Indian Railway News: NER की तकनीक से देशभर की ट्रेनों को मिल रही दिशा और गति, गोरखपुर का सिग्नल वर्कशॉप बना हब
गोरखपुर का सिग्नल वर्कशॉप इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन और सिग्नलिंग रिले का हब बन गया है। यहां से भारतीय रेलवे के सभी जोन में इन मशीनों की सप्लाई हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3695 प्वाइंट मशीनें और 35200 सिग्नल रिले तैयार किए गए। पूर्वोत्तर रेलवे समेत कई जोन में इन मशीनों के लगने से ट्रेनों की गति में सुधार हुआ है।

प्रेम नारायण द्विवेदी, जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) की तकनीक से देशभर की ट्रेनों को दिशा व गति मिल रही है। मुख्यालय गोरखपुर का सिग्नल वर्कशाप (कारखाना) इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन और सिग्नलिंग रिले का हब बन गया है।
गोरखपुर छावनी (कैंट) स्थित सिग्नल वर्कशाप से भारतीय रेलवे के सभी जोन में प्वाइंट मशीन व सिग्नलिंग रिले की सप्लाई आरंभ हो गई है। मांग बढ़ने के साथ सिग्नल वर्कशाप प्रबंधन ने प्वाइंट मशीन और सिग्नलिंग रिले का उत्पादन भी बढ़ा दिया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में सिग्नल वर्कशाप में रिकार्ड 3695 प्वाइंट मशीन और 35200 सिग्नल रिले तैयार किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग चार हजार प्वाइंट मशीन और 50 हजार सिग्नल रिले के उत्पादन का लक्ष्य है।
सिग्नल वर्कशाप का कायाकल्प हुआ तो कोविडकाल से बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन व सिग्नलिंग रिले बनने शुरू हो गए। वर्ष 2021-22 में 1696 प्वाइंट और 21000 सिग्नलिंग रिले का उत्पादन हुआ। पूर्वोत्तर रेलवे के अलावा उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्व रेलवे, साउथ सेंट्रल रेलवे और सेंट्रल रेलवे समेत छह जोन को इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन व सिग्नल रिले की सप्लाई हुई।
भारतीय रेलवे स्तर पर मांग बढ़ी तो वर्ष 2022 में रिकार्ड 2692 इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीनों और 30742 सिग्नलिंग रिले का उत्पादन हुआ, जिसे पूर्वोत्तर रेलवे समेत आठ जोन में भेजा गया।
वर्ष 2025 में तो गोरखपुर वर्कशाप इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन व सिग्नलिंग रिले का मुख्य उत्पादक केंद्र बन गया है।
गोरखपुर वर्कशाप में बने उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन व सिग्नलिंग रिले का उपयोग पूर्वोत्तर रेलवे के अलावा पूर्व रेलवे, पश्चिम रेलवे, उत्तर रेलवे, दक्षिण रेलवे, मध्य रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे, उत्तर पश्चिम रेलवे और पूर्व तटीय रेलवे में होने लगा है। पूर्वोत्तर रेलवे समेत इन जोन की ट्रेनें अधिकतम 110 से 130 किमी प्रति घंटे की गति से चलने लगी हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के 505 स्टेशनों के लूप लाइनों पर भी इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीनें लगा दी गई हैं, जिससे स्टेशन यार्ड में भी ट्रेनों की गति 15 से बढ़कर 30 किमी प्रति घंटे हो गई है। इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीनों का उपयोग ट्रैक बदलने में किया जाता है। प्वाइंट मशीनें ही ट्रेनों को एक से दूसरे ट्रैक पर संचालित करती हैं।
सिग्नलिंग रिले से ट्रेनों को सिग्नल मिलता है। सिग्नल कारखाने में इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन व सिग्नलिंग रिले के अलावा समपार फाटकों पर लगने वाला आधुनिक लिफ्टिंग बैरियर भी बनने लगे हैं। वर्कशाप को आइएसओ प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे का सिग्नल वर्कशाप 10 नवंबर 1944 में स्थापित हुआ था। नवंबर 1958 में इसे गोरखपुर कैंट में शिफ्ट कर दिया गया।
गोरखपुर स्थित सिग्नल कारखाने का आधुनिकीकरण किया गया है, जिसके फलस्वरूप उत्पादकता बढ़ी है। यहां मैन्युफैक्चर होने वाली इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन और सिग्नलिंग रिले की देश के अलग अलग क्षेत्रीय रेलों में सप्लाई की जाती है।
- पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे
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