UP News: रोडवेज की बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में दवा-पट्टी की जगह मिला... अब हंसे या चौंके, देखकर हुई बड़ी कंफ्यूजन
रोडवेज की लगभग सभी बसों में स्थापित फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र की स्थिति बदहाल है। चालकों और परिचालकों को न इन महत्वपूर्ण उपकरणों की कोई जानकारी है और न ही परिवहन निगम को कोई चिंता। दुर्घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था और इंतजाम की हवा निकल जाती है। फर्स्ट एड बॉक्स में मरहम-पट्टी (किट) की जगह शीशा और कंघी रखी हुई है।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। सोमवार, शाम 04:00 बजे के आसपास। कचहरी बस स्टेशन पर यूपी 78 जेएल 8984 नंबर की बस प्रयागराज जाने के लिए खड़ी है। चालक- परिचालक यात्रियों का इंतजार कर रहे हैं। बस के अंदर पड़ा अग्निशमन यंत्र चालक सीट के पीछे इधर-उधर लुढ़क रहा है।
फर्स्ट एड बाक्स तो अपनी जगह पर स्थित है, लेकिन उसमें दवाइयों और मरहम-पट्टी (किट) की जगह शीशा और कंघी रखी हुई है। पूछने पर चालक श्रीप्रकाश बगले झांकने लगे। परिचालक राजेन्द्र प्रसाद का कहना है कि फर्स्ट एड बाक्स के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
ठीक पीछे खड़ी यूपी 78 एचटी 4599 नंबर की बस भी प्रयागराज जाने के लिए ही खड़ी है। चालक रामबाबू को पता ही नहीं है कि बाक्स में क्या है। खोलकर देखा तो पता चला वह कागज की रद्दी से भरा पड़ा है। परिचालक का कहना है, बस एक लाख से अधिक किमी चल चुकी है, लेकिन सर्विसिंग नहीं हुई है।
यूपी 78 एचटी 4546 नंबर की बस में स्थापित फर्स्ट एड बाक्स भी हाथी दांत बना हुआ था। यात्रियों को जागरूक करने के लिए निगम ने नई बसों पर स्लोगन लिखवाया है, स्मार्ट बनिए- सुरक्षा चुनिए, लेकिन निगम खुद सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर रहा है।
बसों में अग्निशमन यंत्र की स्थिति बदहाल
नई हो या पुरानी, रोडवेज की लगभग सभी बसों में स्थापित फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र की स्थिति बदहाल है। चालकों और परिचालकों को न इन महत्वपूर्ण उपकरणों की कोई जानकारी है और न ही परिवहन निगम को कोई चिंता। दुर्घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था और इंतजाम की हवा निकल जाती है।
यह तब है जब रोडवेज की सभी बसों में आवश्यक दवाइयों के साथ फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र व फिटनेस प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। इसके लिए संबंधित रोडवेजकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपये खर्च भी होते हैं, लेकिन ढाक के वही तीन पात।
हाईवे पर आए दिन वाहन दुर्घटनाओं के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। आलम यह है कि बसों की यात्री सुविधाएं कागजों में ही उच्चीकृत हो रही हैं। गोरखपुर परिक्षेत्र में ही रोडवेज के बेड़े में 750 से अधिक बसें शामिल हैं। महानगर में ही 25 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हैं, हालांकि, 20 बसें श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अयोध्या धाम चली गई हैं। एक खराब है, चार बसें ही विभिन्न रूटों पर चल रही हैं।
विभाग भी बिना देखे जारी कर देता है फिटनेस प्रमाण पत्र
परिवहन निगम (रोडवेज) के बसाें की फिटनेस जांच भी सामान्य वाहनों की तरह ही होती है। लेकिन परिवहन विभाग (आरटीओ) के अधिकारी रोडवेज की बसों को भी बिना समुचित जांच के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। रोडवेज की बसों के लिए भी फर्स्ट एड बाक्स, अग्निशमन यंत्र, ब्रेक, हार्न, वाइपर, इंडिकेटर, साफ-सफाई, प्रदूषण, स्टेयरिंग, लाइट, ढांचा (लंबाई व चौड़ाई), वाहन चलने लायक है कि नहीं, शाकर, चेसिस, बाडी, इंजन, स्पीडोमीटर, गेयर, टायर, शीशा, इलेक्ट्रिकल (वायरिंग), डेंट-पेंट, नंबर प्लेट, परवर्ती टेप, टैक्स और बीमा की जांच जरूरी होती है।
ऐसे बनता है फिटनेस प्रमाणपत्र
- व्यावसायिक वाहनों के लिए आठ साल तक प्रत्येक दो वर्ष के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र।
- आठ साल बाद अधिकतम 15 वर्ष तक प्रत्येक साल फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाना अनिवार्य।
- गैर व्यावसायिक वाहनों के लिए 15 साल के लिए एक बार ही बनता है फिटनेस प्रमाणपत्र।
गोरखपुर परिक्षेत्र के लिए हाल ही में फर्स्ट एड बाक्स के लिए एक हजार किट खरीदे गए हैं। ई टिकट मशीन के साथ ही परिचालकों को किट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यात्री सुविधाएं और सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। - लव कुमार सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक- परिवहन निगम
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