गोरखपुर, जेएनएन। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने सोमवार दोपहर बाद डायरेक्टर के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। मेडिकल छात्र डायरेक्टर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एम्स परिसर से बाहर निकल गए और जुलूस की शक्ल में तकरीबन चार किलोमीटर कैंट थाना की ओर रवाना हो गए। डायरेक्टर की तानाशाही, नहीं-चलेगी, नहीं चलेगी जैसे नारों के बीच एम्स से बाहर निकले मेडिकल छात्रों का आरोप है कि प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं का डायरेक्टर ने मोबाइल फोन छीन लिया और अपशब्द कहे।

छात्र और डाइरेक्‍टर के बीच यह है मामला

परीक्षा से वंचित किए गए 12 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। इनका आरोप है कि कोरोना काल में आनलाइन कक्षा में उपस्थिति पूरी न होने का कारण बताते हुए उन्हें वंचित किया गया है। जबकि हकीकत यह है कि आनलाइन कक्षाओं के लिए कोई नियम नहीं बनाया गया था। छात्रों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने की जानकारी के बाद डायरेक्टर ने सोमवार को प्रथम व द्वितीय वर्ष के साथ ही परीक्षा से वंचित किए गए 11 छात्रों को बुलाया। सभी के आने के बाद उनका मोबाइल फोन जमा करा लिया गया। फिर एक-एक छात्र को बुलाकर उनके मोबाइल फोन में वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर के अकाउंट देखना शुरू किया गया। छात्रों के पर्सनल फाइलों को भी देखा जाने लगा। छात्रों ने इसका विरोध किया तो आरोप है कि डायरेक्टर ने उन्हें अपशब्द कहा।

सुबह से जमा है कई छात्रों के मोबाइल

आरोप है कि डायरेक्टर ने सोमवार सुबह 10 बजे मोबाइल फोन जब्त किया और कई छात्रों को अब तक नहीं दिया गया है। वह सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से बहुत नाराज हैं। बताया कि कैंट थाना में वह डायरेक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत करेंगे।

द्वितीय वर्ष में है 38 छात्र

एमबीबीएस प्रथम वर्ष से पास होकर 38 छात्र द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा प्रथम वर्ष में 50 नए छात्रों की पढ़ाई चल रही है। इन्हीं छात्रों के साथ परीक्षा से वंचित किए गए 11 छात्र भी क्लास में बैठते हैं। एक छात्र शशांक शेखर ने 31 दिसंबर 2020 के बाद क्लास में आना छोड़ दिया है। इसी छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

Edited By: Satish chand shukla