इस इमामबाड़े ने 1948 में ही बेटियों के लिए खोली थी इल्म की राह Gorakhpur News
देश की आजादी से 11 वर्ष पहले बना मदरसा अब पूर्वांचल का बड़ा शिक्षा केंद्र बन चुका है। इसकी स्थापना इमामबाड़ा इस्टेट की बहू व जव्वाद अली शाह की पत्नी हैदरी बेगम ने की थी।
गोरखपुर, काशिफ अली। बात उन दिनों की है जब शहर के बहुत से परिवार चाहकर भी बेटियों को स्कूल की राह नहीं दिखा पाते थे। इसकी एक बड़ी वजह लड़कियों के लिए अलग से शिक्षण संस्थान का न होना था। लोगों के इस दर्द को इमामबाड़ा इस्टेट की बहू व जव्वाद अली शाह की पत्नी हैदरी बेगम ने समझा। देश की आजादी से 11 वर्ष पहले उन्होंने मदरसे की शक्ल में शिक्षा की अलख जगाई, जिसकी रोशनी आज देश दुनिया में फैल रही है।
महिला शिक्षा का बड़ा केंद्र है यह इमामबाड़ा
सदियों से सोने-चांदी के ताजियों का दीदार करा रहा इमामबाड़ा इस्टेट न सिर्फ मोहर्रम की परंपराओं व इमारतों को लेकर खास है, बल्कि पूर्वांचल में महिला शिक्षा का बड़ा केंद्र भी है। लखनऊ के हॉवर्ड कॉलेज में पढ़ी मरहूम हैदरी बेगम ने शादी के बाद इमामबाड़े को देखा तो इसके एक हिस्से को लड़कियों की तालीम के लिए इस्तेमाल पर जोर दिया। पति जव्वाद अली शाह ने 1936 में उनकी ख्वाहिश पूरी करते हुए मदरसे की शुरुआत कराई। जिसे बाद में स्कूल की शक्ल दी गई।
पहले मदरसा था, अब बन गया शिक्षा का बड़ा केंद्र
यही स्कूल 1948 में इमामबाड़ा हाईस्कूल और फिर 1956 में इंटर कॉलेज में तब्दील हो गया। 1973 में इमामबाड़ा परिसर में सैयद जव्वाद अली शाह इमामबाड़ा गर्ल्स डिग्री कॉलेज की नींव पड़ी जो अब पीजी कॉलेज है। शहर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी तादाद में लड़कियां यहां पढऩे आती हैं।
6500 छात्राएं कर रही हैं पढ़ाई
मौजूदा वक्त में इंटर व पीजी कॉलेज मिलाकर 6500 छात्राएं तालीम हासिल कर रही हैं। इस संबंध में इमामबाड़ा इस्टेट के गद्दनशीं फर्रुख अली शाह कहते हैं कि विरासत में मिली परंपराओं के साथ इमामबाड़े से शिक्षा की रोशनी को आगे बढ़ा रहे हैं।
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