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अब कोर्ट के चक्करों से मुक्ति: घर बैठे होगी RCT की सुनवाई, सीधे बैंक खाते में आएगी क्षतिपूर्ति

Published: Sun, 25 Oct 2026 10:57 AM (IST)

गोरखपुर का रेल दावा अधिकरण अब डिजिटल हो गया है, जिससे पक्षकार घर बैठे वर्चुअल सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आरसीटी गोरखपुर अब पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर।

  2. घर बैठे वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन आवेदन संभव।

  3. क्षतिपूर्ति का त्वरित निपटान, सीधे खाते में भुगतान।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलवे प्रशासन की तरह रेल दावा अधिकरण (आरसीटी) गोरखपुर भी लगभग पूरी तरह डिजिटल प्लेटफार्म पर आ गया है। अब अधिवक्ता ही नहीं पक्षकारों को भी कोर्ट आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। घर से भी सीधे आरसीटी से वर्चुअल जुड़कर सुनवाई या बहस में शामिल हो सकेंगे। खास बात यह है कि पीड़ित कहीं से भी आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पीड़ित को सिर्फ सत्यापन के लिए एक बार कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।

गोरखपुर स्थित आरसीटी में उत्तर प्रदेश के 14 जिले शामिल हैं, जिसमें गोरखपुर, अंबेडकरनगर, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, बलिया, देवरिया, फैजाबाद, गोंडा, कुशीनगर, महराजगंज, संत कबीरनगर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर जिले आते हैं। इन जनपद क्षेत्र में ट्रेन दुर्घटना होने पर पीड़ित या परिजन आरसीटी में आवेदन कर सकते हैं। यात्री अंगूली या पैर आदि में चोट लगने, हाथ व पैर आदि कटने, घायल होने या मृत्यु की स्थिति में पीड़ित या उनके परिजन मूल निवास या घटनास्थल पर पड़ने वाले आरसीटी में आवेदन कर सकते हैं। क्षतिपूर्ति के रूप में आवेदक को न्यूनतम 64 हजार से अधिकतम आठ लाख रुपये मिलते हैं।

आरसीटी के डिजिटल प्लेटफार्म पर आने से केस का निस्तारण भी तेज गति से होने लगा है। कोर्ट ने महज 93 दिन में एक अनापेक्षित दुर्घटना प्रकरण का निस्तारण किया है, तो दुर्घटना वाले एक क्लेम का फैसला करीब चार माह में सुना दिया है। एक क्लेम के निस्तारण में दस साल लग जाते थे। वर्तमान में आरसीटी में करीब 120 माम

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ले चल रहे हैं, 2023 में तीन हजार मामले लंबित थे।

आरसीटी गोरखपुर के अपर निबंधक डा. मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता तो बढ़ी ही है, पीड़ितों के खाते में सीधे पैसा भी चला जा रहा है। कोर्ट व अधिवक्ता के बीच समन्वय स्थापित होने से क्लेम का समय से निस्तारण भी हो रहा है।

1989 से चल रहा रेल दावा अधिकरण
रेलवे घायल और मृत्यु यात्रियों को भी अपना मानता है। रेल यात्रा में घायल व मृत्यु यात्रियों के स्वजन को प्रतिकर (क्षतिपूर्ति) दिलाने के लिए 1987 में भारतीय रेलवे स्तर पर रेल दावा अधिकरण कानून बना था। गोरखपुर में आठ नवंबर 1989 से रेल दावा अधिकरण चल रहा है। गोरखपुर स्थित रेल दावा अधिकरण में सदस्य न्यायिक व सदस्य तकनीकी तैनात हैं। लगभग 100 अधिवक्ता सदस्य हैं, जो दावाकर्ताओं की तरफ से साक्ष्य प्रस्तुत कर बहस करते हैं।

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रेल दावा अधिकरण के नियम

  • घायल या मृत्यु होने पर स्वजन दुर्घटना या निवास स्थल से जुड़े क्षेत्र में कर सकते हैं दावा।
  • मृत्यु होने पर मिलता है आठ लाख प्रतिकर, परिवार के सभी स्वजन की होती है हिस्सेदारी।
  • यात्री के घायल होने पर 80 हजार से छह लाख रुपये तक प्रतिकर का सुनिश्चित है प्रावधान।
  • घायल या मृत्यु यात्री के स्वजन का खाता स्थानीय बैंक में व सत्यापन के लिए उपस्थिति अनिवार्य।

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