियरगंज भारी वैसी जमीन चिन्हित होने के बाद मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 में आनलाइन शिलान्यास किया था।

    2023 में यह केंद्र बनकर तैयार हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने चित्रकूट समेत अन्य जगहों से यहां पर चार मादा गिद्धों को लाकर संरक्षित करना शुरु किया। नर गिद्ध की तलाश चल रही थी। जिसे टीम जनवरी 2024 में चित्रकूट से ही रेस्क्यू कर लायी।

    यहां के प्रभारी डा. दुर्गेश नंदन ने बताया कि केंद्र में 12 बाड़े बने हैं। पांच बाड़े में गिद्धों को रखा गया है। एक बाड़े में रखने से यह एक दूसरे के प्रति हिंसात्मक हो जाते हैं। इसलिए इन्हें अलग-अलग रखा गया है। जनवरी में लाए गए नर गिद्ध ने अपना जोड़ा बना लिया है। बाड़े में लगे दो सीसी कैमरों से 24 घंटे निगरानी हो रही है।

    इन गिद्धों को आने वाले समय में छोड़ा जाना है। इनके अंदर वन्यजीव वाली शैली बनी रहे इसलिए सप्ताह में दो बार तीन-तीन किलो मीट दिया जा रहा है। जिसे वह दो से तीन दिन में खाते हैं। नर गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए अक्टूबर में एक बार फिर टीम बाहर जाएगी।

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    डीएफओ विकास यादव ने कहा कि जटायु प्रजनन व संरक्षण केंद्र बनकर तैयार है। यहां के पांच बाड़े में लाल गर्दन वाले राज गिद्धों को संरक्षित किया जा रहा है। इसमें मादा गिद्धों की संख्या अधिक है। इनका जोड़ा लाने के लिए वन विभाग की टीम अक्टूबर में चित्रकूट, नेपाल समेत अन्य जगहों पर जाएगी। लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री का समय लिया जा रहा है। मिलने के बाद जुलाई में होगा।