रेलवे कर्मियों के लिए राहत भरी खबर, अब राजधानी और वंदे भारत में भी कर सकेंगे उच्च श्रेणी में सफर
रेलवे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के लिए खुशखबरी है। अब वे राजधानी, दुरंतो, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों ...और पढ़ें

HighLights
प्रीमियम ट्रेनों में उच्च श्रेणी यात्रा की अनुमति।
किराये का अंतर चुकाकर मिलेगी यह सुविधा।
रेलवे बोर्ड ने जारी किया नया स्पष्टीकरण।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। अब वे प्रिविलेज पास (पीपी), सेवानिवृत्ति-पश्चात काम्प्लिमेंटरी पास (पीआरसीपी) और विधवा पास (डब्ल्यूपी) पर राजधानी, दुरंतो, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी अपनी निर्धारित पात्रता से ऊंची श्रेणियों में यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर चुकाना होगा। अभी तक यह सुविधा मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में उपलब्ध थी। रेलवे बोर्ड ने 30 अक्टूबर को इस संबंध में नया स्पष्टीकरण जारी किया है।
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रेलवे सेवक (पास) नियम-1986 में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है, जिसके आधार पर प्रीमियम ट्रेनों में निर्धारित श्रेणी से उच्च श्रेणी में यात्रा करने की सुविधा नहीं दी जा सके। रेलवे बोर्ड ने वाणिज्य निदेशालय से परामर्श के बाद इस व्यवस्था को मंजूरी दी है।
इस फैसले से उन रेलकर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को विशेष राहत मिलेगी, जो परिवार के साथ राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी ट्रेनों से यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन पास में निर्धारित श्रेणी के कारण उच्च श्रेणी में टिकट नहीं ले पा रहे थे। अब वे किराये का अंतर जमा कर अपनी सुविधा के अनुसार उच्च श्रेणी में यात्रा कर सकेंगे। यह व्यवस्था विधवा पास धारकों के लिए भी लागू होगी।
रेलवे बोर्ड ने इसके साथ ही पास और पीटीओ पर यात्रा की संशोधित पात्रता भी जारी की है। यह निर्देश पास और पीटीओ पर यात्रा पात्रता से संबंधित पूर्व में जारी सभी निर्देशों का स्थान लेंगे। यानी अब नई व्यवस्था के अनुसार ही यात्रा पात्रता निर्धारित होगी। रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (क्रिस) को यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के ई-पास माड्यूल में तत्काल आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया है, ताकि नई सुविधा का लाभ कर्मचारियों को मिल सके।
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यह आदेश वित्त निदेशालय की सहमति से जारी किया गया है। आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे ने बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है। फेडरेशनों ने इस प्रकरण को रेलवे बोर्ड के समक्ष प्रमुखता से उठाया था।
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