सपा कुर्सी विवाद पर अखिलेश यादव का बड़ा एक्शन, गोरखपुर की सभी इकाईयों को किया भंग
गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के मंच पर कुर्सी विवाद और पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से मारपीट के बाद अखिलेश यादव ...और पढ़ें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव। जागरण
HighLights
गोरखपुर सपा में कुर्सी विवाद के बाद अखिलेश का बड़ा एक्शन।
पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से मारपीट के आरोप लगे।
अखिलेश यादव ने सभी जिला और महानगर इकाइयां भंग कीं।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। समाजवादी पार्टी बाहर लोकतंत्र बचाने की लड़ाई का संदेश दे रही थी और गोरखपुर में उसके मंच पर ही शनिवार को कुर्सी को लेकर ऐसा विवाद हुआ, जिसने पार्टी की अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया। प्रेस क्लब में पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से मारपीट और थप्पड़ मारे जाने के आरोपों के बाद पार्टी ने कुछ ही घंटों में अंशुमान सिंह को निष्कासित कर दिया। इसके अगले ही दिन रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी समेत प्रदेश की सभी कार्यकारिणियां तत्काल प्रभाव से भंग कर दीं।
पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी पत्र में कार्रवाई का दायरा सिर्फ जिला संगठन तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला और महानगर कार्यकारिणी के साथ फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणियों के पदाधिकारी और सदस्य भी तत्काल प्रभाव से हटा दिए गए हैं। इस फैसले को शनिवार की घटना की तात्कालिक प्रतिक्रिया से ज्यादा गहरे संगठनात्मक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, गोरखपुर सपा में खींचतान कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय से नेताओं के बीच मतभेद, टिकट को लेकर दावेदारी और शक्ति प्रदर्शन की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। कैंपियरगंज में टिकट की दावेदारी को लेकर नेताओं के समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन तक मामला पहुंचा। सितंबर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर के दावेदारों और पूर्व प्रत्याशियों के साथ बैठक की थी। कैंपियरगंज की दावेदारी पर उन्होंने खुद सवाल किया था और स्पष्ट किया था कि अभी केवल चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी का नाम तय है।

एक घटना नहीं, लंबे समय से जमा हो रहा था असंतोष
जफर अमीन डक्कू प्रकरण ने भी स्थानीय संगठन की मुश्किलें बढ़ाई थीं। जेल में बंद डक्कू ने पत्र लिखकर जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम और कुछ पार्षदों को उनसे मिलने की जरूरत न होने की बात कही थी। उन्होंने जिलाध्यक्ष पर उनकी बात पूरी तरह नहीं सुनने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में ब्रजेश गौतम ने भी डक्कू पर पलटवार किया था। मामला पार्टी के अंदर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
इसके पहले भी गोरखपुर सपा में नेतृत्व और गुटों के बीच खींचतान के कई प्रसंग सामने आते रहे हैं। ऐसे में शनिवार का विवाद सिर्फ दो नेताओं के बीच कुर्सी को लेकर हुई कहासुनी नहीं था। जिस समय जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान को लेकर पत्रकार वार्ता कर रहे थे, उसी समय पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट ने संगठन की अनुशासन व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
नगीना से बृजेश तक, बदलते रहे चेहरे
गोरखपुर में संगठन के नेतृत्व का इतिहास भी शीर्ष नेतृत्व की लगातार कोशिशों को दिखाता है। नगीना साहनी को मार्च 2020 में जिलाध्यक्ष बनाया गया था। करीब डेढ़ साल बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें हटा दिया गया और अवधेश यादव को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद मार्च 2023 में ब्रजेश कुमार गौतम को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वह करीब साढ़े तीन वर्ष से इस पद पर थे।
यानी नगीना साहनी का जिलाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल करीब डेढ़ वर्ष ही रहा, लेकिन उनके बाद भी संगठन के भीतर खेमेबंदी का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा। अब ब्रजेश गौतम के नेतृत्व वाली कार्यकारिणी भी भंग हो गई है।
राजनीतिक रूप से देखें तो अखिलेश यादव का ताजा फैसला चेहरों से ज्यादा संगठन की कार्यशैली पर सवाल है। 2027 का चुनाव सामने है और गोरखपुर सपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में स्थानीय नेतृत्व यदि टिकट की दावेदारी, व्यक्तिगत वर्चस्व और आपसी टकराव में उलझता दिखे तो उसका सीधा असर चुनावी तैयारी पर पड़ना स्वाभाविक है।
यह भी पढ़ें- राम नगीना साहनी से मारपीट मामले में संजय निषाद ने सपा को दी चेतावनी, बोले- अखिलेश यादव दर्ज कराएं FIR
इसलिए शनिवार का थप्पड़ शायद केवल एक विवाद का अंत नहीं, बल्कि लंबे समय से जमा हो रही शिकायतों पर नेतृत्व की बड़ी कार्रवाई का ट्रिगर बना है। अब असली परीक्षा नई जिला और महानगर टीम के गठन की होगी। अखिलेश यादव गोरखपुर में पुराने गुटों के बीच संतुलन बनाते हैं या पूरी तरह नए चेहरों के साथ संगठन खड़ा करते हैं, यही तय करेगा कि यह फैसला महज कार्यकारिणी भंग करने तक सीमित रहता है या सपा गोरखपुर में संगठनात्मक रीसेट की ओर बढ़ती है।
पार्टी नेतृत्व का निर्णय सर्वमान्य है। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रति हमारी पूरी निष्ठा है। संगठन में जो भी निर्णय नेतृत्व ने लिया है, वह निश्चित रूप से पार्टी को और मजबूत करने तथा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को बेहतर दिशा देने के लिए है। सभी कार्यकर्ता अनुशासन और एकजुटता के साथ पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
