अब पता चलेगा, भगवान बुद्ध की ननिहाल भारत है या नेपाल- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग कराएगा उत्खनन
भारतीय पुरातत्वविद दिशा व दूरी के हिसाब से रामग्राम व देवदह को महराजगंज जिले में बताते हैं लेकिन नेपाल का दावा है कि रामग्राम व देवदह उनके यहां है। ऐसे में रामग्राम की वास्तविकता जानने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन कराने जा रहा है।
गोरखपुर, विश्वदीपक त्रिपाठी। बुद्धकालीन कोलीय गणराज्य की राजधानी रामग्राम और महात्मा बुद्ध की ननिहाल देवदह को लेकर भारत-नेपाल के पुरातत्वविदों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों का पटाक्षेप शीघ्र होने की उम्मीद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नवंबर के अंतिम सप्ताह में महराजगंज जिले के चौक जंगल में स्थित रामग्राम स्तूप का उत्खनन कराएगा। इसके अलावा भगवान की बुद्ध की ननिहाल देवदह की पहचान को भी पुख्ता करने के लिए जिले के बनरसिहा कला में संरक्षित स्थल पर उत्खनन कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। भारतीय पुरातत्वविद दिशा व दूरी के हिसाब से रामग्राम व देवदह को महराजगंज जिले में बताते हैं। नेपाल का दावा है कि रामग्राम व देवदह उनके यहां है। ऐसे में रामग्राम की वास्तविकता जानने के लिए महराजगंज में होने वाले उत्खनन पर दोनों देशों के पुरातत्वविदों की निगाह टिकी हुई है।
नेपाल के नवलपरासी जिले में उज्ज्यनी का नाम बदलकर रामग्राम किया गया
दुनिया भर से आने वाले बौद्ध धर्मावलंबियों को आकर्षित करने के लिए नेपाल ने सीमा से करीब आठ किमी दूर नवलपरासी जिले में स्थित उज्जयनी नामक स्थान का नाम बदलकर रामग्राम कर दिया है। वहां मौजूद स्तूप को वह रामग्राम स्तूप बता रहे हैं। इसके अलावा रुपंदेही जिले में देवदह की पहचान कर देश-विदेश से आने वाले लोगों को वहां ले जाया जाता है। हालांकि भारत में बौद्ध धर्म के जानकार नेपाल के इस दावे को भ्रामक बताते हैं। महंत अवेद्यनाथ पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. परशुराम गुप्ता ने बताया कि नेपाल के चेरिया पहाड़ियों से निकली रोहिन नदी प्राचीन शाक्य व कोलीय जनपद की सीमा रेखा थी। रोहिन के पूरब रामग्राम व पश्चिम में देवदह का उल्लेख है। ऐसे में नेपाल का यह दावा सत्य प्रतीत नहीं होता।
बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना है रामग्राम स्तूप
बौद्ध धर्म ग्रंथों के मुताबिक भगवान गौतम बुद्ध के निर्वाण के बाद उनके अस्थि अवशेष को आठ भागों में बांटा गया था। कोलियों ने अस्थि अवशेष के एक हिस्से को लेकर अपनी राजधानी में करीब 100 फीट ऊंचा ईंट का स्तूप बनवाया था। चौक जंगल में कन्हैया बाबा के थान को ही लोग रामग्राम स्तूप मानते हैं। बुद्ध की ननिहाल देवदह को लेकर जिले की नौतनवा तहसील के बनरसिहा कला को देवदह के रूप में चिन्हित किया गया है। पुरातत्व विभाग ने यहां की 74 एकड़ भूमि को संरक्षित कर वहां निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग यहां उत्खनन का प्रस्ताव भेजा गया है। इन दोनों बौद्ध स्थलों की पहचान को पुख्ता मानते हुए पांच करोड़ की लागत से यहां पर्यटकों को रहने के लिए अतिथि गृह सहित अन्य विकास कार्य भी कराए जा रहे हैं।
उत्खनन के लिए महानिदेशक जारी करेंगे लाइसेंस
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद आफताब हुसैन ने बताया कि रामग्राम में उत्खनन कार्य आरंभ करने से पूर्व टीम ने संबंधित स्थान का निरीक्षण किया है। उत्खनन के लिए महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा लाइसेंस निर्गत किया जाएगा। संभावना है कि नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में उत्खनन कार्य आरंभ हाे जाएगा।
रामग्राम स्तूप भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना है। पुरातात्विक साक्ष्यों व दिशा व दूरी के हिसाब से यह बात स्पष्ट प्रतीत होती है कि बुद्धकालीन रामग्राम व उनकी ननिहाल देवदह महराजगंज जिले में है। शीघ्र ही इन स्थलों का उत्खनन भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा कराया जाएगा। - नरसिंह त्यागी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग।
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