गोरखपुर, जागरण संवाददाता। एड्स रोगियों के लिए टीबी जानलेवा साबित हो रही है। 10 प्रतिशत रोगियों में टीबी की पुष्टि हो रही है और उनकी मौत इसी बीमारी से हो जाती है। इस साल सात सौ रोगी भर्ती हुए, इसमें से 70 में टीबी का संक्रमण मिला है। इसमें से नौ में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) व एक में एक्सटेंसिव ड्रग रेजिस्टेंट (एसडीआर) मिला है। एड्स रोगियों में टीबी संक्रमण को देखते हुए सरकार ने उनकी टीबी की जांच अनिवार्य कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का कोई सटीक उपचार नहीं है। इसलिए बचाव ही बेहतर है। इस रोग के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

यह है रोगियों की स्थिती

बीआरडी मेडिकल कालेज में अक्टूबर 2007 से अब तक 19742 एड्स रोगियों का पंजीकरण हुआ है। इसमें जीवित रोगियों की संख्या 5233 है। इसमें गोरखपुर के 4504 रोगी हैं। 729 रोगी अन्य जिलों के हैं। एडस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. गणेश प्रसाद यादव का कहना है कि समाज में एड्स के प्रति भय और भ्रांति को दूर कर एड्स रोगियों के साथ समानता का व्यवहार करने की जरूरत है। यह हाथ मिलाने, छूने आदि से नहीं फैलता है। इसके फैलने का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध है। जागरूकता से ही इस बीमारी पर नियंत्रण संभव है।

कारण

  • एचआइवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध
  • संक्रमित रक्त चढ़ाने से
  • इंजेक्शन से नशे की दवा लेने से
  • गोदना या टैटू से
  • दूसरों की ब्लेड, उस्तरा इत्यादि के प्रयोग से

लक्षण

  • वजन कम होना
  • लंबे समय तक बुखार या पतला दस्त
  • चर्म रोग संक्रमण
  • नाखून व मुंह में संक्रमण
  • बार-बार श्वांस में संक्रमण
  • क्षय रोग, निमोनिया

बचाव

  • संयम
  • जीवनसाथी के प्रति वफादारी
  • कंडोम का प्रयोग
  • लक्षण दिखने पर जांच
  • सरकारी या पंजीकृत रक्तकोष से रक्त लें
  • नियमित रक्तदान
  • इस्तेमाल करने के बाद सीरिंज अपने सामने ही नष्ट कराएं
  • प्रत्येक गर्भवती की एचआइवी जांच
  • एचआइवी संक्रमित गर्भवती का चिकित्सक की देखरेख में प्रसव

Edited By: Pragati Chand

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट