गोरखपुर, जेएनएन। देवरिया जनपद के गौरीबाजार थानाक्षेत्र के करजहां महुअवां गांव में अपनी करतूत से खाकी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। घटना के तत्काल बाद यदि पुलिस सक्रिय हुई होती तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती। घटना के बाद दलित बस्ती की महिलाएं डरी, सहमी और बदहवास हैं। पूछने पर काफी मुश्किल से बात करने को तैयार होती हैं। घटना के बारे में बताते हुए महिलाएं फफक पड़ती हैं।
एक स्वर में पुलिस पर आरोप लगाती हैं कि यदि पुलिस सतर्क रहती और गंभीरता से ली होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। गुरुवार की रात करजहां-महुअवां गांव के दलित बस्ती में रहमत अली नामक युवक द्वारा एक युवती से छ़ेड़खानी की गई। विरोध करने पर आंबेडकर की प्रतिमा तोड़ दी गई, जिससे उपजा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरे घटनाक्रम पर गौर करें तो दलित युवती से छेड़खानी के दिन पुलिस से की गई शिकायत को अगर गंभीरता से लिया गया होता तो यह घटना शायद नहीं होती। पुलिस की तरफ से ठोस कदम नहीं उठाए जाने से हमलावरों का मनोबल बढ़ गया।
दलितों के घर में घुसकर न सिर्फ पिटाई की गई, बल्कि धारदार हथियार से लैस होकर तांडव भी मचाया गया। घटना के दौरान मनबढ़ों द्वारा लहराए गए तलवार व अन्य हथियार का खौफ दलित महिलाओं व उनके बच्चों के दिलों-दिमाग पर चस्पा है। दलित बस्ती की महिला सरिता, मीना, सुनैना तथा बिरजू व अनिल ने हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पुलिस ऐसी कार्रवाई करे कि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृति न हो। महिलाओं का आरोप है कि घटना के सभी आरोपित खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

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