गोरखपुर : गोरखपुर मंडल के देवरिया जनपद मुख्यालय पर स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा ¨हदी साहित्य की यात्रा की साक्षी है। पराधीन भारत में एक जनवरी 1915 से इसका संचालन शुरू किया गया। 103 वर्ष की लंबी यात्रा में इसने कई पड़ाव देखे। अंग्रेजी शासनकाल में राष्ट्र व भाषा का जिक्र भी जब अपराध समझा जाता था। उस विषय हालात में जनपद के नागरिक इसकी स्थापना कर ¨हदी भाषा के प्रचार-प्रसार में जुट गए। तब से अब तक ¨हदी भाषा साहित्य को सहेजने का कार्य कर रहा है।

उस कालखंड में कुंज बिहारी चतुर्वेदी की अध्यक्षता में नागरिकों ने राष्ट्रभाषा ¨हदी के प्रचार-प्रसार के लिए इसकी स्थापना की, ताकि नवयुवकों में राष्ट्रीय चेतना पैदा कर स्वतंत्रता प्राप्ति के मकसद को पूरा किया जा सके। काशी नागरी प्रचारिणी सभा के संस्थापकों में एक गवर्नमेंट स्कूल के प्रधानाध्यापक पं.रामनारायण मिश्र भी इसे जुड़ गए। उनके सहयोग से तमकुही के राजा इंद्रजीत प्रताप शाही के आर्थिक सहयोग से भूमि क्रय करके खपरैल भवन का निर्माण हुआ। 1915-20 के बीच आर्य भाषा पुस्तकालय, वाचनालय की स्थापना की गई। हर वर्ग के लोगों ने दान देकर सहयोग किया। स्थानीय लोगों के सहयोग से सभा का संचालन होता रहा। सन 1962 में सभा की सोसाइटी का पंजीकरण कराया गया। 1963 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त के हाथों सभा भवन का शिलान्यास किया गया। भवन तैयार होने पर दो वर्ष बाद 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने इसका उद्घाटन किया।

देश के ख्यातिलब्ध साहित्यकार व विद्वान हुए सम्मानित : यहां प्रतिवर्ष साहित्यिक व सांस्कृतिक आयोजन होने लगे, जिनमें देश के कोने-कोने से ¨हदी के प्रसिद्ध साहित्यकार व विद्वानों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया। इनमें प्रमुख रूप से डा.सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, महादेवी वर्मा, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डा. राजकुमार वर्मा, भगवती प्रसाद ¨सह, पं. कमलापति त्रिपाठी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, रत्नशंकर प्रसाद, विष्णुकांत शास्त्री, डा. मुरली मनोहर जोशी, डा. विद्यानिवास मिश्र, प्रो. विशुद्धानंद पाठक, कमल किशोर गोयनका, डा. रामदेव शुक्ल, राजेंद्र कुमार बाजपेयी, केदारनाथ ¨सह, डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, डा. विद्या¨वदु ¨सह, रामदरश मिश्र, ध्रुवदेव मिश्र पाषाण, खगेंद्र ठाकुर, प्रो. आरके शुक्ल शामिल हैं।

2003 से दिए जाते हैं नागरी सम्मान : वर्ष 2003 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ¨हदी दिवस पर नागरी सम्मान देने की शुरूआत हुई। नागरी रत्न सम्मान अ¨हदी भाषी राज्यों के उन विद्वानों को दिया जाता है, जो ¨हदी के प्रचार-प्रसार और लेखक में लगे हैं। नागरी भूषण सम्मान राज्य स्तर के ¨हदी विद्वान व नागरी श्री सम्मान स्थानीय परिक्षेत्र में ¨हदी के लिए कार्य कर रहे विद्वान जिनकी कोई कृति प्रकाशित हो, दिया जाता है। वर्ष 2014 से अंतरराष्ट्रीय ¨हदी दिवस 10 जनवरी के अवसर पर विश्व नागरी रत्न सम्मान अंतरराष्ट्रीय फलक पर ¨हदी का प्रचार-प्रसार व लेखन कार्य करने वाले प्रवासी भारतीय को दिया जाता है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 2015 में डाक विभाग की तरफ से विशेष आवरण व डाक टिकट जारी किया गया। पुस्तकालय में 25 हजार से अधिक पुस्तकें हैं, जिसमें निराला, सुमित्रानंदन पंत्र, जयशंकर प्रसाद, माखन लाल चतुर्वेदी, हजारी प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पं. नेहरू, लक्ष्मीनारायण मिश्र व फणेश्वरनाथ रेणु ग्रंथावली शामिल है। वेद, उपनिषद, संहिता, स्मृतियां, महाभारत, दर्शन, ¨हदी विश्वकोष भी उपलब्ध है। नागरी प्रचारिणी विभिन्न दिवसों पर साहित्यिक गतिविधियों को संचालित करता है। इसमें ¨हदी दिवस के अलावा तुलसी जयंती, निराला जयंती, गांधी व शास्त्री जयंती, होली मिलन, भारतीय नवर्ष आदि प्रमुख है। प्रत्येक माह के द्वितीय शनिवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। ¨हदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने में लगा है।

- सुधाकर मणि त्रिपाठी, अध्यक्ष नागरी प्रचारिणी सभा

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