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पिता ने मजदूरी कर बनाया खिलाड़ी तो बेटी ने चमका दिया नाम, गोरखपुर की प्रतिमा ने हॉकी के दम पर हासिल की खाकी वर्दी

Published: Sat, 10 Oct 2026 09:48 AM (IST)

प्रतिमा सरोज ने अपने पिता के संघर्ष और अपनी कड़ी मेहनत से हॉकी के मैदान से यूपी पुलिस में जगह ...और पढ़ें

सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पत्र लेती प्रतिमा सरोज। जागरण

सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पत्र लेती प्रतिमा सरोज। जागरण

HighLights

  1. प्रतिमा सरोज का खेल कोटे से यूपी पुलिस में चयन हुआ।

  2. पिता ने मजदूरी, पेंट-पॉलिश कर परिवार का पालन-पोषण किया।

  3. गोरखपुर से शुरू होकर लखनऊ साईं तक हॉकी प्रशिक्षण।

प्रभात कुमार पाठक, गोरखपुर। पिता के हाथों में मेहनत के निशान और बेटी की आंखों में आगे बढ़ने का सपना। घर की जरूरतें पूरी करने के लिए पिता मजदूरी और पेंट-पालिश करते रहे, तो प्रतिमा सरोज ने हाकी के मैदान पर अपने भविष्य की राह तलाशी। संसाधन सीमित थे, लेकिन हौसले में कमी नहीं थी।

गोरखपुर के एफसीआइ ग्राउंड अब से शुरू हुआ उनका सफर अब यूपी पुलिस तक पहुंच गया है। वर्ष 2026 में खेल कोटे से पुलिस में चयन प्रतिमा के लिए उपलब्धि भर नहीं, बल्कि 12 साल की मेहनत और परिवार के संघर्ष का परिणाम है।

वर्ष 2014 में गोरखपुर के एफसीआइ ग्राउंड पर प्रतिमा ने हाकी गुरु इमरान के मार्गदर्शन में हाकी खेलना शुरू किया। मैदान से जुड़ाव और खेल के प्रति लगन ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। वर्ष 2015 में वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज में प्रवेश मिला तो उनकी खेल यात्रा को नई दिशा मिली।

यहां कोच शशि मैम के निर्देशन में उन्होंने गोलकीपिंग की बारीकियां सीखीं। करीब सात साल तक स्पोर्ट्स कॉलेज में रहकर उन्होंने खेल और पढ़ाई, दोनों को आगे बढ़ाया। वर्ष 2021 में पढ़ाई पूरी हुई तो प्रशिक्षण का एक पड़ाव समाप्त हुआ, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।

स्पोर्ट्स कालेज से निकलने के बाद वर्ष 2022 में प्रतिमा ने लखनऊ स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) में प्रवेश लिया। यहां चार साल तक प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने अपने खेल को और निखारा। गोलकीपर के रूप में अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार अभ्यास किया। वर्ष 2026 में साई से प्रशिक्षण पूरा हुआ और इसी साल खेल कोटे से यूपी पुलिस में चयन भी हो गया।

पिता की मेहनत, बेटी की कामयाबी
प्रतिमा ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे उनके पिता का संघर्ष जुड़ा है। वह मजदूरी और पेंट-पालिश का काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे परिवार से आने वाली बेटी के लिए खेल में आगे बढ़ना केवल मैदान पर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं था। उसे अपने लक्ष्य के प्रति लगातार समर्पित रहना था। ऐसे में मैंने अपनी मेहनत जारी रखा और परिवार के सहयोग के साथ आगे बढ़ती रहीं। मेरे प्रशिक्षकों ने भी इस सफर में अहम भूमिका निभाई। अपनी सफलता का वह श्रेय परिवार, कोच और प्रेरित करने वाले लोगों को देती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति भी आभार जताया है।

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नई जिम्मेदारी, नए सपने
एफसीआइ ग्राउंड पर शुरू हुआ अभ्यास, स्पोर्ट्स कालेज में सीखी गोलकीपिंग और लखनऊ साईं में मिला प्रशिक्षण प्रतिमा को उस मुकाम तक ले आया, जहां से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है। यूपी पुलिस में चयन के बाद भी उनका सपना खेल में बेहतर प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करना है। साथ ही वह पुलिस सेवा में पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहती हैं और परिवार को बेहतर भविष्य देना चाहती हैं।

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