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    रेशम से घाव भरने वाले विवेक को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 24 Feb 2021 04:10 AM (IST)

    मूल रूप से देवरिया के भटनी स्थित रामपुर खोरीबारी गांव के विवेक मिश्र बेंगलुरू स्थित फाइब्रोहील वुंडकेयर के संस्थापक हैं। उन्होंने भरत टंडन व सुब्रमण्यम शिवरामन के साथ मिलकर कंपनी बनाई है।

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    रेशम से घाव भरने वाले विवेक को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

    देवरिया : कोकून से निकलने वाले फाइब्रोइन प्रोटीन से संक्रमित व असंक्रमित घाव को भरने की दवा तैयार करने वाली देवरिया के विवेक मिश्र की कंपनी को नेशनल टेक्नालाजी स्टार्टअप अवार्ड-2020 मिलेगा। विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार का प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 11 मई को यह अवार्ड देगा।

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    मूल रूप से देवरिया के भटनी स्थित रामपुर खोरीबारी गांव के विवेक मिश्र बेंगलुरू स्थित फाइब्रोहील वुंडकेयर के संस्थापक हैं। उन्होंने भरत टंडन व सुब्रमण्यम शिवरामन के साथ मिलकर कंपनी बनाई है। बीफार्मा में स्नातक व पुणे से प्रबंधन में स्नातकोत्तर करने वाले विवेक ने रेशम के कोकून में मिलने वाले सेरिसिन व फाइब्रोइन प्रोटीन के जरिए घाव भरने पर शोध किया था। उन्होंने इस दवा को सरकारी, डिफेंस व चैरिटेबल के साथ निजी अस्पतालों को भी उपलब्ध कराया। इन दवाओं में मलहम के अलावा घाव भरने में कारगर बैंडेज, कवर, फोम, पाउडर आदि भी तैयार कर उसका पेटेट कराया है। इनका दिल्ली एम्स में क्लीनिकल ट्रायल हुआ था, जिसमें बेहतर परिणाम मिले थे।

    विवेक ने 2017 में फाइब्रोहील वुंड केयर प्राइवेट लिमिडेट बनाई। विवेक के मुताबिक, अब इन दवाओं के आयात की आवश्यकता नहीं है। रेशम का कीड़ा जिस पूर्ण कोये (कोकून) को तोड़कर रेशम कीड़ा बाहर आता है, वह बेकार हो जाता है। इसी कोया से संबंधित प्रोटीन मिलता है। कर्नाटक सरकार उनके इस प्रयास के लिए एलीवेट हंड्रेड के तहत मोस्ट इनोवेटिव स्टार्टअप 2019 व स्टार्टअप आफ द इयर 2020 से नवाज चुकी है। अरुणाचल प्रदेश में हुई प्राथमिक शिक्षा

    34 वर्षीय विवेक के पिता शिवचंद्र प्रकाश मिश्र अरुणाचल प्रदेश में सरकारी स्कूल में अध्यापक और माता शोभा मिश्रा निजी स्कूल में उप प्रधानाचार्य हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा अरुणाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल में हुई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह बेंगलुरु चले गए।