गाव आया तो लग रहा लौट आई जवानी : संतोष आनंद
- उद्गार - पूर्वाचल की संस्कृति व भोजपुरी मिठास से भाव विभोर हुए गीतकार -मनोज कुमार ने पहचा
- उद्गार
- पूर्वाचल की संस्कृति व भोजपुरी मिठास से भाव विभोर हुए गीतकार
-मनोज कुमार ने पहचानी मेरी प्रतिभा, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
जागरण संवाददाता, ककरही, गोरखपुर : क्रांति, शोर, पूरब-पश्चिम और रोटी, कपड़ा व मकान जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत देने वाले फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित मिलेनियम गीतकार संतोष आनंद ने पूर्वाचल की गंवई माटी में पहली बार पहुंचकर पुरानी यादें ताजा कीं। यहा की भोजपुरी जुबान की मिठास देखकर वे भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि गाव आकर इतना प्रसन्न हूं कि लग रहा कि मेरी जवानी लौट आई है।
संतोष आनंद यहां गोला बाजार में आयोजित कवि सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरी आत्मा तो गावों में बसती है। मैं मुंबई का रहने वाला हूं। लाइब्रेरियन की नौकरी कर रहा था। लिखने-पढ़ने का शौकीन था, लेकिन कभी इस क्षेत्र में जाने का विचार नहीं बना था। वर्ष 1968 में पहली बार मनोज कुमार साहब ने मेरी प्रतिभा को पहचाना और मंच प्रदान किया। मैने पूरब-पश्चिम फिल्म के लिए पहला गीत पुरवा सुहानी आई रे ... दिया था। उसके बाद शोर फिल्म में जरा सा उसको छुआ, उसने मचा दिया शोर और एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है, गीत के बाद मेरी जिंदगी ही बदल गई । इसके बाद क्रांति में जिंदगी की ना टूटे लड़ी, चना जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार। प्रेमरोग फिल्म में मैं हूं प्रेमरोगी...आदि अनेक कालजयी गीत दिये।
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