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    भगवान झूलेलाल को प्रसन्न करने के लिए 40 दिन पूजा-प्रार्थना करेगा सिंधी समाज

    By Pradeep SrivastavaEdited By:
    Updated: Fri, 08 Jul 2022 12:32 PM (IST)

    Chaliho Festival on July 16 गोरखपुर में झूलेलाल महोत्‍सव मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भगवान झूलेलाल को प्रसन्‍न रखने के ल‍िए स‍िंधी समाज के लोग 40 दिन तक चालिहो महोत्सव मनाएंगे। चालिहो महोत्सव इस बार 16 जुलाई से शुरू होगा।

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    गोरखपुर में झूलेलाल महोत्‍सव की तैयारी शुरू हो गई है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

    गोरखपुर, जागरण संवाददाता। सिंधी समाज का 40 दिन का चालिहो महोत्सव 16 जुलाई से शुरू होगा। इस दौरान भगवान झूलेलाल की पूजा-प्रार्थना होगी। इसके अंतिम नौ दिन नवरात्र के नाम से जाने जाते हैं, जिसमें श्रद्धालुओं की साधना गहन हो जाती है। वे मंदिरों में नौ दिन निवास कर भगवान की विधि-विधान से पूजा-प्रार्थना करते हैं। 41वें दिन 25 अगस्त को भगवान का महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। चालिहो महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नवनिर्मित मंदिर में इस बार पूजा करने की तैयारी चल रही है।

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    40 दिन की तपस्या के बाद प्रकट हुए थे भगवान

    चालिहो महोत्सव का संबंध भगवान झूलेलाल के प्रकट होने से हैं। सिंध प्रांत में मिरख बादशाह के अत्याचारों से तंग आकर श्रद्धालुओं ने सिंधु नदी के किनारे 40 दिन तक भगवान वरुण की प्रार्थना की थी। 40वें दिन भगवान वरुण, झूलेलाल के रूप में प्रकट हुए थे। इसी उपलक्ष्य में सिंधी समाज 16 जुलाई से 24 अगस्त तक चालिहो महोत्सव मनाता है। इस दौरान श्रद्धालु पूजा-प्रार्थना से आत्मशुद्धि का प्रयास करते हैं। 25 अगस्त को धूमधाम से श्रीझूलेलाल महोत्सव मनाया जाता है।

    भगवान झूलेलाल ने किया मिरख बादशाह का अंत

    श्रद्धालुओं की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उडेरो लाल (वरुण देवता) मछली पर सवार होकर सिंधु नदी में प्रकट हुए। उनका दर्शन पाकर भक्तों ने जयघोष किया- 'आयो लाल झूलेलाल।' वरुण देवता ने कहा कि चिंता न करो मैं रतन राय के घर जन्म लूंगा और तुम्हारे दुखों का अंत करूंगा। सन 951 में सिंध प्रांत के नसरपुर नगर में रतन राय के घर चैत्र शुक्ल द्वितीया को एक बालक का जन्म हुआ। इसलिए उन्हें चेट्रीचंड्र (चैत्र का चांद) कहते हैं। उनका नाम उदय चंद्र रखा गया। बड़े होने पर वह घोड़े पर सवार होकर मिरख बादशाह के पास गए, उसे समझाया लेकिन फौज व धन के घमंड में वह उनकी बात नहीं समझा। अंतत: उदय चंद्र ने उसका वध कर दिया। चूंकि वरुण देवता के प्रकट होने पर भक्तों ने 'आयो लाल झूलेलाल' का जयघोष किया था, इसलिए उन्हें झूलेलाल कहा जाता है।

    कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वर्ष झूलेलाल महोत्सव को सादगीपूर्ण मनाया गया था। इस बार संक्रमण न होने से 25 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। नवनिर्मित मंदिर में पूजा करने की तैयारी चल रही है। महोत्सव का जुलूस निकाला जाएगा। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया जाएगा। - राजेश नेभानी, अध्यक्ष, भारतीय सिंधी सभा।